महाराष्ट्र

अस्पताल में बवाल का आरोप शिवसेना के 17 लोगों पर केस

Kavita2
7 Sept 2026 9:55 AM IST
अस्पताल में बवाल का आरोप शिवसेना के 17 लोगों पर केस
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पालघर। महाराष्ट्र के पालघर में दही-हंडी समारोह के बाद एक निजी अस्पताल में देर रात हुई कथित झड़प का मामला सामने आया है। रिलीफ हॉस्पिटल की शिकायत के आधार पर शिवसेना के 17 पदाधिकारियों और समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि पार्टी से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में प्रवेश कर एक महिला डॉक्टर के साथ बदसलूकी की, तोड़फोड़ करने की धमकी दी और घायल गोविंदाओं के इलाज तथा डिस्चार्ज को लेकर हुए विवाद के दौरान एक स्टाफ सदस्य के साथ मारपीट की।

मामला 5 सितंबर को आयोजित दही-हंडी कार्यक्रम के बाद का बताया जा रहा है। पालघर-मनोर हाईवे स्थित शिवाजी चौक पर दही-हंडी कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान मानव पिरामिड बनाते समय गोविंदा मंडली के कुछ सदस्य घायल हो गए। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए रिलीफ हॉस्पिटल ले जाया गया।

अस्पताल में कुल सात घायलों का इलाज किए जाने की जानकारी सामने आई है। घायलों की स्थिति को देखते हुए कुछ लोगों का सीटी स्कैन और एक्स-रे भी कराया गया। शुरुआत में घायलों के उपचार की प्रक्रिया सामान्य रूप से चली, लेकिन बाद में इलाज के भुगतान और मरीजों को डिस्चार्ज किए जाने को लेकर विवाद पैदा होने का आरोप है।

जानकारी के अनुसार अस्पताल की ओर से इलाज के लिए कुल 19,866 रुपये के भुगतान की मांग की गई थी। आयोजकों की तरफ से 10 हजार रुपये जमा किए गए। बताया गया कि बाकी रकम के भुगतान को लेकर गोविंदा मंडली के सदस्यों ने अस्पताल कर्मचारियों से कहा कि शेष राशि शिवसेना के जिला प्रमुख की ओर से दी जाएगी।

इसी भुगतान को लेकर बातचीत के दौरान विवाद बढ़ने की बात कही जा रही है। अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि बाद में शिवसेना से जुड़े कई पदाधिकारी और समर्थक अस्पताल पहुंचे। यहां घायल गोविंदाओं के इलाज और उन्हें डिस्चार्ज करने के मुद्दे पर अस्पताल कर्मचारियों के साथ बहस हुई। आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद एक स्टाफ सदस्य के साथ मारपीट की गई।

अस्पताल ने अपनी शिकायत में एक महिला डॉक्टर के साथ बदसलूकी किए जाने का भी आरोप लगाया है। इसके अलावा अस्पताल में तोड़फोड़ करने की धमकी दिए जाने की बात कही गई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने शिवसेना के 17 पदाधिकारियों और समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

एफआईआर में कई स्थानीय वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के नाम शामिल होने की बात सामने आई है। इनमें शिवसेना के पालघर जिला प्रमुख कुंदन सांखे, शहर प्रमुख राहुल घरात और विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित समेत पार्टी से जुड़े अन्य कार्यकर्ताओं के नाम बताए गए हैं। हालांकि एफआईआर में नाम शामिल होने का अर्थ आरोप सिद्ध होना नहीं है। मामले में पुलिस जांच के बाद ही घटनाक्रम और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी।

पूरे विवाद की शुरुआत दही-हंडी के दौरान घायल हुए गोविंदाओं के उपचार से हुई बताई जा रही है। दही-हंडी कार्यक्रमों में मानव पिरामिड बनाने के दौरान प्रतिभागियों के गिरकर घायल होने का जोखिम रहता है। इसी वजह से बड़े आयोजनों के दौरान चिकित्सा सहायता की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। पालघर के इस कार्यक्रम में घायल सात लोगों को अस्पताल ले जाया गया था।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार घायलों को जरूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। कुछ मरीजों की चोट की स्थिति जानने के लिए सीटी स्कैन और एक्स-रे जैसी जांच भी कराई गई। इसके बाद इलाज के बिल के भुगतान का सवाल सामने आया। अस्पताल द्वारा मांगी गई रकम और आयोजकों की ओर से जमा किए गए पैसे के बीच अंतर को लेकर बातचीत शुरू हुई, जो बाद में विवाद में बदल गई।

अब पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण काम अस्पताल में उस रात हुए घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना है। अस्पताल परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने की स्थिति में उनकी रिकॉर्डिंग जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि अस्पताल में कौन-कौन लोग पहुंचे थे और कथित विवाद के दौरान क्या हुआ था।

इसके अलावा अस्पताल के डॉक्टरों, कर्मचारियों, घायल गोविंदाओं और कार्यक्रम से जुड़े लोगों के बयान भी जांच के लिए महत्वपूर्ण होंगे। पुलिस भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि अस्पताल का कुल बिल कितना था, कितनी राशि जमा की गई और शेष रकम को लेकर पक्षों के बीच क्या बातचीत हुई थी।

महिला डॉक्टर से कथित बदसलूकी और अस्पताल कर्मचारी से मारपीट के आरोपों की भी अलग-अलग जांच की जा सकती है। शिकायत में अस्पताल को नुकसान पहुंचाने की धमकी का आरोप भी लगाया गया है। इन आरोपों से संबंधित उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।

मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ सकता है क्योंकि एफआईआर में शिवसेना के स्थानीय पदाधिकारियों और एक विधायक के बेटे का नाम होने की बात सामने आई है। ऐसे में संबंधित नेताओं या पार्टी की ओर से आरोपों पर प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल दिए गए विवरण में उनका पक्ष सामने नहीं आया है।

इस घटना ने अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर विवाद और कथित हिंसा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल में मरीजों का इलाज चल रहा होता है और किसी भी प्रकार का विवाद दूसरे मरीजों तथा चिकित्सा कर्मचारियों के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। इसलिए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

पुलिस ने अस्पताल की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की कड़ियां जोड़ी जाएंगी। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि अस्पताल में उस रात वास्तव में क्या हुआ और एफआईआर में नामजद लोगों की क्या भूमिका रही।

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