महाराष्ट्र

दिशा सालियन केस में सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर

Kavita2
14 Sept 2026 3:05 PM IST
दिशा सालियन केस में सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर
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मुंबई। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की जून 2020 में हुई मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एफआईआर दर्ज कर ली है। अधिकारियों ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज की गई एफआईआर के साथ अब दिशा की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच नए सिरे से की जाएगी।

दिशा सालियन की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक बहुमंजिला इमारत से गिरने के बाद मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने इस मामले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट यानी एडीआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। इसके छह दिन बाद अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने बांद्रा स्थित आवास पर मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं को लेकर बाद में सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए गए, लेकिन उनमें से अनेक दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

दिशा के पिता सतीश सालियन ने अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामला केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपने का अनुरोध किया। हाई कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को याचिका पर फैसला सुनाते हुए सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने और मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने का निर्देश दिया था।

छह साल तक एफआईआर दर्ज नहीं होने पर सवाल

जस्टिस सारंग वी. कोतवाल और जस्टिस रणजीतसिंह राजा भोसले की खंडपीठ ने मामले में मुंबई पुलिस की ओर से की गई जांच पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 174 के तहत चलने वाली जांच अनिश्चित समय तक जारी नहीं रखी जा सकती। इसका उद्देश्य जल्द यह पता लगाना होता है कि संज्ञेय अपराध की एफआईआर दर्ज किए जाने की आवश्यकता है या नहीं।

अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि इस मामले की जांच दो चरणों में लगभग छह साल तक चली, लेकिन कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। खंडपीठ ने कहा कि अब तक हुई जांच जवाब देने के बजाय अधिक सवाल खड़े करती है। पुलिस को जांच के पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद संज्ञेय अपराध की संभावना को लेकर एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने किसी व्यक्ति के खिलाफ दोष या अपराध से संबंधित कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। आदेश में संदिग्ध परिस्थितियों का उल्लेख केवल यह तय करने के लिए किया गया कि एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच कराना आवश्यक है। अदालत ने सीबीआई को बिना किसी पूर्वधारणा के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच करने की स्वतंत्रता दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट का 2 सितंबर 2026 का आदेश

वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी

हाई कोर्ट ने सीबीआई के मुंबई क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी को मामले की जांच के लिए उपयुक्त अनुभव रखने वाले वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति करने का निर्देश दिया था। नियुक्त अधिकारी को दिशा के पिता का बयान दर्ज करने, उसके आधार पर एफआईआर पंजीबद्ध करने और मौत की परिस्थितियों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने को कहा गया।

अदालत के निर्देश के बाद सीबीआई ने अब एफआईआर दर्ज कर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। जांच एजेंसी मुंबई पुलिस से एडीआर, गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम से संबंधित दस्तावेज, फॉरेंसिक सामग्री और अब तक एकत्र अन्य रिकॉर्ड प्राप्त करेगी। हाई कोर्ट ने मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित अधिकारियों को मामले से जुड़े सभी आवश्यक कागजात और वस्तुएं सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया है।

जांच एजेंसी घटनास्थल की परिस्थितियों, मौजूद लोगों के बयानों, मेडिकल साक्ष्यों और पूर्व जांच में दर्ज जानकारियों का परीक्षण कर सकती है। आवश्यकता होने पर पहले पूछताछ किए गए लोगों के बयान दोबारा दर्ज किए जा सकते हैं। हालांकि, सीबीआई ने जांच की विस्तृत दिशा अथवा पूछताछ के लिए बुलाए जाने वाले लोगों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की है।

किसी को स्वतः आरोपी नहीं माना जाएगा

हाई कोर्ट के आदेश में एक महत्वपूर्ण सावधानी भी दर्ज की गई है। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को तब तक आरोपी नहीं माना जाना चाहिए, जब तक जांच अधिकारी को एकत्र साक्ष्यों के आधार पर उसके विरुद्ध उचित संदेह के पर्याप्त आधार न मिलें। इसका अर्थ है कि शिकायत या सोशल मीडिया में किसी व्यक्ति का नाम आने मात्र से उसकी आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं होती।

एफआईआर दर्ज होना जांच की शुरुआत है, अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सक्षम अदालत के समक्ष उचित रिपोर्ट पेश करनी होगी। यदि जांच में किसी अपराध का प्रमाण नहीं मिलता है तो एजेंसी क्लोजर अथवा उपयुक्त समरी रिपोर्ट भी दाखिल कर सकती है। ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता को रिपोर्ट के खिलाफ विरोध याचिका दायर करने का अधिकार रहेगा।

अदालत ने सीबीआई को दिशा के पिता और परिवार के सदस्यों के साथ संवेदनशीलता से बातचीत करने का निर्देश भी दिया है। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान न किया जाए और यदि कोई अपराध सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

अदालत की निगरानी वाली जांच से इनकार

याचिकाकर्ता ने जांच को हाई कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग भी की थी। हालांकि, खंडपीठ ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि सीबीआई की जांच की प्रभावशीलता पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है। इसलिए एजेंसी को स्वतंत्र रूप से जांच करने की अनुमति दी गई।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच के दौरान परिस्थितियों और साक्ष्यों के अनुसार कानूनी धाराएं जोड़ या हटा सकती है। इससे जांच एजेंसी को मामले की वास्तविक प्रकृति निर्धारित करने की स्वतंत्रता मिलेगी।

दिशा सालियन की मौत का मामला पिछले छह वर्षों में कई राजनीतिक और फिल्मी चर्चाओं का केंद्र रहा है। अब सीबीआई की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई थी और क्या इसमें कोई संज्ञेय अपराध बनता है। फिलहाल किसी व्यक्ति की भूमिका के बारे में निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने और अदालत में रिपोर्ट पेश होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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