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भिवंडी इमारत हादसा: मलबे से छह शव बरामद, NDRF और बचाव दलों का अभियान जारी

ठाणे (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी इलाके में चार मंजिला रिहायशी इमारत के आंशिक रूप से ढहने के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। शुक्रवार को हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई। नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के अनुसार, अब तक मलबे से छह लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कुछ अन्य लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए खोज अभियान अभी भी चल रहा है।
हादसा भिवंडी के एक रिहायशी इलाके में हुआ था, जहां इमारत का एक हिस्सा अचानक गिर गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू करने की कोशिश की। सूचना मिलते ही प्रशासन और आपदा राहत एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं और बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया।
बचाव कार्य में NDRF के अलावा स्थानीय प्रशासन, पुलिस और अन्य आपदा प्रबंधन दल शामिल हैं। टीमें आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाकर उसमें फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभियान पूरी सावधानी के साथ चलाया जा रहा है, क्योंकि इमारत का बचा हुआ हिस्सा भी कमजोर हो सकता है।
NDRF के अधिकारियों के मुताबिक, मलबे से छह शव निकाले जा चुके हैं। इसके अलावा यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं और लोग तो इमारत के नीचे नहीं फंसे हैं। बचावकर्मी लगातार मलबे की जांच कर रहे हैं और हर संभावित स्थान पर खोज अभियान चला रहे हैं।
घटना के बाद आसपास के इलाके को सुरक्षित कर दिया गया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घटनास्थल के पास भीड़ न लगाएं, ताकि राहत और बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी है।
भिवंडी ठाणे जिले का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र है, जिसे पावरलूम उद्योग और वेयरहाउसिंग गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में मजदूर और कामगार रहते हैं। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पुरानी और कमजोर इमारतें लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत गिरने के बाद तेज आवाज सुनाई दी, जिसके बाद लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचे। कई लोगों ने शुरुआती स्तर पर मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की। बाद में प्रशासन और बचाव एजेंसियों के पहुंचने के बाद व्यवस्थित तरीके से राहत अभियान शुरू किया गया।
प्रशासन अब हादसे के कारणों की भी जांच करेगा। अधिकारियों का कहना है कि इमारत की स्थिति, निर्माण गुणवत्ता और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जाएगी। यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
महाराष्ट्र में मानसून के दौरान कमजोर और पुरानी इमारतों के गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं। भारी बारिश के कारण कई बार इमारतों की संरचना कमजोर हो जाती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से समय-समय पर जर्जर इमारतों की पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी इलाकों में पुरानी इमारतों की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां बड़ी संख्या में लोग एक साथ रहते हैं, वहां भवनों की मजबूती और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में शोक का माहौल है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है। घायलों के इलाज और प्रभावित लोगों की मदद के लिए भी व्यवस्था की गई है।
फिलहाल भिवंडी में बचाव अभियान जारी है। NDRF और अन्य टीमें मलबे में फंसे संभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास में जुटी हैं। प्रशासन का कहना है कि जब तक मलबे की पूरी तरह जांच नहीं हो जाती, तब तक अभियान जारी रखा जाएगा।





