महाराष्ट्र

मुंबई में डीजल चोरी का बड़ा खेल बेनकाब, 94 लाख का माल जब्त, टैंकर से चोरी करते पकड़े गए ड्राइवर

Kavita2
28 Oct 2026 10:42 AM IST
मुंबई में डीजल चोरी का बड़ा खेल बेनकाब, 94 लाख का माल जब्त, टैंकर से चोरी करते पकड़े गए ड्राइवर
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नवी मुंबई। महाराष्ट्र के नवी मुंबई में डीजल चोरी और अवैध बिक्री से जुड़े एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। मुंबई-ठाणे राशनिंग विभाग के फ्लाइंग स्क्वॉड ने तुर्भे एमआईडीसी इलाके में छापेमारी कर दो टैंकरों से कथित रूप से डीजल चोरी करते हुए दो चालकों को पकड़ा है। सोमवार, 26 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे हुई इस कार्रवाई में विभाग ने लगभग 14 हजार लीटर डीजल, 25 हजार लीटर पेट्रोलियम जैसा तरल पदार्थ और दो टैंकरों सहित अन्य सामान जब्त किया। बरामद सामान की कुल अनुमानित कीमत 94 लाख 36 हजार 708 रुपये बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, वाशी स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम के ऑयल टर्मिनल से निकलने वाले टैंकरों को रास्ते में निर्धारित स्थान पर ले जाकर कथित तौर पर डीजल निकाला जा रहा था। इस मामले में तुर्भे पुलिस स्टेशन में पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

मुखबिर की सूचना पर देर रात फ्लाइंग स्क्वॉड का छापा

मुंबई-ठाणे राशनिंग विभाग को सूचना मिली थी कि नवी मुंबई के तुर्भे एमआईडीसी इलाके में टैंकरों से अवैध रूप से डीजल निकाला जा रहा है।

सूचना के मुताबिक, वाशी स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम के टर्मिनल से डीजल लेकर निकलने वाले टैंकरों को निर्धारित मार्ग से हटाकर तुर्भे के एक खाली भूखंड पर ले जाया जाता था।

यह स्थान तुर्भे एमआईडीसी के टीटीसी औद्योगिक क्षेत्र में एवीआई वर्ल्डवाइड प्राइवेट लिमिटेड के सामने स्थित है।

सूचना मिलने के बाद राशनिंग विभाग की विशेष टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई। सोमवार रात करीब 11 बजे अधिकारियों ने संबंधित स्थान पर छापेमारी की।

छापेमारी के दौरान दो टैंकर चालक कथित रूप से एक टैंकर से डीजल निकालकर दूसरे टैंकर और प्लास्टिक के डिब्बों में भरते मिले। अधिकारियों ने तत्काल दोनों टैंकरों को अपने कब्जे में ले लिया।

एक टैंकर से दूसरे में भरा जा रहा था डीजल

अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान WB 19 L 2981 नंबर वाले टैंकर से डीजल निकाला जा रहा था।

बताया गया कि टैंकर के बंद वाल्व को खोलकर उसमें मौजूद डीजल को 20 लीटर की क्षमता वाले प्लास्टिक के डिब्बों और MH 46 BM 9202 नंबर वाले दूसरे टैंकर में स्थानांतरित किया जा रहा था।

फ्लाइंग स्क्वॉड ने दोनों वाहनों को रोककर जांच शुरू की। मौके पर मौजूद चालकों से डीजल के परिवहन और हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेज मांगे गए।

प्रारंभिक जांच में ईंधन के कथित अनधिकृत हस्तांतरण का मामला सामने आया।

इसके बाद टीम ने दोनों वाहनों और उनमें मौजूद पदार्थ को जब्त कर लिया।

14 हजार लीटर डीजल और 25 हजार लीटर संदिग्ध तरल पदार्थ जब्त

छापेमारी के दौरान राशनिंग विभाग की टीम ने बड़ी मात्रा में ईंधन और अन्य सामान बरामद किया।

जब्त सामग्री में लगभग 14,000 लीटर डीजल और 25,000 लीटर पेट्रोलियम जैसा तरल पदार्थ शामिल है।

इसके अतिरिक्त डीजल से भरा एक 20 लीटर का डिब्बा और चार खाली डिब्बे भी बरामद किए गए।

