महाराष्ट्र

RSS का शताब्दी समारोह: जगदगुरु शंकराचार्य और गुरुदेव शंकर अभ्यंकर की उपस्थिति में मोहन भागवत ने किया

SHIDDHANT
1 Dec 2025 9:13 PM IST
RSS का शताब्दी समारोह: जगदगुरु शंकराचार्य और गुरुदेव शंकर अभ्यंकर की उपस्थिति में मोहन भागवत ने किया
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Mumbai मुंबई: Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) की शताब्दी वर्षगांठ को बड़े उत्साह और भव्य समारोह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जगदगुरु शंकराचार्य, गुरुदेव शंकर अभ्यंकर और RSS प्रमुख मोहन भागवत उपस्थित रहे। समारोह में दोनों धार्मिक और आध्यात्मिक गुरुओं का सम्मान किया गया और उनके मार्गदर्शन में RSS के एक सौ साल के योगदान और सामाजिक सेवा को याद किया गया। इस मौके पर RSS की ऐतिहासिक उपलब्धियों और संगठन के मिशन को उजागर करने वाली पुस्तक ‘भारतीय खंड’ का तीसरा संस्करण भी लॉन्च किया गया। पुस्तक के विमोचन के साथ ही RSS की शताब्दी पर उसके योगदान को दस्तावेज़ के रूप में पेश किया गया। मोहन भागवत ने कहा कि RSS का उद्देश्य हमेशा से समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कार और सेवा भाव को बढ़ावा देना रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन ने पिछले एक शताब्दी में देशभर में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं।
जगदगुरु शंकराचार्य और गुरुदेव शंकर अभ्यंकर ने RSS की शताब्दी समारोह में उपस्थित होकर संगठन के योगदान की सराहना की और कहा कि समाज में धर्म और संस्कृति की रक्षा के साथ-साथ युवाओं में नेतृत्व और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपने संबोधन में संगठन के सामाजिक समर्पण और आध्यात्मिक दृष्टिकोण की भी प्रशंसा की। समारोह में RSS के वरिष्ठ नेताओं और सदस्यों ने भी शताब्दी वर्षगांठ के महत्व को रेखांकित किया। मोहन भागवत ने कहा कि संगठन का लक्ष्य सदैव से राष्ट्रहित और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना रहा है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे समाज सेवा में सक्रिय हों और देश की प्रगति के लिए अपने योगदान को बढ़ाएं।
पुस्तक ‘भारतीय खंड’ में RSS के विभिन्न पहलुओं, इतिहास, और सामाजिक गतिविधियों का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह पुस्तक संगठन के मूल्य, सिद्धांत और देशभर में किए गए सामाजिक कार्यों का प्रतीक मानी जा रही है। समारोह के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों और परंपरागत स्वागत के माध्यम से RSS की शताब्दी का जश्न मनाया गया। उपस्थित लोगों ने इस अवसर पर संगठन के इतिहास और उसकी सामाजिक भूमिका पर चर्चा की और आने वाले समय में उसके उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस प्रकार, RSS का शताब्दी समारोह न केवल संगठन के एक सौ साल के सफर का जश्न था, बल्कि देश में सामाजिक सेवा, संस्कार और नैतिक मूल्यों के महत्व को भी दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ
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