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छत्रपति संभाजीनगर। जाने-माने अभिनेता और यूनिसेफ के राष्ट्रीय एंबेसडर आयुष्मान खुराना ने बच्चों के सुरक्षित और खुशहाल बचपन के लिए समाज की सामूहिक भागीदारी को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि हमारे आसपास मौजूद हर बच्चे के बचपन की सुरक्षा केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने महाराष्ट्र के जालना जिले में प्रवासी मजदूरों के बच्चों की देखभाल और शिक्षा के लिए ग्रामीणों तथा रिश्तेदारों की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
आयुष्मान खुराना ने बुधवार को जालना जिले के चंडई टेपली गांव स्थित एक स्थानीय स्कूल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल के विद्यार्थियों के साथ बातचीत की और उनकी पढ़ाई, सपनों तथा रोजमर्रा की जिंदगी के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों के रिश्तेदारों, ग्रामीणों और यूनिसेफ से जुड़े ‘बालमित्रों’ से भी संवाद किया।
प्रवासी मजदूरों के बच्चों की जिम्मेदारी उठा रहे ग्रामीण
जालना जिले में चल रही इस पहल का उद्देश्य प्रवासी मजदूरों के बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। प्रवासी मजदूरों के काम के सिलसिले में लगातार स्थान बदलने के कारण कई बार उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे में गांव के लोगों और बच्चों के रिश्तेदारों ने उनकी जिम्मेदारी उठाने का प्रयास किया है।
इस पहल के तहत स्थानीय समुदाय बच्चों की पढ़ाई, उनकी जरूरतों और उनके संरक्षण को लेकर सहयोग कर रहा है। ग्रामीणों की भागीदारी से बच्चों को अपने गांव और स्कूल से जुड़े रहने में मदद मिल रही है।
आयुष्मान खुराना ने इस सामुदायिक प्रयास को बच्चों के अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित बचपन देने के लिए समाज के हर वर्ग को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
बच्चों से सीधे संवाद किया
स्कूल पहुंचने के बाद आयुष्मान खुराना ने विद्यार्थियों से बातचीत की। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछा। इस दौरान बच्चों ने भी उनसे बातचीत की और अपने अनुभव साझा किए।
खुराना ने बच्चों के साथ संवाद के दौरान उनके आत्मविश्वास और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को आगे बढ़ने के लिए सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और परिवार तथा समुदाय का सहयोग मिलना जरूरी है।
उन्होंने ग्रामीणों और बच्चों की देखभाल में सहयोग कर रहे लोगों के प्रयासों को भी सराहा। उनके अनुसार, जब कोई समुदाय बच्चों के लिए आगे आता है तो उसका सीधा सकारात्मक प्रभाव उनके भविष्य पर पड़ता है।
समाज की सामूहिक जिम्मेदारी
यूनिसेफ के राष्ट्रीय एंबेसडर के तौर पर आयुष्मान खुराना लंबे समय से बच्चों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने से जुड़े रहे हैं। जालना की यात्रा के दौरान उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज की भूमिका पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आसपास के हर बच्चे के बचपन की रक्षा करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए केवल नीतियां और योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।
उन्होंने ग्रामीणों और रिश्तेदारों की पहल को इसी सोच का उदाहरण बताया। उनके मुताबिक, जब किसी बच्चे के माता-पिता रोजी-रोटी के लिए दूसरे स्थान पर जाते हैं, तब समुदाय की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
‘बालमित्रों’ से भी मुलाकात
दौरे के दौरान खुराना ने यूनिसेफ के ‘बालमित्रों’ से भी बातचीत की। ये लोग बच्चों के अधिकारों, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े प्रयासों में समुदाय के साथ काम करते हैं।
उन्होंने स्थानीय स्तर पर बच्चों के साथ काम करने वाले लोगों से उनकी चुनौतियों के बारे में जानकारी ली। साथ ही यह समझने का प्रयास किया कि प्रवासी परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए किस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थानीय नेतृत्व की मौजूदगी
आयुष्मान खुराना के इस दौरे के दौरान यूनिसेफ इंडिया के डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव जैस्पर मोलर, जैस्मीन चौधरी, गांव के सरपंच शंकर आसाराम और अन्य लोग मौजूद रहे।
स्थानीय प्रतिनिधियों और यूनिसेफ से जुड़े अधिकारियों ने खुराना को इस पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समुदाय की भागीदारी से प्रवासी मजदूरों के बच्चों को शिक्षा और संरक्षण से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
छत्रपति संभाजीनगर में भी पहल पर चर्चा
चंडई टेपली गांव के दौरे के बाद आयुष्मान खुराना ने छत्रपति संभाजीनगर में इस पहल के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने ग्रामीणों और समुदाय के सदस्यों द्वारा बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयासों को उदाहरण के तौर पर सामने रखा।
उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए समाज को उनके साथ खड़ा होना होगा। खासकर ऐसे बच्चे जिनके परिवार आर्थिक परिस्थितियों के कारण लगातार स्थान बदलते रहते हैं, उन्हें शिक्षा और सुरक्षा से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
सामुदायिक भागीदारी का संदेश
जालना में आयुष्मान खुराना का दौरा केवल एक स्कूल की यात्रा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा में समुदाय की भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित किया। प्रवासी मजदूरों के बच्चों की जिम्मेदारी स्थानीय लोगों द्वारा उठाया जाना इस बात का उदाहरण है कि सरकारी और संस्थागत प्रयासों के साथ सामाजिक भागीदारी भी बदलाव ला सकती है।
इस पहल से यह संदेश सामने आता है कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर समुदाय अगर सक्रिय भूमिका निभाए तो मुश्किल परिस्थितियों में भी उनके बचपन को बेहतर बनाया जा सकता है। आयुष्मान खुराना ने इसी सामूहिक प्रयास को प्रोत्साहित करते हुए बच्चों के अधिकारों और सुरक्षित बचपन के लिए समाज से आगे आने की अपील की।





