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भयंदर RTO पर परमिट जारी करने में गड़बड़ी के आरोप, 30 मामलों की जांच के आदेश

Maharashtra महाराष्ट्र: भयंदर रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) पर ऑटो-रिक्शा परमिट जारी करने में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। भयंदर के विधायक नरेंद्र मेहता ने दावा किया है कि करीब 30 ऑटो-रिक्शा परमिट कथित रूप से रोहिंग्या और बांग्लादेशी आवेदकों को जारी किए गए हैं, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस मामले को लेकर एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए दस्तावेजों और नागरिकता सत्यापन प्रक्रिया में संभावित त्रुटियों की जांच के आदेश दिए हैं। विभाग ने इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, अब तक सभी 30 मामलों का प्रारंभिक स्तर पर रिव्यू पूरा कर लिया गया है। जांच में यह देखा जा रहा है कि परमिट जारी करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या नहीं और क्या दस्तावेजों के सत्यापन में किसी प्रकार की चूक हुई है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सभी आवेदकों ने मोटर व्हीकल एक्ट के तहत आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे। इनमें तहसीलदार द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र, ई-आधार कार्ड, पैन कार्ड और पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट शामिल हैं। फिलहाल यह जांच का विषय है कि इन दस्तावेजों की सत्यता और प्रक्रिया की वैधता कितनी सही तरीके से जांची गई।
विधायक नरेंद्र मेहता ने आरोप लगाया है कि यह मामला केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि गंभीर सुरक्षा और सत्यापन से जुड़ा मुद्दा हो सकता है। उन्होंने मांग की है कि पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाए।
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित परमिट रद्द किए जा सकते हैं और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है।
यह मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है। स्थानीय प्रशासन अब दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त करने पर विचार कर रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की शिकायतों से बचा जा सके।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।a





