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गरबा-डांडिया में मुसलमानों की एंट्री विवाद पर अमृता फडणवीस का बयान

मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने धार्मिक त्योहारों में सभी समुदायों की भागीदारी का समर्थन किया है। नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुसलमानों के प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद के बीच उन्होंने कहा कि त्योहारों को सभी के लिए खुला रखा जाना चाहिए और अलग-अलग समुदायों के लोगों के शामिल होने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
अमृता फडणवीस ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति भी नवरात्रि उत्सव में आता है और त्योहार का सही तरीके से आनंद लेता है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने धार्मिक आयोजनों को सामाजिक एकता और भाईचारे का माध्यम बताया।
गरबा कार्यक्रमों में प्रवेश को लेकर विवाद
#WATCH | Chandrapur, Maharashtra: On Maharashtra Minister Nitesh Rane backing VHP's call to bar Muslims from Navratri event, wife of CM Devendra Fadnavis & social worker Amruta Fadnavis says, "He must have said this after thinking something; I do not want to get into its depths.… pic.twitter.com/23VqzO2enT
— ANI (@ANI) September 8, 2026
हाल के दिनों में महाराष्ट्र समेत कई जगहों पर गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुसलमानों की भागीदारी को लेकर बहस शुरू हुई है। कुछ संगठनों और नेताओं की ओर से इन आयोजनों में प्रवेश को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए हैं।
इसी विवाद के बीच अमृता फडणवीस का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने त्योहारों को सभी समुदायों के लिए खुला रखने की बात कही है।
सभी के स्वागत की बात कही
अमृता फडणवीस ने कहा कि त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते, बल्कि वे समाज को जोड़ने का काम भी करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी त्योहार की भावना का सम्मान करते हुए उसमें शामिल होता है तो उसका स्वागत होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति में विभिन्न समुदायों के बीच मेल-जोल और एक-दूसरे के त्योहारों में भागीदारी की परंपरा रही है।
राणे की टिप्पणी पर दिया जवाब
अमृता फडणवीस का यह बयान बीजेपी नेता नितेश राणे की टिप्पणी के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। राणे की ओर से गरबा कार्यक्रमों में मुसलमानों की भागीदारी को लेकर बयान दिया गया था, जिसके बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई थी।
अमृता फडणवीस ने इस मामले पर अलग रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी त्योहार में शामिल होने वाले लोगों को उनकी आस्था और व्यवहार के आधार पर देखा जाना चाहिए।
धार्मिक आयोजनों में बढ़ती राजनीति
देश में धार्मिक त्योहारों और आयोजनों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी अक्सर देखने को मिलती है। नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
इन आयोजनों में केवल धार्मिक गतिविधियां ही नहीं होतीं, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत और सामाजिक मेल-जोल भी होता है। यही वजह है कि इन कार्यक्रमों में भागीदारी को लेकर अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं।
सामाजिक सद्भाव पर जोर
अमृता फडणवीस ने अपने बयान में सामाजिक सद्भाव और आपसी सम्मान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि त्योहारों का उद्देश्य लोगों को जोड़ना होना चाहिए।
उन्होंने संकेत दिया कि किसी व्यक्ति की पहचान के आधार पर उसे किसी उत्सव से दूर रखना उचित नहीं है, अगर वह व्यक्ति त्योहार की परंपराओं और भावनाओं का सम्मान कर रहा है।
महाराष्ट्र में गरबा आयोजनों की तैयारी
नवरात्रि के मौके पर महाराष्ट्र के कई शहरों में बड़े स्तर पर गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मुंबई, पुणे और अन्य शहरों में इन कार्यक्रमों में हजारों लोग हिस्सा लेते हैं।
आयोजक सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर कई तरह के नियम बनाते हैं। इस बार प्रवेश और पहचान को लेकर कुछ जगहों पर विवाद सामने आए हैं, जिसके कारण राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं।
बयान के बाद चर्चा तेज
अमृता फडणवीस के बयान के बाद इस मुद्दे पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। जहां कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग धार्मिक आयोजनों में प्रवेश को लेकर अलग राय रखते हैं।
हालांकि, अमृता फडणवीस ने स्पष्ट किया कि उन्हें अलग-अलग समुदायों के लोगों के त्योहारों में शामिल होने में कोई समस्या नहीं दिखती।
त्योहारों की समावेशी परंपरा पर जोर
भारत में लंबे समय से अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते रहे हैं। कई सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विभिन्न समुदायों की भागीदारी देखने को मिलती है।
अमृता फडणवीस के बयान को इसी परंपरा और सामाजिक समरसता से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति श्रद्धा और सम्मान के साथ किसी उत्सव में शामिल होता है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।
फिलहाल गरबा-डांडिया कार्यक्रमों में प्रवेश को लेकर चल रही बहस के बीच अमृता फडणवीस का यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक चर्चा में अहम मुद्दा बन गया है।





