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महाराष्ट्र: ठाणे जिले के भिवंडी में हुए दर्दनाक इमारत हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बालाजी नगर इलाके में चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा गिरने से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद पुलिस ने इमारत मालिक और मरम्मत का काम कर रहे ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। प्रशासन का कहना है कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात भिवंडी में स्थित चार मंजिला इमारत का बी विंग अचानक भरभराकर गिर गया था। हादसे के समय इमारत में कई परिवार मौजूद थे। मलबा गिरने से कई लोग उसमें दब गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।
यह इमारत पहले से ही जर्जर घोषित की जा चुकी थी। स्थानीय नागरिक निकाय ने इसे असुरक्षित इमारतों की सूची में रखा था। इसके बावजूद यहां मरम्मत का काम चल रहा था। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इमारत के पिलरों पर काम किया जा रहा था, जिसके दौरान यह हादसा हुआ।
भिवंडी-निजामपुर नगर निगम के सहायक आयुक्त फैसल अब्दुल कय्यूम टाटली की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इमारत मालिक बिलाल अहमद अबू बकर खान और मरम्मत कार्य कर रहे ठेकेदार अशोक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन (MRTP) कानून की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
हादसे की रात इमारत में अचानक तेज आवाजें आने लगी थीं। स्थानीय लोगों ने खतरे को भांपते हुए कई परिवारों को बाहर निकालने की कोशिश की। कुछ लोग समय रहते बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन इससे पहले कि सभी लोग सुरक्षित बाहर आ पाते, इमारत का एक बड़ा हिस्सा गिर गया और कई लोग मलबे में दब गए।
घटना के बाद राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू किया गया। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमों ने मलबे को हटाकर लोगों को बाहर निकाला। स्थानीय नागरिकों ने भी बचाव अभियान में प्रशासन की मदद की। कई घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन हादसे में 10 लोगों की जान चली गई।
हादसे से बचे लोगों ने उस भयावह रात की कहानी बताई। पहली मंजिल से कूदकर अपनी जान बचाने वाले दीपक कुमार यादव ने बताया कि वह रात में खाना खाने के बाद सो गए थे। अचानक तेज धमाका हुआ और देखते ही देखते चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। उन्होंने किसी तरह बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी संगीता प्रजापति ने बताया कि वह पार्किंग के पास थीं, तभी इमारत से टूटने की आवाज आने लगी। भागने की कोशिश में वह घायल हो गईं। वहीं अभय कुमार यादव ने बताया कि मलबे और टूटे हिस्सों के कारण बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया था। मजबूरी में उन्हें पहली मंजिल से छलांग लगानी पड़ी।
हादसे के बाद कई परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे हुए हैं। नेहा सिंह नाम की महिला अपने पति रणजीत सिंह की तलाश कर रही हैं, जो हादसे के बाद से लापता हैं। बचाव दल अभी भी मलबे की जांच कर रहा है और आशंका जताई जा रही है कि कुछ और लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं।
प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में किसी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जर्जर इमारत में मरम्मत कार्य और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
भिवंडी हादसे ने एक बार फिर पुराने और असुरक्षित भवनों की समस्या को सामने ला दिया है। प्रशासन अब ऐसे भवनों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर और सतर्कता बरतने की तैयारी कर रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।





