महाराष्ट्र

ऑटो-टैक्सी मीटर में खेल पांच लोगों पर केस

Kavita2
5 Sept 2026 10:14 AM IST
ऑटो-टैक्सी मीटर में खेल पांच लोगों पर केस
x

मुंबई। मुंबई के दहिसर इलाके में टैक्सी और ऑटो-रिक्शा के मीटर से कथित छेड़छाड़ कर यात्रियों से अधिक किराया वसूलने का मामला सामने आया है। दहिसर पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि टैक्सी और ऑटो के मीटर में विशेष इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाकर किराए की रीडिंग को प्रभावित किया जाता था। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों में शामिल 31 वर्षीय अमीन पठान कथित तौर पर वाहनों के मीटर में ये इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाता था।

पुलिस को शिकायत मिली थी कि दहिसर क्षेत्र में कुछ टैक्सी और ऑटो चालक मीटर से छेड़छाड़ कर यात्रियों को धोखा दे रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने मामले की सच्चाई जानने के लिए बाकायदा एक डमी यात्री को टैक्सी में बैठाकर जांच की। पुलिस की यह कार्रवाई 1 अगस्त को शाम करीब सात बजे की गई।

पुलिस को मिली थी मीटर में गड़बड़ी की सूचना

पुलिस के मुताबिक असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर नीलेश सालुंखे को जानकारी मिली थी कि दहिसर में कई टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालक अपने वाहनों के मीटर से छेड़छाड़ कर रहे हैं। आरोप था कि यात्रियों द्वारा तय की गई वास्तविक दूरी के मुकाबले मीटर पर अधिक किराया दिखाई देता है।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय पहले आरोपों की पुष्टि करने की योजना बनाई। इसके लिए एक व्यक्ति को डमी यात्री बनाकर टैक्सी में भेजने का फैसला किया गया, ताकि यात्रा के दौरान मीटर की गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

डमी यात्री बनाकर टैक्सी में भेजा

1 अगस्त को शाम करीब सात बजे पुलिस की योजना के तहत डमी यात्री को एक टैक्सी में बैठाया गया। इस दौरान पुलिस टीम पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही थी। यात्रा के दौरान मीटर की रीडिंग और किराए में कथित गड़बड़ी से संबंधित जानकारी जुटाई गई।

इसके बाद पुलिस ने संबंधित वाहन और उसके मीटर की जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ी तो कथित रूप से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस तरीके का इस्तेमाल कब से किया जा रहा था और कितने वाहनों के मीटर में ऐसे उपकरण लगाए गए।

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से मीटर में छेड़छाड़ का आरोप

पुलिस की जांच में सामने आया कि टैक्सी और ऑटो-रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाए गए थे। आरोप है कि इन उपकरणों के जरिए मीटर की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित किया जा सकता था और किराए की रीडिंग में बदलाव किया जाता था।

इस तरह यात्रियों को वास्तविक दूरी के लिए निर्धारित किराए से अधिक राशि चुकानी पड़ सकती थी। सामान्य यात्रियों के लिए मीटर के भीतर हुई ऐसी तकनीकी छेड़छाड़ का पता लगाना आसान नहीं होता। यात्री मीटर पर दिखाई देने वाली राशि को सही मानकर उसका भुगतान कर देते हैं।

पुलिस इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है कि इस कथित व्यवस्था के जरिए कितने यात्रियों से अतिरिक्त किराया वसूला गया होगा।

अमीन पठान पर डिवाइस लगाने का आरोप

जांच में 31 वर्षीय अमीन पठान का नाम सामने आया है। पुलिस के अनुसार उस पर टैक्सी और ऑटो-रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाने का आरोप है। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह किन-किन वाहन चालकों के संपर्क में था और कितने वाहनों में इस तरह के उपकरण लगाए गए थे।

इसके अलावा यह भी पता लगाया जा सकता है कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस कहां से हासिल किए जाते थे और उन्हें मीटर में लगाने के बदले कितनी रकम ली जाती थी।

यदि इस तरह की छेड़छाड़ बड़े स्तर पर किए जाने की जानकारी सामने आती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला

दहिसर पुलिस ने मामले में पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस अब सभी आरोपियों की अलग-अलग भूमिका की जांच कर रही है। उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और मीटर की तकनीकी जांच भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास करेगी कि क्या आरोपी किसी संगठित तरीके से काम कर रहे थे या अलग-अलग वाहन चालकों के अनुरोध पर मीटर से छेड़छाड़ की जाती थी।

पुलिस इस मामले में वाहन से जुड़े दस्तावेजों और मीटर के प्रमाणीकरण संबंधी रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है।

यात्रियों को ऐसे बनाया जाता था निशाना

टैक्सी और ऑटो से यात्रा करने वाले अधिकतर लोग मीटर पर दिखने वाले किराए पर भरोसा करते हैं। यदि मीटर के भीतर इलेक्ट्रॉनिक स्तर पर छेड़छाड़ की गई हो तो सामान्य यात्री के लिए इसे पहचानना बेहद मुश्किल हो सकता है।

यात्रा पूरी होने पर मीटर वास्तविक किराए से अधिक राशि दिखाए तो यात्री अक्सर उसे दूरी या ट्रैफिक का असर समझकर भुगतान कर सकता है। इसी भरोसे का कथित तौर पर फायदा उठाए जाने का आरोप है।

पुलिस की जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि डिवाइस किस तकनीक से काम करता था और उसके जरिए मीटर की रीडिंग कितनी प्रभावित की जा सकती थी।

तकनीकी जांच से खुल सकता है पूरा नेटवर्क

पुलिस के लिए बरामद या संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण होगी। विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि उपकरण मीटर के साथ किस तरह जोड़ा गया था और उसे नियंत्रित करने का तरीका क्या था।

इसके साथ ही पुलिस आरोपियों के मोबाइल और संपर्कों की जांच के जरिए अन्य वाहन चालकों तक भी पहुंच सकती है। यदि बड़ी संख्या में टैक्सी या ऑटो के मीटर से छेड़छाड़ का पता चलता है तो आगे और मामले दर्ज किए जा सकते हैं।

फिलहाल दहिसर पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की कार्रवाई ने टैक्सी और ऑटो मीटर की विश्वसनीयता तथा यात्रियों से सही किराया वसूले जाने के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

Next Story