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म्हाडा कॉलोनियों के पुनर्विकास पर बड़ा फैसला, लीज रेंट ब्याज माफी की तैयारी

मुंबई/ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में करीब चार दशक पुरानी म्हाडा (MHADA) कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। वर्तक नगर, शिवाई नगर, स्वामी विवेकानंद नगर और पवार नगर सहित ओवाला-माजीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र की पुरानी आवासीय इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता आसान बनाने के लिए राज्य सरकार ने पहल तेज कर दी है। परिवहन मंत्री एवं ओवाला-माजीवाड़ा के विधायक प्रताप सरनाईक की अध्यक्षता में बांद्रा स्थित म्हाडा मुख्यालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इसमें पुनर्विकास से जुड़ी वर्षों पुरानी प्रशासनिक और कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। बैठक में बकाया लीज रेंट पर ब्याज माफी, जमीन के रिकॉर्ड में म्हाडा का नाम दर्ज कराने और अतिरिक्त एफएसआई जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
लीज रेंट पर ब्याज माफी का प्रस्ताव
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा म्हाडा कॉलोनियों के निवासियों पर बकाया लीज रेंट और उस पर लगाए गए ब्याज का रहा। बताया गया कि कई आवासीय सोसायटियों में लीज रेंट से संबंधित बकाया राशि वर्षों से लंबित है। इसके चलते पुनर्विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में परेशानी हो रही है।
इस समस्या के समाधान के लिए प्रताप सरनाईक ने बकाया लीज रेंट पर लगाए गए ब्याज को माफ करने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। म्हाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव जायसवाल ने भी इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाया।
मंत्री ने निर्देश दिया कि जो निवासी अपना बकाया लीज रेंट जमा करना चाहते हैं, उनसे भुगतान केवल चेक या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से स्वीकार किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि म्हाडा की प्रशासनिक देरी के कारण आम नागरिकों पर अतिरिक्त जुर्माना नहीं थोपा जाना चाहिए।
इस प्रस्ताव से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो बकाया राशि और ब्याज के कारण पुनर्विकास की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। हालांकि, ब्याज माफी को लेकर अंतिम निर्णय राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही लागू होगा।
जमीन के 7/12 रिकॉर्ड में म्हाडा का नाम दर्ज होगा
बैठक में जमीन के राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ी एक बड़ी समस्या भी सामने आई। करीब 40 साल पुरानी कई म्हाडा कॉलोनियों में जमीन की माप और आवश्यक शुल्क जमा होने के बावजूद 7/12 उतारे पर म्हाडा का नाम दर्ज नहीं हो पाया है।
महाराष्ट्र में 7/12 उतारा जमीन के स्वामित्व, क्षेत्रफल और अन्य राजस्व संबंधी जानकारियों का महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। जमीन के रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं होने के कारण कई पुनर्विकास परियोजनाओं को प्रशासनिक स्तर पर अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।
इस समस्या को दूर करने के लिए प्रताप सरनाईक ने संबंधित अधिकारियों को नामांतरण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। दिवाली के बाद कोकण म्हाडा, वास्तुकारों और ठाणे महानगरपालिका के नगररचना अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया।
मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जमीन के दस्तावेजों से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि पुनर्विकास परियोजनाओं में अनावश्यक देरी न हो।
अतिरिक्त FSI से पुनर्विकास को मिलेगी गति
पुरानी इमारतों के पुनर्विकास में अतिरिक्त एफएसआई (Floor Space Index) को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई।
दरअसल, पुनर्विकास परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता काफी हद तक उपलब्ध एफएसआई पर निर्भर करती है। अतिरिक्त एफएसआई मिलने से विकासक अधिक निर्माण कर सकते हैं, जिससे परियोजना की लागत और निवासियों को मिलने वाले पुनर्वास संबंधी लाभों के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।
बैठक में निर्देश दिया गया कि म्हाडा के नाम पर जमीन का नामांतरण पूरा होने के बाद यूनिफाइड डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशंस (UDCPR) और लागू नियमों के तहत अतिरिक्त एफएसआई की संभावनाओं की जांच की जाए।
इसका उद्देश्य पुनर्विकास परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाना और निवासियों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार करना है। हालांकि, अतिरिक्त एफएसआई की वास्तविक उपलब्धता संबंधित नियोजन नियमों और सरकारी मंजूरी पर निर्भर करेगी।
शिवाई नगर के निवासियों के लिए 17 नवंबर को विशेष बैठक
बैठक में शिवाई नगर के निवासियों की समस्याओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया। यहां लंबे समय से पुनर्विकास और जमीन की मंजूरी से जुड़े मुद्दे लंबित हैं।
इन समस्याओं के समाधान के लिए मंगलवार, 17 नवंबर 2026 को शिवाई नगर परिसर में विशेष बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसमें म्हाडा और महानगरपालिका के संबंधित अधिकारी स्थानीय निवासियों तथा सोसायटी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेंगे।
मंत्री प्रताप सरनाईक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निवासियों की समस्याओं को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनका व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पुनर्विकास के दौरान किराये के मकानों में रहने वाले परिवारों को विकासकों से तय मासिक किराया समय पर मिलना चाहिए। यदि विकासक निर्धारित समय पर भुगतान नहीं करते हैं या परियोजना को अनावश्यक रूप से लंबित रखते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के विकल्पों पर विचार किया जाए।
उच्चस्तरीय बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद
बांद्रा स्थित म्हाडा मुख्यालय में आयोजित इस बैठक में म्हाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव जायसवाल, ठाणे महानगरपालिका आयुक्त सौरभ राव, जिलाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल, कोकण म्हाडा आयुक्त डॉ. विशाल राठोड और नगररचना अधिकारी संग्राम कानडे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
इसके अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नगरसेविका परिषा सरनाईक, विभिन्न आवासीय सोसायटियों के प्रतिनिधियों और वास्तुकारों ने भी बैठक में हिस्सा लिया। सभी पक्षों ने पुनर्विकास परियोजनाओं में आ रही बाधाओं और उनके समाधान को लेकर अपने सुझाव रखे।
हजारों परिवारों को सुरक्षित आवास की उम्मीद
ठाणे की कई म्हाडा कॉलोनियां करीब चार दशक पुरानी हैं। समय के साथ इन इमारतों की संरचनात्मक स्थिति और बुनियादी सुविधाओं को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। ऐसे में पुनर्विकास केवल नए मकान उपलब्ध कराने का विषय नहीं, बल्कि निवासियों की सुरक्षा और बेहतर जीवन स्तर से भी जुड़ा हुआ है।
वर्तक नगर, शिवाई नगर, स्वामी विवेकानंद नगर और पवार नगर जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार वर्षों से पुनर्विकास का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासनिक मंजूरी, लीज रेंट, जमीन के रिकॉर्ड और निर्माण नियमों से जुड़ी अड़चनों के कारण कई परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
प्रताप सरनाईक ने कहा कि म्हाडा कॉलोनियों का पुनर्विकास हजारों परिवारों की सुरक्षा और सम्मानजनक आवास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ लंबित समस्याओं का जल्द समाधान करना चाहिए।
फिलहाल बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। अब इन प्रस्तावों को सरकारी मंजूरी और प्रशासनिक कार्रवाई के माध्यम से लागू करना अगला कदम होगा। यदि ब्याज माफी, जमीन के रिकॉर्ड में सुधार और अतिरिक्त एफएसआई से संबंधित निर्णय लागू होते हैं, तो ठाणे की पुरानी म्हाडा कॉलोनियों के पुनर्विकास को नई गति मिल सकती है।





