- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- बॉम्बे HC की राज्य...

Maharashtra महाराष्ट्र: बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार और सिविक अथॉरिटीज़ को अवैध फेरीवालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न करने पर कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने इस रवैये को “आंखों में धूल झोंकने वाला” करार देते हुए कहा कि बार-बार आदेशों के बावजूद जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
यह टिप्पणी जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खता की खंडपीठ ने मुंबई में अवैध और बिना अनुमति वाले फेरीवालों से संबंधित कई याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पहले दिए गए निर्देशों को लागू करने में प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है और उसमें इच्छाशक्ति की कमी दिखाई देती है।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने अधिकारियों के रवैये पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि हर बार जब अदालत कार्रवाई की प्रगति के बारे में पूछती है, तो प्रशासन केवल पुराने आदेशों को दोहराकर प्रस्तुत करता है। अदालत ने कहा, “आप जो कर रहे हैं वह पूरी तरह आंखों में धूल झोंकने वाला है। हमें पुराने आदेश सुनाने की जरूरत नहीं है, हमें यह बताइए कि उन्हें लागू करने के लिए आपने क्या किया है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि अवैध फेरीवालों को हटाने और नियंत्रित करने के लिए पहले भी स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन उनके पालन में गंभीरता की कमी दिखाई दे रही है। अदालत ने सवाल उठाया कि जब आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं, तो उनके क्रियान्वयन में इतनी देरी क्यों हो रही है।
मुंबई शहर में अवैध फेरीवालों की समस्या लंबे समय से चर्चा में रही है। इससे न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्था भी फैलती है। कई इलाकों में सड़कें और फुटपाथ पूरी तरह से अतिक्रमण की चपेट में आ चुके हैं, जिससे पैदल यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है। अदालत ने सिविक एजेंसियों और राज्य सरकार से कहा कि वे अपने कर्तव्यों का गंभीरता से पालन करें और अदालत के आदेशों को केवल कागजों तक सीमित न रखें।
इस मामले की अगली सुनवाई में अदालत ने कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कोर्ट की सख्ती के बाद अब प्रशासन पर अवैध फेरीवालों के खिलाफ ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।
यह मामला एक बार फिर मुंबई में अवैध अतिक्रमण और प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर बहस का विषय बन गया है।





