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गढ़चिरौली के कोपरशी जंगल में एंटी-माओवादी अभियान, विस्फोटक और हथियार बरामद

गढ़चिरौली। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में पुलिस और सुरक्षा बलों ने एंटी-माओवादी अभियान के दौरान नक्सलियों के कथित मंसूबों को नाकाम करने का दावा किया है। भमरगढ़ उपखंड के कोपरशी जंगल क्षेत्र में चलाए गए विशेष तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और हथियार छिपाकर रखे होने की सूचना मिली थी। इसी इनपुट के आधार पर 6 अक्टूबर को ऑपरेशन शुरू किया गया।
पुलिस के अनुसार, खुफिया तंत्र से जानकारी मिली थी कि नक्सली संगठन ने कोपरशी के जंगलों में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के उद्देश्य से विस्फोटक और अन्य सामग्री जमा कर रखी है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए इलाके में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
इस ऑपरेशन में स्पेशल ऑपरेशंस स्क्वॉड और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड यानी BDDS की टीमों को शामिल किया गया। दोनों टीमों ने संयुक्त रूप से जंगल के संदिग्ध हिस्सों में सघन तलाशी अभियान चलाया।
जंगल क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए अभियान बेहद सावधानी के साथ चलाया गया। सुरक्षा बलों की टीमों ने संभावित ठिकानों, पगडंडियों और घने जंगल वाले हिस्सों की जांच की। बम निरोधक दस्ते ने उन स्थानों की विशेष रूप से पड़ताल की, जहां विस्फोटक छिपाए जाने की आशंका थी।
पुलिस का कहना है कि अभियान के दौरान संदिग्ध स्थान से विस्फोटक सामग्री और हथियार बरामद किए गए। बरामद सामग्री को सुरक्षित तरीके से कब्जे में लिया गया और बम निरोधक दस्ते की मदद से उसकी जांच की गई।
अधिकारियों के अनुसार, यह सामग्री कथित तौर पर सुरक्षा बलों के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने की तैयारी का हिस्सा हो सकती थी। हालांकि बरामदगी के बाद सामग्री की प्रकृति, मात्रा और इस्तेमाल की संभावित योजना को लेकर विस्तृत जांच की जा रही है।
गढ़चिरौली लंबे समय से माओवादी गतिविधियों से प्रभावित जिलों में शामिल रहा है। जिले के कई दुर्गम और घने जंगल वाले क्षेत्रों में सुरक्षा बल लगातार सर्च ऑपरेशन चलाते रहे हैं।
भमरगढ़ उपखंड भी संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है। यहां जंगल और पहाड़ी क्षेत्र अधिक होने के कारण सुरक्षा बलों को अभियान के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है।
पुलिस का कहना है कि खुफिया सूचना के आधार पर तेजी से कार्रवाई किए जाने से संभावित खतरे को समय रहते टालने में मदद मिली। यदि विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल सुरक्षा बलों के रास्ते या ऑपरेशन के दौरान किया जाता, तो बड़ा नुकसान हो सकता था।
अभियान के दौरान सुरक्षा टीमों ने पूरे इलाके को घेरकर चरणबद्ध तरीके से तलाशी ली। बम निरोधक दस्ते ने प्रत्येक संदिग्ध वस्तु को सावधानी से जांचा, ताकि किसी भी संभावित विस्फोट से बचा जा सके।
सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि विस्फोटक और हथियार किसने वहां पहुंचाए थे और उन्हें कितने समय से जंगल में छिपाकर रखा गया था।
इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि बरामद सामग्री का संबंध किसी सक्रिय माओवादी दल या स्थानीय नेटवर्क से था या नहीं। इस संबंध में आसपास के क्षेत्रों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस संभावित संपर्क सूत्रों और जंगल में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की भी जांच कर रही है। स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सूचनाओं को भी सत्यापित किया जा रहा है।
गढ़चिरौली पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से एंटी-माओवादी अभियानों में तकनीकी और मानवीय खुफिया दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त और सर्च ऑपरेशन भी चलाए जाते हैं।
कोपरशी जंगल में हुई इस कार्रवाई को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का उद्देश्य नक्सलियों के संभावित ठिकानों, रसद और हथियार भंडार को खत्म करना है।
अभियान के बाद भी क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमें आसपास के जंगलों में लगातार सर्चिंग कर रही हैं, ताकि किसी अन्य संदिग्ध ठिकाने का भी पता लगाया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री की फोरेंसिक और तकनीकी जांच से भी कई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि विस्फोटक किस प्रकार के थे और उनका इस्तेमाल किस तरह किया जाना था।
यदि हथियारों या विस्फोटकों पर किसी खास समूह या निर्माण स्रोत से जुड़े संकेत मिलते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
पुलिस यह भी देख रही है कि हाल के दिनों में इस क्षेत्र में नक्सली गतिविधि से जुड़ी कोई अन्य सूचना या मूवमेंट सामने आया था या नहीं। इससे पूरे नेटवर्क की गतिविधियों को समझने में मदद मिलेगी।
माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के लिए सड़क, जंगल और नदी मार्गों पर गश्त के दौरान खतरा बना रहता है। इसी वजह से बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल टीमों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
कोपरशी जंगल में भी BDDS की मौजूदगी के कारण बरामद विस्फोटक सामग्री को सुरक्षित तरीके से संभालने में मदद मिली।
पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि अभियान अभी खत्म नहीं माना जा रहा है। क्षेत्र में सर्चिंग और निगरानी जारी रहेगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों से भी अपील की गई है कि जंगल या ग्रामीण क्षेत्र में कोई संदिग्ध वस्तु, व्यक्ति या गतिविधि दिखाई दे तो इसकी जानकारी पुलिस को दें।
सुरक्षा एजेंसियां इस घटना को संभावित हमले की तैयारी के रूप में देख रही हैं, लेकिन पूरे मामले की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही होगी।
फिलहाल गढ़चिरौली के भमरगढ़ उपखंड स्थित कोपरशी जंगल में चलाए गए विशेष अभियान में पुलिस और सुरक्षा बलों ने विस्फोटक तथा हथियार बरामद करने का दावा किया है। 6 अक्टूबर को शुरू हुए इस अभियान के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।
पुलिस अब बरामद सामग्री, उसके स्रोत और उससे जुड़े संभावित नेटवर्क की जांच कर रही है। साथ ही आसपास के जंगलों में तलाशी अभियान जारी है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।





