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Central रेलवे की माल ढुलाई में अप्रैल 2026 में बढ़ोतरी, 6.72 मिलियन टन कार्गो लोड

Maharashtra महाराष्ट्र: भारतीय रेलवे के मध्य क्षेत्र में काम करने वाली Central Railway ने अप्रैल 2026 के दौरान माल ढुलाई के क्षेत्र में अच्छी वृद्धि दर्ज की है। इस अवधि में रेलवे ने कुल 2,582 रेक के जरिए 6.72 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) माल लोड किया, जो पिछले साल की तुलना में अधिक है।
अप्रैल 2025 में इसी अवधि के दौरान 6.57 मिलियन मीट्रिक टन माल ढुलाई हुई थी। इस तरह इस साल लगभग 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही रेक की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 92 रेक अधिक उपयोग में लिए गए, जो माल ढुलाई गतिविधियों में बढ़ते दबाव और मांग को दर्शाता है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, माल ढुलाई में यह वृद्धि विभिन्न सेक्टरों में बढ़ती मांग और लॉजिस्टिक्स सिस्टम के बेहतर प्रबंधन का परिणाम है। औद्योगिक उत्पादन, कोयला आपूर्ति और अन्य आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई में लगातार सुधार देखा गया है।
क्षेत्रीय प्रदर्शन की बात करें तो नागपुर डिवीजन ने इस पूरे नेटवर्क में सबसे अधिक योगदान दिया। Nagpur डिवीजन ने कुल 3.97 मिलियन टन माल लोड किया, जो सेंट्रल रेलवे की कुल माल ढुलाई का लगभग 59 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि नागपुर क्षेत्र माल परिवहन का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।
इसके बाद मुंबई डिवीजन का स्थान रहा, जिसने 1.59 मिलियन टन माल हैंडल किया। Mumbai देश का प्रमुख आर्थिक केंद्र होने के कारण यहां माल ढुलाई की गतिविधियां लगातार सक्रिय रहती हैं। बंदरगाह और औद्योगिक इकाइयों के कारण इस क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।
सोलापुर डिवीजन ने इस अवधि में 0.59 मिलियन टन माल का योगदान दिया। Solapur क्षेत्र में मुख्य रूप से औद्योगिक और कृषि आधारित माल की ढुलाई होती है, जिससे इसकी हिस्सेदारी महत्वपूर्ण रहती है।
भुसावल डिवीजन ने 0.43 मिलियन टन माल ढुलाई की। Bhusawal रेलवे नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण जंक्शन होने के कारण यह क्षेत्र माल परिवहन में अहम भूमिका निभाता है।
पुणे डिवीजन ने 0.14 मिलियन टन माल का संचालन किया। Pune में औद्योगिक गतिविधियों और आईटी सेक्टर की मौजूदगी के कारण लॉजिस्टिक मांग लगातार बनी रहती है, हालांकि अन्य डिवीजनों की तुलना में यहां का कुल योगदान अपेक्षाकृत कम रहा।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि माल ढुलाई में यह वृद्धि न केवल राजस्व के लिए सकारात्मक संकेत है, बल्कि यह भी दिखाता है कि रेलवे नेटवर्क पर भरोसा बढ़ रहा है। आने वाले महीनों में इस गति को और बढ़ाने के लिए ढांचागत सुधार और परिचालन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, सेंट्रल रेलवे की यह प्रगति देश के लॉजिस्टिक सेक्टर में स्थिर विकास और बेहतर कनेक्टिविटी की ओर इशारा करती है।





