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बॉम्बे HC ने ₹152 करोड़ ED मनी लॉन्ड्रिंग केस में बिल्डर विजय मछिंदर को जमानत दी

Maharashtra महाराष्ट्र: बॉम्बे हाई कोर्ट ने यूटीआई (UTI) कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित 152 फ्लैट देने में कथित तौर पर विफल रहने के मामले में आरोपी बिल्डर विजय मछिंदर को जमानत दे दी है। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज किया गया था और इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप भी शामिल हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि लंबे समय तक हिरासत में रहने और मामले में ट्रायल शुरू होने में हो रही देरी को ध्यान में रखते हुए आरोपी को जमानत दी जा रही है।
यह आदेश जस्टिस अश्विन भोबे की अदालत ने 6 अप्रैल को पारित किया। अदालत ने विजय मछिंदर की जमानत याचिका को मंजूरी देते हुए उन्हें ₹5 लाख के बॉन्ड और जमानत की शर्तों पर रिहा करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि लगातार कस्टडी में रखना उचित नहीं है, खासकर तब जब ट्रायल अभी तक शुरू नहीं हुआ है। अदालत ने यह भी कहा कि जब तक मुकदमे की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, तब तक आरोपी को जेल में रखना जरूरी नहीं है।
मामले में विजय मछिंदर ऑरनेट स्पेसेज़ प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं। उन्हें ED ने 3 जनवरी 2024 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था। यह मामला मूल रूप से दिसंबर 2021 में मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में दर्ज एक शिकायत से जुड़ा हुआ है, जिसे बाद में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को ट्रांसफर कर दिया गया था।
आरोप है कि संबंधित प्रोजेक्ट के तहत यूटीआई कर्मचारियों के लिए 152 फ्लैटों का निर्माण और आवंटन किया जाना था, लेकिन बिल्डर ने तय शर्तों के अनुसार कार्य पूरा नहीं किया। इसी को लेकर मामला दर्ज किया गया और जांच आगे बढ़ी। बाद में इसमें वित्तीय अनियमितताओं और धन के लेन-देन की जांच भी शामिल की गई।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि हिरासत केवल तब तक उचित है जब तक जांच या ट्रायल के लिए उसकी आवश्यकता हो। अदालत ने कहा कि इस मामले में लंबी हिरासत और सुनवाई में देरी आरोपी के अधिकारों को प्रभावित कर रही थी, इसलिए जमानत देना उचित है।
ED की ओर से लगाए गए आरोपों और जांच के बावजूद, अदालत ने फिलहाल आरोपी को राहत देते हुए कहा कि ट्रायल के दौरान वह जमानत की शर्तों का पालन करेगा। मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और आगे की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।
इस फैसले के बाद मामले में एक नया मोड़ आ गया है और अब सभी की नजरें आगे की सुनवाई और ट्रायल की प्रगति पर टिकी हुई हैं।





