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पुणे। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के पुणे में छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रविवार को भाजपा महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष केशव उपाध्याय ने राहुल गांधी के शनिवार को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को ‘राजनीतिक कॉमेडी शो’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों से संवाद के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में उनके मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी की गई। इसके जवाब में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सचिन सावंत ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि कार्यक्रम को मिली प्रतिक्रिया से सत्ताधारी दल घबरा गया है।
राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के युवा संपर्क कार्यक्रम के तहत पुणे में छात्रों से बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया और युवा वर्ग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। कांग्रेस की ओर से इस कार्यक्रम को युवाओं तक पहुंच बनाने और छात्रों की समस्याओं एवं अपेक्षाओं को समझने की पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। हालांकि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भाजपा ने इसके स्वरूप और उद्देश्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
भाजपा ने कार्यक्रम को बताया राजनीतिक
भाजपा महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष केशव उपाध्याय ने रविवार को राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्र संवाद के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में छात्रों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने विद्यार्थियों के सवालों और उनकी समस्याओं पर ठोस चर्चा करने के बजाय राजनीतिक बयान दिए।
उपाध्याय ने राहुल गांधी के बयानों और कांग्रेस के पिछले कामकाज के बीच कथित विरोधाभास का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से युवाओं और छात्रों के हितों को लेकर किए जा रहे दावों को उसके पुराने कार्यों और नीतियों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए किया गया। उन्होंने दावा किया कि छात्रों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कॉलेज की बसों के माध्यम से लाया गया था। उपाध्याय ने कहा कि यदि कार्यक्रम वास्तव में छात्रों के मुद्दों पर केंद्रित था तो इसे राजनीतिक सभा का रूप नहीं दिया जाना चाहिए था।
कांग्रेस ने किया पलटवार
भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सचिन सावंत ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को युवाओं से मिली प्रतिक्रिया से भाजपा परेशान हो गई है। सावंत ने दावा किया कि युवाओं के बीच राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता से सत्ताधारी पार्टी की चिंता बढ़ गई है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों के साथ सीधे संवाद किया और उनके विचारों एवं समस्याओं को सुनने का प्रयास किया। उनके मुताबिक, युवाओं के साथ सीधा संवाद किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे नई पीढ़ी की प्राथमिकताओं और अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिलता है।
सावंत ने भाजपा की आलोचना को राजनीतिक प्रतिक्रिया बताया और कहा कि भाजपा को छात्रों के साथ संवाद के कार्यक्रम पर सवाल उठाने के बजाय युवाओं के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी लगातार युवाओं और छात्रों के बीच जाकर उनसे सीधे बातचीत कर रहे हैं।
युवा संपर्क अभियान का हिस्सा था कार्यक्रम
पुणे में राहुल गांधी का कार्यक्रम कांग्रेस के युवा संपर्क अभियान के तहत आयोजित किया गया था। पार्टी की कोशिश युवाओं और छात्रों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की है। कांग्रेस के अनुसार, ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं की समस्याओं, शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़ी चिंताओं को समझना तथा उन्हें राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाना है।
राहुल गांधी ने छात्रों के साथ बातचीत के दौरान युवा वर्ग की भूमिका और उनकी अपेक्षाओं पर चर्चा की। कांग्रेस इसे युवाओं की आवाज सुनने और उनके विचारों को मंच देने की पहल बता रही है। वहीं भाजपा का कहना है कि कार्यक्रम के जरिए छात्रों के नाम पर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की गई।
छात्रों की भागीदारी पर भी सवाल
भाजपा नेता केशव उपाध्याय ने कार्यक्रम में छात्रों की भागीदारी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि छात्रों को कॉलेज की बसों से कार्यक्रम स्थल तक लाया गया था। इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने छात्रों के नाम पर आयोजित कार्यक्रम को राजनीतिक सभा में बदल दिया।
हालांकि कांग्रेस ने भाजपा के इस आरोप को खारिज करते हुए कार्यक्रम को युवाओं के साथ संवाद का मंच बताया है। पार्टी का कहना है कि छात्रों का कार्यक्रम में शामिल होना और नेता के साथ संवाद करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
युवाओं को लेकर बढ़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा
पुणे का यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब राजनीतिक दल युवाओं और छात्रों को अपने साथ जोड़ने पर विशेष जोर दे रहे हैं। बड़ी युवा आबादी वाले महाराष्ट्र में छात्र और युवा मतदाता राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में युवाओं के बीच पहुंच बनाने के लिए आयोजित कार्यक्रमों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिल रही है।
कांग्रेस राहुल गांधी के संवाद कार्यक्रमों के जरिए युवाओं से सीधे संपर्क को अपनी रणनीति का हिस्सा बना रही है। दूसरी ओर भाजपा कांग्रेस के ऐसे कार्यक्रमों और बयानों पर सवाल उठाकर उन्हें राजनीतिक गतिविधि के रूप में पेश कर रही है।
आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी
राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम को लेकर दोनों दलों के बीच सामने आए बयानों से साफ है कि मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। भाजपा जहां कार्यक्रम की प्रकृति और कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठा रही है, वहीं कांग्रेस का दावा है कि युवाओं से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया ने भाजपा को चिंतित कर दिया है।
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। भाजपा राहुल गांधी के कार्यक्रम को राजनीतिक मंच बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे युवाओं की समस्याओं और विचारों को सामने रखने वाला संवाद कार्यक्रम करार दे रही है। पुणे का यह विवाद आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में युवा मुद्दों और छात्र संपर्क को लेकर दोनों दलों की रणनीति को और तेज कर सकता है।





