महाराष्ट्र

नेपाल बाढ़ त्रासदी पर बोले अरुणाचल राज्यपाल ग्लेशियर पिघलने से बढ़ रहा खतरा निगरानी जरूरी

SHIDDHANT
28 Aug 2026 10:35 PM IST
नेपाल बाढ़ त्रासदी पर बोले अरुणाचल राज्यपाल ग्लेशियर पिघलने से बढ़ रहा खतरा निगरानी जरूरी
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Mumbai मुंबई: नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) को लेकर अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल कैवल्य त्रिविक्रम परनाइक (सेवानिवृत्त) ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और ऐसी आपदाओं से बचने के लिए ग्लेशियर झीलों की लगातार निगरानी करना जरूरी है। मुंबई में नेपाल बाढ़ को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए राज्यपाल परनाइक ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में खतरे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्लेशियर झीलों पर विशेष नजर रखने की आवश्यकता है, क्योंकि इनके टूटने से अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर आ सकता है और भारी तबाही मचा सकता है।
उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में स्थित देशों को इस तरह की प्राकृतिक घटनाओं के प्रति अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। ग्लेशियरों में बदलाव और तापमान वृद्धि के कारण पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है, जिसका असर बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल परनाइक ने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों और प्रशासनिक एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा ताकि समय रहते संभावित खतरों की पहचान की जा सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और निगरानी प्रणालियों की मदद से ग्लेशियर झीलों की स्थिति पर नजर रखी जा सकती है।
नेपाल में हाल ही में आई अचानक बाढ़ ने कई क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया है। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। भारत समेत कई देशों ने नेपाल के लिए सहायता का हाथ बढ़ाया है। राज्यपाल ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले देशों के लिए आपदा प्रबंधन और आपसी सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल किसी एक देश की समस्या नहीं होतीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को प्रभावित करती हैं।
उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया भर में मौसम के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहा है। हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इसका प्रभाव और अधिक गंभीर हो सकता है। परनाइक ने कहा कि भविष्य में ऐसी आपदाओं को कम करने के लिए पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन और बेहतर आपदा तैयारी पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और सतत विकास ही लंबे समय का समाधान है।
नेपाल बाढ़ की घटना के बाद हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों और जलवायु परिवर्तन को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञ भी लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियरों में बदलाव से अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
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