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Malad के एम. डब्ल्यू. देसाई अस्पताल में मरीज को भर्ती न करने का आरोप

Maharashtra महाराष्ट्र: मुंबई के मलाड स्थित एम. डब्ल्यू. देसाई अस्पताल में एक 33 वर्षीय मरीज के इलाज को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। आरोप है कि जांघ के ऊपरी हिस्से में चोट लगने के बाद अस्पताल पहुंचे मरीज को भर्ती करने की सिफारिश के बावजूद एडमिट नहीं किया गया और उसे दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया गया।
मामले के अनुसार, मलाड ईस्ट के कुरार गांव निवासी यतिन दारकेकर 26 मई की सुबह घर पर गिर गए थे, जिससे उनकी जांघ के ऊपरी हिस्से में गंभीर चोट आई। इसके बाद उनके पिता उन्हें तुरंत एम. डब्ल्यू. देसाई अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका केस पेपर तैयार किया गया और प्रारंभिक जांच की गई।
परिवार का आरोप है कि जांच के बाद डॉक्टर ने मरीज को मेल वार्ड में भर्ती करने की सलाह दी थी। हालांकि, बाद में कथित तौर पर अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। इसके बजाय, उन्हें जोगेश्वरी स्थित ट्रॉमा सेंटर में रेफर करने की बात कही गई।
शिकायत के अनुसार, एक डॉक्टर ने परिवार को यह भी बताया कि अस्पताल में अधिकतर इलाज ट्रेनी डॉक्टरों द्वारा किया जाता है। इसके साथ ही इलाज का अनुमानित खर्च लगभग 30,000 से 40,000 रुपये बताया गया था। इसके बाद कथित रूप से मरीज के परिजनों से ट्रांसफर पेपर्स पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया।
परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर की शुरुआती सिफारिश के बावजूद मरीज को भर्ती नहीं किया गया, जिससे उन्हें मजबूरी में अन्य अस्पताल जाने के लिए कहा गया। इस घटना को लेकर मरीज के पिता ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही और अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया है।
परिवार का कहना है कि इस तरह की स्थिति में समय पर इलाज न मिलने से मरीज की हालत और गंभीर हो सकती थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि जब डॉक्टर ने भर्ती की सलाह दी थी, तो बाद में निर्णय क्यों बदला गया।
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। मरीज के परिजनों ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की है और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों से हस्तक्षेप की अपील की है।
फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे जांच की संभावना जताई जा रही है।
यह घटना एक बार फिर शहरी अस्पतालों में मरीजों के इलाज, रेफरल प्रक्रिया और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े करती है।





