महाराष्ट्र

अमित शाह की UCBs को सलाह- RBI को अलग नजरिए से देखें

Kavita2
8 Aug 2026 4:26 PM IST
अमित शाह की UCBs को सलाह- RBI को अलग नजरिए से देखें
x

नई दिल्ली। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ पुराने नजरिए को बदलकर भरोसे और सहयोग के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शहरी सहकारी बैंक और केंद्रीय बैंक एक-दूसरे को जिस नजरिए से देखते हैं, उससे बाहर निकलने की जरूरत है। शाह ने अपने अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि जब सहकारी क्षेत्र ने भरोसे के साथ आगे बढ़कर पहल की, तो RBI ने भी सक्रिय रूप से सहयोग किया है।

शाह यहां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) परिसर में नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NUCFDC) की नई कार्यालय इमारत के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में देशभर के शहरी सहकारी बैंक क्षेत्र से जुड़े अधिकारी और हितधारक मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि UCBs को मजबूत बनाने और उन्हें बदलते वित्तीय परिदृश्य के अनुरूप तैयार करने के लिए नियामक संस्थाओं और सहकारी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

RBI और UCBs के बीच नजरिया बदलने पर जोर

अमित शाह ने कहा कि शहरी सहकारी बैंकों और RBI के बीच लंबे समय से एक विशेष तरह की धारणा बनी हुई है। उनके मुताबिक, RBI UCBs को एक खास नजरिए से देखता है, जबकि UCBs की भी केंद्रीय बैंक को लेकर अलग धारणा है। उन्होंने कहा कि अब दोनों पक्षों को इस सोच से बाहर निकलकर एक-दूसरे को सहयोगी नजरिए से देखना होगा।

उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केवल नियमों का पालन पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियामक संस्थाओं और बैंकों के बीच विश्वास भी जरूरी है। शाह ने UCBs के अधिकारियों से कहा कि वे बदलते समय के साथ अपनी कार्यप्रणाली में भी बदलाव लाएं और वित्तीय क्षेत्र में अपनी भूमिका को और मजबूत करें।

पांच साल के अनुभव का दिया हवाला

केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने अपने कार्यकाल के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भी सरकार और सहकारी क्षेत्र ने विश्वास के साथ आगे बढ़कर कोई कदम उठाया, RBI ने सक्रिय रूप से सहयोग किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्रीय बैंक की ओर से शहरी सहकारी बैंकों के लिए कई कदम उठाए गए हैं।

शाह के मुताबिक, RBI ने इस क्षेत्र को केवल नियामकीय दृष्टि से नहीं देखा, बल्कि कई मौकों पर UCBs की आवश्यकताओं को समझते हुए राहत और सहयोग भी प्रदान किया है। उन्होंने शहरी सहकारी बैंकों से भी इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की अपील की।

छोटे कर्जदारों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र

अमित शाह ने शहरी सहकारी बैंकों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि छोटे उधारकर्ताओं के लिए धन की सुरक्षा के लिहाज से सहकारी बैंकिंग क्षेत्र का महत्व बहुत अधिक है। उन्होंने कहा कि देश के बड़े वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ छोटे ग्राहकों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने में UCBs की अहम भूमिका है।

शहरी सहकारी बैंक स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबारियों, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और अन्य छोटे कर्जदारों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र की वित्तीय मजबूती और भरोसे को बनाए रखना जरूरी है।

1,400 से अधिक UCBs के प्रतिनिधियों से संवाद

कार्यक्रम में देशभर के 1,400 से अधिक शहरी सहकारी बैंकों के अधिकारी और अन्य हितधारक शामिल हुए। शाह ने इस मौके पर सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की।

उन्होंने UCBs से तकनीक को तेजी से अपनाने और अपने कामकाज में आधुनिक प्रणालियों को शामिल करने की जरूरत पर भी जोर दिया। डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ ग्राहकों की अपेक्षाएं बदल रही हैं। ऐसे में शहरी सहकारी बैंकों के लिए तकनीकी रूप से मजबूत होना जरूरी है।

NUCFDC की भूमिका महत्वपूर्ण

NUCFDC के नए कार्यालय भवन का उद्घाटन भी इस कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहा। राष्ट्रीय स्तर पर शहरी सहकारी बैंकों को मजबूत करने के उद्देश्य से NUCFDC की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

शहरी सहकारी बैंकों के लिए साझा मंच और वित्तीय सहायता तंत्र विकसित करने से छोटे बैंकों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही बेहतर तकनीकी व्यवस्था, जोखिम प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने में भी ऐसी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

सहकारी क्षेत्र को आधुनिक बनाने की कोशिश

केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से सहकारी क्षेत्र को आधुनिक और मजबूत बनाने पर जोर दे रही है। सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद सहकारी संस्थाओं के कामकाज में तकनीक, पारदर्शिता और पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में कई पहल की गई हैं।

अमित शाह ने अपने संबोधन में भी सहकारी क्षेत्र को बदलती अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि UCBs को केवल परंपरागत बैंकिंग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नए वित्तीय अवसरों और तकनीकी बदलावों का लाभ उठाना चाहिए।

भरोसे और सहयोग से आगे बढ़ने का संदेश

शाह के संबोधन का मुख्य संदेश RBI और UCBs के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने का रहा। उन्होंने दोनों पक्षों से पुरानी धारणाओं से बाहर निकलने और विश्वास के साथ काम करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि नियामक संस्थाओं और सहकारी बैंकों के बीच सहयोग बढ़ने से पूरे क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। इससे न केवल बैंकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि छोटे और मध्यम वर्ग के ग्राहकों को भी बेहतर बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

कार्यक्रम के दौरान शहरी सहकारी बैंक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के लिए यह संदेश भी महत्वपूर्ण रहा कि बदलते वित्तीय माहौल में नियमन और नवाचार के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। आने वाले समय में UCBs की मजबूती, तकनीकी क्षमता और ग्राहकों का भरोसा इस क्षेत्र की सफलता के प्रमुख आधार बन सकते हैं।

Next Story