महाराष्ट्र

सांस की नली में फंसा चीकू का बीज

Kavita2
28 Aug 2026 9:35 AM IST
सांस की नली में फंसा चीकू का बीज
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मुंबई। नवी मुंबई में एक हैरान करने वाला मेडिकल मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति करीब तीन महीने तक सांस लेने में परेशानी और घरघराहट की समस्या से जूझता रहा। कई बार इलाज कराने के बाद भी जब राहत नहीं मिली तो जांच में पता चला कि उसकी सांस की नली में चीकू का बीज फंसा हुआ था। डॉक्टरों ने आधुनिक तकनीक फ्लेक्सिबल ब्रॉन्कोस्कोपी की मदद से सफलतापूर्वक बीज को बाहर निकालकर मरीज को नई राहत दी।

उलवे निवासी 38 वर्षीय प्रसाद नखावा पिछले कई महीनों से सांस लेने में तकलीफ, सीने में घरघराहट और असहजता की समस्या का सामना कर रहे थे। शुरुआत में उन्होंने कई सामान्य चिकित्सकों से सलाह ली और दवाइयां भी लीं। दवाओं से कुछ समय के लिए आराम जरूर मिला, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। कुछ दिनों बाद फिर से सांस लेने में परेशानी और घरघराहट शुरू हो जाती थी।

लगातार बनी रहने वाली इस समस्या ने धीरे-धीरे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करना शुरू कर दिया। सामान्य काम करने में भी उन्हें परेशानी महसूस होने लगी। इसके बाद डॉक्टरों ने विस्तृत जांच की सलाह दी, जिसमें सांस की नली में किसी तरह की रुकावट की आशंका सामने आई।

जांच में सामने आया चौंकाने वाला कारण

प्रसाद नखावा आगे की जांच के लिए खारघर स्थित मेडिकवर हॉस्पिटल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए ब्रॉन्कोस्कोपी कराने का निर्णय लिया। इससे पहले किए गए एचआरसीटी (HRCT) स्कैन में बाईं मुख्य ब्रॉन्कस यानी सांस की मुख्य नली के एक हिस्से के सिकुड़ने का पता चला था।

हालांकि, स्कैन से यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि यह रुकावट बलगम जमा होने की वजह से है या फिर किसी बाहरी वस्तु के फंसने से। लगातार लक्षणों को देखते हुए डॉक्टरों ने ब्रॉन्कोस्कोपी के जरिए सांस की नली की अंदरूनी जांच करने का फैसला किया।

जांच के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि बाईं मुख्य ब्रॉन्कस में एक बाहरी वस्तु फंसी हुई है। ध्यान से जांच करने पर सामने आया कि यह चीकू का बीज था, जो सांस की नली में फंस गया था और लंबे समय से परेशानी का कारण बना हुआ था।

फ्लेक्सिबल ब्रॉन्कोस्कोपी से निकाला गया बीज

मेडिकवर हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने फ्लेक्सिबल ब्रॉन्कोस्कोपी प्रक्रिया के माध्यम से इस बाहरी वस्तु को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। यह एक ऐसी चिकित्सा तकनीक है, जिसमें एक पतली और लचीली ट्यूब के जरिए सांस की नली के अंदर जाकर समस्या की पहचान और इलाज किया जाता है।

डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक सांस की नली में कोई बाहरी वस्तु फंसी रहने से संक्रमण, सूजन और फेफड़ों को नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है। ऐसे मामलों में समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी होता है।

बीज बाहर निकलने के बाद मरीज को तुरंत राहत महसूस हुई। सांस लेने में परेशानी और घरघराहट की समस्या में काफी सुधार आया। सफल उपचार के बाद मरीज की स्थिति बेहतर बताई गई।

डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह

चिकित्सकों का कहना है कि सांस से जुड़ी समस्याओं को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार लगातार खांसी, घरघराहट या सांस लेने में परेशानी सामान्य एलर्जी या संक्रमण लग सकती है, लेकिन इसके पीछे कोई अन्य गंभीर कारण भी हो सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, छोटे बच्चों में ऐसी घटनाएं ज्यादा देखने को मिलती हैं, लेकिन वयस्कों में भी खाने-पीने की चीजों के कारण सांस की नली में रुकावट हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक सांस लेने में परेशानी हो रही है और सामान्य इलाज से फायदा नहीं मिल रहा है तो विशेषज्ञ जांच जरूरी है।

समय पर जांच से टली बड़ी परेशानी

प्रसाद नखावा का मामला इस बात का उदाहरण है कि लगातार बने रहने वाले लक्षणों को गंभीरता से लेना कितना जरूरी है। शुरुआत में सामान्य समस्या समझी जा रही परेशानी के पीछे एक ऐसी वजह छिपी थी, जिसका पता विशेष जांच के बाद ही चल सका।

डॉक्टरों की टीम ने समय पर सही जांच और उपचार के जरिए संभावित गंभीर समस्या को टाल दिया। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि शरीर में लंबे समय से दिखाई देने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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