महाराष्ट्र

बॉम्बे हाई कोर्ट की विजय माल्या को सख्त चेतावनी

Tara Tandi
22 Sept 2026 6:56 PM IST
बॉम्बे हाई कोर्ट की विजय माल्या को सख्त चेतावनी
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मुंबई: मंगलवार को एक वकील ने बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने यूके में रहने वाले और "भगोड़े आर्थिक अपराधी" घोषित किए गए बिज़नेसमैन विजय माल्या को चेतावनी दी है कि वे सोशल मीडिया पर कोर्ट के दस्तावेज़ पोस्ट न करें, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच कर रहा है और इसकी सुनवाई अभी चल रही है।
वकील आशीष मेहता ने बताया कि हाई कोर्ट ने यूके में मौजूद माने जा रहे इस भगोड़े बिज़नेसमैन को यह निर्देश ED की उस आपत्ति के बाद दिया, जिसमें कहा गया था कि माल्या ने जांच एजेंसी का हलफनामा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर तब अपलोड कर दिया, जब कोर्ट ने अभी उस पर विचार भी नहीं किया था।
मामले की सुनवाई 13 अक्टूबर के लिए तय करते हुए, हाई कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) को ED द्वारा दी गई जानकारी को ध्यान में रखते हुए एक नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
इससे पहले, फरवरी में माल्या ने हाई कोर्ट को बताया था कि वह यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि वह भारत कब लौटेंगे।
उन्होंने इंग्लैंड की अदालतों द्वारा लगाई गई पाबंदियों का हवाला दिया और कहा कि इन्हीं की वजह से वह देश छोड़कर नहीं आ पा रहे हैं।
हाई कोर्ट माल्या द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।
एक याचिका में 'भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम' (FEOA) के तहत उन्हें "भगोड़ा आर्थिक अपराधी" घोषित किए जाने को चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी याचिका में उन्हें औपचारिक रूप से भगोड़ा घोषित करने वाले कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।
माल्या की ओर से पेश हुए सीनियर वकील अमित देसाई ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का ज़िक्र किया जिनमें याचिकाकर्ताओं की गैर-मौजूदगी में भी रिट याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी।
उन्होंने कहा कि माल्या के खिलाफ यूके में प्रत्यर्पण की कार्यवाही चल रही है और उनके क्लाइंट को इसकी जानकारी है, लेकिन कोर्ट के बाध्यकारी आदेशों के कारण वह इंग्लैंड के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जा पा रहे हैं।
हालांकि, हाई कोर्ट ने कोर्ट के सामने पेश होने के माल्या के इरादे पर सवाल उठाया और कहा कि ऐसा लगता है कि वह यूके की अदालतों के आदेशों पर भरोसा कर रहे हैं, बिना यह स्पष्ट किए कि क्या उन आदेशों को चुनौती दी गई है।
बेंच ने संकेत दिया कि इस तरह के भरोसे को पूरी तरह से सही वजह नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को माल्या के हलफनामे का जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने देसाई से यह भी कहा कि वे सुनवाई के दौरान दिए गए सभी बयानों को रिकॉर्ड पर लाते हुए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें, ताकि भारत सरकार (Union of India) उसके अनुसार जवाब दे सके।
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