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Medical स्टाफ से मारपीट मामले में बड़ा फैसला, आरोपी नेता की जमानत रद्द

Mumbai मुंबई : महिला डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट के मामले में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के समर्थक और शिवसेना नेता रमेश म्हात्रे को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा 14 जुलाई को दी गई जमानत को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने आरोपी को 19 जुलाई तक आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अखाड़ की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि रमेश म्हात्रे के खिलाफ पहले से ही अलग-अलग मामलों में 18 पुलिस केस दर्ज हैं। इनमें कुछ गंभीर प्रकृति के मामले भी शामिल हैं। हाई कोर्ट ने आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए जमानत रद्द करने का फैसला लिया।
अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने जमानत देते समय आरोपी के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही आरोपी को कई मामलों में राहत मिली हो, लेकिन उसके खिलाफ दर्ज 18 मुकदमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इनमें से कुछ मामले गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े हुए हैं।
हाई कोर्ट ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर होने वाले हमलों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। अदालत ने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
दरअसल, रमेश म्हात्रे को महिला डॉक्टर से मारपीट के मामले में निचली अदालत से जमानत मिल गई थी। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी को मिली जमानत पर सवाल उठाए और अब उसे रद्द कर दिया।
क्या है पूरा मामला
यह मामला मुंबई के डोंबिवली इलाके के एक सरकारी अस्पताल का है। आरोप है कि शिवसेना नेता रमेश म्हात्रे अस्पताल पहुंचे थे और उन्होंने खाली बेड उपलब्ध कराने की मांग की थी। महिला डॉक्टर ने नियमों और उपलब्धता के आधार पर बेड देने में असमर्थता जताई, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।
आरोप है कि रमेश म्हात्रे ने महिला डॉक्टर के साथ गाली-गलौज की और हाथापाई करते हुए उन्हें थप्पड़ भी मारा। घटना के बाद अस्पताल में मौजूद मेडिकल स्टाफ में नाराजगी फैल गई। महिला डॉक्टर ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया और डॉक्टर संगठनों ने भी नाराजगी जताई। जमानत मिलने के बाद महाराष्ट्र के डॉक्टरों ने 22 जुलाई से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी। हालांकि, हाई कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद अदालत ने डॉक्टरों से अपने हड़ताल के फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की है।
अब पुलिस और जांच एजेंसियां मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही हैं। हाई कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी रमेश म्हात्रे को तय समय सीमा के भीतर सरेंडर करना होगा। इस मामले को लेकर राजनीतिक और चिकित्सा जगत में भी चर्चा तेज हो गई है।





