महाराष्ट्र

ठाणे में क्लस्टर पुनर्विकास परियोजना का भूमिपूजन 6 हजार परिवारों को मिलेंगे नए घर

Kavita2
23 Sept 2026 5:33 PM IST
ठाणे में क्लस्टर पुनर्विकास परियोजना का भूमिपूजन 6 हजार परिवारों को मिलेंगे नए घर
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ठाणे। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार को ठाणे में सिद्धेश्वर नगर-रमाबाई नगर क्लस्टर पुनर्विकास परियोजना का भूमिपूजन किया। ठाणे महानगरपालिका के तहत शुरू की गई इस परियोजना का उद्देश्य पुराने और जर्जर भवनों तथा झुग्गी क्षेत्रों का एकीकृत पुनर्विकास कर हजारों परिवारों को सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध कराना है। परियोजना से करीब 6,000 परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

भूमिपूजन कार्यक्रम में एकनाथ शिंदे ने कहा कि क्लस्टर डेवलपमेंट का मतलब केवल पुरानी इमारतों को हटाकर उनकी जगह नई इमारतें खड़ी करना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य हजारों परिवारों के जीवन को नए सिरे से संवारना है। उन्होंने कहा कि पुनर्विकास के जरिए लोगों को बेहतर आवास के साथ जरूरी नागरिक सुविधाएं और योजनाबद्ध बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा।

परियोजना के तहत करीब 6,000 परिवारों के लिए सुरक्षित और बेहतर गुणवत्ता वाले घर तैयार किए जाने हैं। इसके साथ नागरिक सुविधाओं, योजनाबद्ध टाउनशिप इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों पर भी जोर दिया गया है। सिद्धेश्वर नगर और आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग वर्षों से पुरानी इमारतों और झुग्गी बस्तियों में रह रहे हैं। इस परियोजना के आगे बढ़ने से उन्हें स्थायी आवास मिलने का रास्ता साफ होगा।

सिद्धेश्वर नगर क्लस्टर पुनर्विकास परियोजना ठाणे शहर में चल रही व्यापक क्लस्टर डेवलपमेंट योजना का हिस्सा है। इसके तहत अलग-अलग पुरानी इमारतों का अलग-अलग पुनर्विकास करने के बजाय एक बड़े क्षेत्र को एक साथ विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य आवास के साथ सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज और अन्य आवश्यक शहरी सुविधाओं को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करना है।

ठाणे महानगरपालिका ने क्लस्टर पुनर्विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए ‘क्लस्टर विकास कंपनी’ का गठन किया है। शहर के लिए तैयार 50 शहरी पुनरुत्थान योजनाओं में से 12 योजनाओं को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। सिद्धेश्वर नगर परियोजना को किसन नगर के बाद क्लस्टर योजना के दूसरे प्रमुख चरण के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। परियोजना को प्राथमिकता वाले सार्वजनिक आवास प्रोजेक्ट का दर्जा भी दिया गया है।

इस योजना को गति देने के लिए एमआईडीसी की 60.72 हेक्टेयर जमीन पुनर्वास के लिए हस्तांतरित किए जाने का निर्णय भी लिया गया था। अधिकारियों की कोशिश है कि पुनर्वास के साथ पूरे क्षेत्र को बेहतर तरीके से विकसित किया जाए, ताकि नए घरों में बसने वाले लोगों को भविष्य में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान शिंदे ने परियोजना को समय पर पूरा करने पर भी जोर दिया। उन्होंने संबंधित डेवलपर को सिद्धेश्वर क्लस्टर का काम तीन वर्षों में पूरा करने और नागरिकों को उनके घरों की चाबियां सौंपने के निर्देश दिए। सिद्धेश्वर झील के आसपास के इलाके में हजारों लोग लंबे समय से पुनर्विकास का इंतजार कर रहे हैं।

शिंदे ने इस दौरान मुंबई महानगर क्षेत्र में आवास निर्माण को लेकर सरकार की व्यापक योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र में अगले 15 से 20 वर्षों में करीब 30 लाख घर तैयार करने की योजना है। इसके साथ मुंबई, ठाणे, मीरा-भायंदर, भिवंडी, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर जैसे क्षेत्रों में क्लस्टर पुनर्विकास को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

क्लस्टर डेवलपमेंट योजना का प्रमुख उद्देश्य घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जर्जर और असुरक्षित निर्माणों की समस्या का समाधान करना है। ठाणे में कई इलाकों में पुरानी अधिकृत और अनधिकृत इमारतों, चॉल और झुग्गी बस्तियों का एकीकृत पुनर्विकास प्रस्तावित है। बड़े भूखंड को एक साथ विकसित करने से आवासीय इमारतों के साथ सड़क और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भी बेहतर योजना तैयार की जा सकती है।

सिद्धेश्वर नगर-रमाबाई नगर परियोजना को इसी मॉडल के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे लोगों को केवल नए मकान ही नहीं, बल्कि बेहतर जीवन स्तर के लिए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया गया है।

भूमिपूजन के साथ सिद्धेश्वर नगर क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित पुनर्विकास परियोजना अब निर्माण की दिशा में आगे बढ़ी है। परियोजना तय समयसीमा के मुताबिक पूरी होने पर हजारों परिवारों को स्थायी घर मिलने के साथ इलाके के बुनियादी ढांचे में भी बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। फिलहाल परियोजना के क्रियान्वयन और तीन वर्ष की घोषित समयसीमा पर नजर रहेगी।

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