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Bombay HC का अहम फैसला: कोऑपरेटिव सोसाइटी मेंबरशिप ट्रांसफर पर रोक नहीं अगर नियम पूरे हों

Mumbai मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई आवेदक कानूनी रूप से तय सभी शर्तें पूरी करता है, तो कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी उसकी मेंबरशिप ट्रांसफर करने से इनकार नहीं कर सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों को प्रॉपर्टी के मालिकाना हक (ownership rights) के विवाद तय करने के स्तर तक नहीं ले जाया जा सकता। यह फैसला जस्टिस अमित बोरकर ने सुनाया, जो क्लोवर पार्क कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड की चेयरमैन फिरदौस दस्तूर द्वारा दायर याचिका पर आधारित था।
यह मामला रो हाउस नंबर 1 से जुड़ा है, जो मूल रूप से नरेंद्र रतिलाल शाह को अलॉट किया गया था। विवाद तब शुरू हुआ जब शाह ने 4 मई 2024 को परविंदर सिंह ढिल्लों के पक्ष में एक रजिस्टर्ड डीड ऑफ असाइनमेंट किया। इसके बाद ढिल्लों ने सोसाइटी में मेंबरशिप और शेयर सर्टिफिकेट अपने नाम ट्रांसफर करने के लिए आवेदन किया। सोसाइटी को यह आवेदन 13 मई 2024 को मिला, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे विवाद खड़ा हो गया।
सोसाइटी की तरफ से इस ट्रांसफर को लेकर आपत्ति जताई गई और इसे चुनौती दी गई। मामला कोर्ट तक पहुंचा, जहां यह सवाल उठा कि क्या सोसाइटी बिना उचित कारण के मेंबरशिप ट्रांसफर रोक सकती है या नहीं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि अगर आवेदक सभी जरूरी कानूनी शर्तें पूरी करता है, तो सोसाइटी के पास ट्रांसफर रोकने का अधिकार सीमित है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोऑपरेटिव सोसाइटी का काम केवल नियमों के तहत मेंबरशिप ट्रांसफर को प्रोसेस करना है, न कि संपत्ति के मालिकाना हक पर अंतिम निर्णय देना। ऐसे विवादों का निपटारा अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।
इस फैसले को कोऑपरेटिव हाउसिंग सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि सोसाइटी प्रशासन मनमाने तरीके से मेंबरशिप ट्रांसफर को रोक नहीं सकता, जब तक कोई वैध कानूनी आधार न हो।





