- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- प्लास्टर की जगह...

कल्याण। महाराष्ट्र के कल्याण में नगर निगम संचालित रुक्मिणीबाई अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल के एक सफाई कर्मचारी ने प्लास्टर सामग्री उपलब्ध कराने के नाम पर मरीज के परिजनों से 400 रुपये की मांग की। पैसे नहीं देने पर मरीज के टूटे हुए पैर में प्लास्टर लगाने के बजाय उसके पैर के चारों ओर कार्डबोर्ड का टुकड़ा लगाकर सहारा दे दिया गया।
मामला सामने आने के बाद कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी सफाई कर्मचारी को निलंबित कर दिया है। नगर निगम प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और अस्पताल की व्यवस्था को लेकर भी समीक्षा की जा रही है।
सोशल मीडिया वीडियो से सामने आया मामला
जानकारी के मुताबिक, यह घटना गुरुवार की बताई जा रही है। मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब कार्डबोर्ड के सहारे वाले मरीज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने अस्पताल प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
वीडियो के वायरल होने के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया और अधिकारियों ने मामले की जानकारी जुटाई। प्राथमिक जांच के बाद सफाई कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई।
फ्रैक्चर के बाद अस्पताल पहुंचा था मरीज
बताया जा रहा है कि 54 वर्षीय एक व्यक्ति गुरुवार शाम करीब 4 बजे बाएं पैर में चोट लगने के बाद रुक्मिणीबाई अस्पताल पहुंचा था। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसकी जांच की और पैर में फ्रैक्चर होने की पुष्टि की।
डॉक्टर ने मरीज के घायल पैर को स्थिर रखने और बेहतर इलाज के लिए प्लास्टर लगाने की सलाह दी थी। इसके बाद प्लास्टर की प्रक्रिया शुरू होनी थी, लेकिन आरोप है कि इसी दौरान मरीज के परिजनों से पैसों की मांग की गई।
पैसे नहीं देने पर कार्डबोर्ड लगाने का आरोप
मरीज के परिवार का आरोप है कि प्लास्टर सामग्री के लिए 400 रुपये मांगे गए थे। जब उन्होंने पैसे देने से इनकार किया तो मरीज के पैर में प्लास्टर नहीं लगाया गया और उसकी जगह कार्डबोर्ड का टुकड़ा लगाकर अस्थायी सहारा दे दिया गया।
परिजनों ने इस मामले को गंभीर लापरवाही बताते हुए नाराजगी जताई। इसके बाद घटना का वीडियो बनाया गया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।
KDMC ने की तत्काल कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद कल्याण-डोंबिवली नगर निगम प्रशासन ने आरोपी कर्मचारी को निलंबित कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही या अवैध वसूली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नगर निगम ने संबंधित विभाग को मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में यदि अन्य किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल
इस घटना के बाद नगर निगम अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी और नगर निगम अस्पतालों में गरीब और जरूरतमंद लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं, ऐसे में उनसे किसी भी तरह की अवैध राशि मांगना गंभीर मामला माना जाता है।
स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और मरीजों के साथ बेहतर व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग भी उठने लगी है।
मरीजों की सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर
KDMC अधिकारियों ने कहा है कि अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। सभी कर्मचारियों को मरीजों के साथ उचित व्यवहार करने और नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि क्या अस्पताल में प्लास्टर सामग्री की कमी थी या फिर कर्मचारी ने जानबूझकर इस तरह की लापरवाही की।
जांच के बाद स्थिति होगी साफ
फिलहाल मामले की जांच जारी है। नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मरीज के टूटे पैर में प्लास्टर की जगह कार्डबोर्ड लगाने की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस लापरवाही के पीछे वास्तविक कारण क्या था।





