महाराष्ट्र

Bombay HC : जुहू जमीन विवाद में दो मामलों का एकीकरण नहीं, लेकिन साथ में सुनवाई के निर्देश

Kavita2
5 May 2026 9:40 AM IST
Bombay HC : जुहू जमीन विवाद में दो मामलों का एकीकरण नहीं, लेकिन साथ में सुनवाई के निर्देश
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Maharashtra महाराष्ट्र: बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को मुंबई के जुहू इलाके की एक महत्वपूर्ण जमीन से जुड़े लंबे समय से चल रहे दो सिविल मामलों को एक साथ जोड़ने (क्लब करने) से इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ की जाएगी ताकि अलग-अलग और विरोधाभासी फैसलों की संभावना से बचा जा सके।

यह आदेश जस्टिस जितेंद्र जैन की पीठ ने मेटियोर एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर एक अंतरिम आवेदन पर सुनवाई के दौरान दिया। यह आवेदन 2015 में दायर केस से जुड़ा था, जिसमें कंपनी ने 2008 में वीनस हैबिटेट द्वारा दायर एक पुराने मामले के साथ इसे क्लब करने की मांग की थी।

दोनों मामलों का संबंध अंधेरी के जुहू इलाके में स्थित 3,040 वर्ग मीटर के एक भूखंड से है, जिस पर मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा है। इस जमीन पर दो अलग-अलग पक्षों द्वारा अधिकार का दावा किया जा रहा है, जिसके चलते वर्षों से कानूनी लड़ाई जारी है।

मेटियोर एस्टेट्स ने अदालत में दलील दी कि दोनों मामलों का आधार एक ही संपत्ति है और लगभग वही पक्ष इसमें शामिल हैं, इसलिए न्यायिक प्रक्रिया को सुचारु बनाने और एक समान निर्णय सुनिश्चित करने के लिए दोनों मामलों को एक साथ जोड़ा जाना चाहिए। कंपनी के वकील ने यह भी तर्क दिया कि 2008 के मामले में अंतिम और प्रभावी आदेश तभी संभव होगा जब 2015 वाले मामले को भी साथ में सुना जाए।

हालांकि हाई कोर्ट ने दोनों मामलों को पूरी तरह से एकीकृत करने की मांग को स्वीकार नहीं किया, लेकिन यह निर्देश दिया कि दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ की जाए। अदालत का मानना है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया में समन्वय बना रहेगा और किसी भी प्रकार के परस्पर विरोधी फैसलों की स्थिति से बचा जा सकेगा।

यह मामला मुंबई की उन कई लंबित संपत्ति विवादों में से एक है, जो वर्षों से अदालतों में विचाराधीन हैं और जिनमें बड़ी जमीनों के मालिकाना हक को लेकर जटिल कानूनी सवाल उठते रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाई कोर्ट का यह फैसला प्रक्रियात्मक संतुलन को बनाए रखते हुए न्यायिक दक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है, बल्कि एक ही संपत्ति से जुड़े विवादों में निर्णयों की स्थिरता भी बनी रहेगी।

फिलहाल दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई जारी रहेगी और अदालत आगे इस विवाद पर अंतिम निर्णय में तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर फैसला सुनाएगी।

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