अधिकारियों ने दोनों टैंकरों को भी जब्त कर लिया है।

विभाग के अनुसार, टैंकरों, ईंधन और अन्य सामग्री की कुल अनुमानित कीमत 94 लाख 36 हजार 708 रुपये है।

हालांकि, बरामद 25 हजार लीटर तरल पदार्थ की वास्तविक प्रकृति जांच से स्पष्ट होगी। अभी इसे पेट्रोलियम जैसा तरल पदार्थ बताया गया है।

50 रुपये प्रति लीटर बेचने का आरोप

जांच के दौरान पकड़े गए टैंकर चालकों की पहचान अरशद खान और सचिन यादव के रूप में हुई है।

अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे वाशी टर्मिनल से आने वाले टैंकरों से डीजल निकालते थे।

आरोप है कि निकाले गए डीजल को समीर सरोज और अन्य लोगों को लगभग 50 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जाता था।

यह कीमत सामान्य खुदरा बाजार में डीजल की कीमत से काफी कम है।

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित रूप से निकाला गया डीजल किन लोगों तक पहुंचाया जाता था और इस कारोबार से कौन-कौन जुड़े थे।

चालकों से मिली जानकारी का सत्यापन भी किया जा रहा है।

पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

तुर्भे पुलिस स्टेशन में इस मामले में कुल पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

आरोपियों में दोनों टैंकर चालक, टैंकर मालिक और कारोबार से जुड़े अन्य लोग शामिल बताए गए हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, मामले में समीर सरोज नामक व्यवसायी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

हालांकि, अलग-अलग प्रकाशित विवरणों में संबंधित कारोबारी की पहचान को लेकर अंतर है। इसलिए पुलिस की आधिकारिक जांच से ही सभी आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस ने दोनों टैंकर चालकों को हिरासत में लिया है और अन्य संबंधित व्यक्तियों की तलाश तथा पूछताछ की प्रक्रिया जारी है।

पुलिस यह भी जांच रही है कि चोरी का डीजल स्थानीय बाजार में बेचा जाता था या किसी अन्य औद्योगिक उपयोग के लिए भेजा जाता था।

आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3, 7 और 10 के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।

इसके अलावा मोटर स्पिरिट और हाई-स्पीड डीजल (आपूर्ति, वितरण का विनियमन और कदाचार की रोकथाम) आदेश, 1998 के संबंधित प्रावधान भी लगाए गए हैं।

इन नियमों का उद्देश्य पेट्रोलियम पदार्थों के परिवहन, वितरण और बिक्री में अनियमितताओं को रोकना है।

निर्धारित नियमों के विपरीत ईंधन का हस्तांतरण या अवैध बिक्री करना कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकता है।

पुलिस अब जब्त वाहनों के दस्तावेजों और ईंधन के परिवहन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई मुंबई के राशनिंग नियंत्रक एवं नागरिक आपूर्ति निदेशक चंद्रकांत डांगे के मार्गदर्शन में की गई।

राशनिंग विभाग के उपनियंत्रक गणेश बेल्लाले की टीम ने इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

छापेमारी में सहायक नियंत्रक प्रदीप काले, मुख्य निरीक्षण अधिकारी नागनाथ हंगरगे और राशनिंग निरीक्षक अमोल बुरटे, दीपेंद्र परुलेकर, राहुल इंगले तथा विकास नागदिवे शामिल थे।

इसके अलावा बेलापुर राशनिंग कार्यालय की अधिकारी छाया पालवे और अन्य कर्मचारी भी कार्रवाई में शामिल हुए।

विभागीय अधिकारियों ने संयुक्त रूप से मौके की जांच कर बरामद सामग्री जब्त की।

डीजल चोरी के नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

इस कार्रवाई के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि टैंकरों को उनके निर्धारित मार्ग से हटाकर औद्योगिक क्षेत्र तक कैसे पहुंचाया जा रहा था।

जांच में टैंकरों की आवाजाही, ईंधन के परिवहन दस्तावेज और संबंधित कारोबारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस तरीके से पहले भी डीजल निकाला गया था या नहीं।

यदि जांच में संगठित तरीके से अवैध बिक्री का नेटवर्क सामने आता है, तो अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

फिलहाल बरामद ईंधन और वाहनों को जब्त कर लिया गया है। मामले की आगे की जांच तुर्भे पुलिस कर रही है।

नवी मुंबई में हुई इस कार्रवाई ने औद्योगिक क्षेत्रों में ईंधन के परिवहन और उसकी निगरानी से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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