- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- आनंद परांजपे की...
आनंद परांजपे की शिवसेना (शिंदे गुट) में ‘घर वापसी’, NCP से दिया इस्तीफा

Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ठाणे जिले के पूर्व लोकसभा सांसद आनंद परांजपे ने गुरुवार को डिप्टी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में अपनी ‘घर वापसी’ की घोषणा की। इससे पहले उन्होंने डिप्टी मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से इस्तीफा दे दिया।
आनंद परांजपे ने NCP की प्राथमिक सदस्यता से औपचारिक रूप से इस्तीफा देते हुए पार्टी में अपनी सभी जिम्मेदारियों से भी खुद को अलग कर लिया। वे ठाणे और पालघर जिलों के लिए पार्टी के महासचिव, प्रवक्ता और समन्वयक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे। उनके इस्तीफे के बाद पार्टी संगठन में खालीपन और राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति देखी जा रही है।
सुनेत्रा पवार को लिखे अपने इस्तीफा पत्र में आनंद परांजपे ने कहा कि वे “एक नए सफर की शुरुआत” के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वे पिछले 14 वर्षों से पार्टी से जुड़े हुए थे, लेकिन अब उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में नए रास्ते पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया है।
शिवसेना (शिंदे गुट) में उनकी वापसी को महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। एक समय शिवसेना से जुड़े रहे आनंद परांजपे की दोबारा पार्टी में एंट्री से ठाणे और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से शिंदे गुट को ठाणे और पालघर जैसे क्षेत्रों में संगठनात्मक रूप से मजबूती मिल सकती है। वहीं, NCP के लिए यह एक और झटका माना जा रहा है, क्योंकि हाल के समय में पार्टी से कई नेताओं के इस्तीफे सामने आ चुके हैं।
परांजपे की राजनीतिक यात्रा लंबे समय से चर्चा में रही है। वे पहले भी शिवसेना से जुड़े रहे हैं और लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। बाद में वे NCP में शामिल हुए और संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे। अब उनकी दोबारा शिवसेना में वापसी को ‘राजनीतिक पुनर्गठन’ के रूप में देखा जा रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर गठबंधन और दल-बदल की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में और भी नेता अपने राजनीतिक विकल्पों पर पुनर्विचार कर सकते हैं।
फिलहाल आनंद परांजपे की वापसी से शिंदे गुट को एक अनुभवी नेता का समर्थन मिला है, जिससे स्थानीय स्तर पर पार्टी की रणनीति और मजबूत होने की उम्मीद है।





