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मुंबई में जल संकट पर BMC घिरी, सभी दलों ने तत्काल आपात योजना की मांग की

Maharashtra महाराष्ट्र: मुंबई में पानी के बिगड़ते संकट को लेकर नगर निगम की बैठक में लंबी और तीखी बहस हुई। इस दौरान सभी राजनीतिक दलों के पार्षदों ने घटते जल-स्तर पर चिंता जताते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) प्रशासन को घेरा और तुरंत आपातकालीन योजना तैयार करने की मांग की। पार्षदों ने कहा कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में शहर में पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।
बैठक में यह भी स्वीकार किया गया कि आने वाले तीन दिनों में बारिश का अनुमान है, लेकिन मुंबई की पानी की सुरक्षा पूरी तरह मॉनसून की तीव्रता पर निर्भर है। प्रशासन ने माना कि जून में हुई बारिश की कमी को पूरा करने के लिए जुलाई में अच्छी और लगातार बारिश होना बेहद जरूरी है, तभी जल भंडार की स्थिति सुधर पाएगी।
सदन की बहस की शुरुआत सदन के नेता गणेश खनकर ने की। उन्होंने मुंबई के जल भंडार की मौजूदा स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि शहर को पानी आपूर्ति करने वाली सात झीलों में 22 जून तक केवल 8.5 प्रतिशत उपयोग योग्य पानी ही बचा था। इस आंकड़े ने पूरे सदन में चिंता का माहौल पैदा कर दिया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए BMC ने कई आपातकालीन कदम उठाने की जानकारी दी। प्रशासन ने बताया कि क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है, ताकि कृत्रिम वर्षा के माध्यम से जलस्तर को बढ़ाने की कोशिश की जा सके। इसके अलावा पानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए सभी 33 टैंकर फिलिंग पॉइंट्स पर फ्लो मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे पानी की खपत पर निगरानी रखी जा सके।
BMC ने यह भी बताया कि अवैध रूप से पानी के उपयोग पर रोक लगाने के लिए विशेष दस्ते (स्पेशल स्क्वाड) तैनात किए जा रहे हैं। यह टीम शहर में पानी की अनियमित खपत और गैरकानूनी उपयोग पर नजर रखेगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी।
जल संकट से निपटने के लिए नगर निगम ने हाउसिंग सोसायटियों में भी पानी संरक्षण को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। इसके तहत कुओं को रिचार्ज करने और पीने योग्य न होने वाले पानी के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि पीने के पानी के भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
नगर निकाय ने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति में मुंबई की जल आपूर्ति काफी हद तक मानसून की प्रगति पर निर्भर है। यदि बारिश सामान्य से कम होती है, तो शहर में पानी की आपूर्ति को लेकर गंभीर चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
पार्षदों ने बैठक में कहा कि केवल तात्कालिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि दीर्घकालिक जल प्रबंधन रणनीति की भी जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि जल संरक्षण, पुनर्चक्रण और वर्षा जल संचयन को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि शहर में बढ़ती आबादी और पानी की मांग के अनुपात में जल संसाधनों का प्रबंधन और अधिक प्रभावी होना चाहिए। कई पार्षदों ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि समय रहते तैयारी न करने की वजह से यह स्थिति बनी है।
फिलहाल BMC ने भरोसा जताया है कि उठाए जा रहे कदमों से स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकेगा, लेकिन इसके लिए मानसून की भूमिका निर्णायक होगी।





