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मुंबई। 21 वर्षीय MBA छात्र से कथित तौर पर 24.64 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। बांगर नगर पुलिस ने एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि आरोपी ने खुद को स्टूडेंट काउंसलर के रूप में पेश किया और छात्र को संस्थान से निकाले जाने तथा उसका अकादमिक करियर बर्बाद होने का डर दिखाया। इसके बाद कथित समस्या को सुलझाने के नाम पर उससे अलग-अलग मौकों पर लाखों रुपये ऐंठ लिए गए। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक पीड़ित छात्र की उम्र 21 वर्ष है और वह MBA की पढ़ाई कर रहा है। आरोपी ने कथित रूप से छात्र की पढ़ाई और भविष्य को ही दबाव बनाने का हथियार बनाया। छात्र को भरोसा दिलाया गया कि आरोपी उसकी शैक्षणिक समस्याओं को हल करा सकता है।
आरोप है कि खुद को स्टूडेंट काउंसलर बताने वाले व्यक्ति ने पहले छात्र के मन में डर पैदा किया। उसने कथित तौर पर कहा कि परिस्थितियां गंभीर हैं और छात्र को संस्थान से बाहर किया जा सकता है। इसके साथ ही उसके अकादमिक करियर पर भी असर पड़ने की बात कही गई।
छात्र के लिए MBA की पढ़ाई और भविष्य का करियर महत्वपूर्ण था। ऐसे में संस्थान से निकाले जाने की आशंका ने उसे परेशान कर दिया। शिकायत के अनुसार इसी डर का फायदा उठाकर आरोपी ने मामले को संभालने और समस्या का समाधान कराने का भरोसा दिया।
आरोप है कि इसके बाद छात्र से पैसे मांगे जाने लगे। रकम कथित समस्या को सुलझाने और छात्र के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने के नाम पर ली गई। इस तरह छात्र से कुल 24.64 लाख रुपये लिए जाने का आरोप है।
इतनी बड़ी रकम दिए जाने के बाद जब छात्र को कथित धोखाधड़ी का अहसास हुआ तो मामला पुलिस तक पहुंचा। शिकायत के आधार पर बांगर नगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अब पूरे घटनाक्रम और पैसों के लेनदेन की जांच की जा रही है।
जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी वास्तव में संबंधित संस्थान से किसी रूप में जुड़ा था या उसने केवल खुद को स्टूडेंट काउंसलर बताकर छात्र का भरोसा हासिल किया। यदि वह संस्थान से जुड़ा नहीं था तो यह भी देखा जाएगा कि उसे छात्र और उसकी पढ़ाई से संबंधित जानकारी कैसे मिली।
पुलिस के लिए रकम के लेनदेन का रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है। छात्र ने पैसे बैंक ट्रांसफर, ऑनलाइन भुगतान, नकद या किसी अन्य माध्यम से दिए थे, इसकी जानकारी जांच में अहम होगी। डिजिटल भुगतान हुआ होगा तो संबंधित खातों और लेनदेन की कड़ियां खंगाली जा सकती हैं।
यह भी पता लगाया जाएगा कि 24.64 लाख रुपये की पूरी रकम एक साथ ली गई या अलग-अलग किस्तों में मांगी गई थी। आमतौर पर इस तरह की कथित ठगी में पीड़ित को लगातार किसी नए खतरे या समस्या का डर दिखाकर बार-बार पैसे देने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
आरोपी ने छात्र को वास्तव में क्या बताया, किस तरह की धमकी दी और रकम मांगने के लिए क्या कारण बताए, इन सभी तथ्यों को शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांचा जाएगा।
मामले का सबसे गंभीर पहलू छात्र के भविष्य को लेकर डर पैदा करने का आरोप है। किसी युवा को यह कहना कि उसकी पढ़ाई समाप्त हो सकती है या उसे संस्थान से निकाल दिया जाएगा, उस पर बड़ा मानसिक दबाव बना सकता है। यदि सामने वाला व्यक्ति खुद को संस्थान से जुड़ा या प्रभावशाली बताता है तो छात्र के लिए उसके दावों की सत्यता पर तत्काल सवाल उठाना मुश्किल हो सकता है।
इसी कथित मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा उठाकर लाखों रुपये वसूले जाने का आरोप लगाया गया है। छात्र को कथित तौर पर यह विश्वास दिलाया गया कि पैसे देने पर समस्या खत्म हो जाएगी और उसके अकादमिक करियर को नुकसान नहीं होगा।
अब पुलिस यह भी जांच सकती है कि आरोपी ने छात्र से किस माध्यम से संपर्क किया था। फोन कॉल, मैसेज, ईमेल या व्यक्तिगत मुलाकात से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध होने की स्थिति में उन्हें जांच में शामिल किया जा सकता है।
यदि आरोपी ने डिजिटल माध्यम से छात्र को संदेश भेजे या रकम मांगी थी तो ऐसे रिकॉर्ड मामले में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसी तरह कॉल रिकॉर्ड और बैंकिंग जानकारी से घटनाक्रम की समयरेखा समझने में मदद मिल सकती है।
पुलिस के सामने एक सवाल यह भी हो सकता है कि आरोपी ने केवल इसी छात्र को निशाना बनाया या इससे पहले भी अन्य विद्यार्थियों से इसी तरह संपर्क किया था। जांच में समान शिकायतें सामने आती हैं तो मामले का दायरा बढ़ सकता है।
शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की मदद के लिए काउंसलर और प्रशासनिक अधिकारी होते हैं। किसी भी व्यक्ति की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई, निष्कासन या अकादमिक करियर खत्म होने का डर दिखाकर निजी तौर पर पैसे मांगे जाने पर विद्यार्थियों को संबंधित संस्थान के अधिकृत अधिकारियों से सीधे पुष्टि करनी चाहिए।
यह मामला छात्रों और अभिभावकों के लिए भी सतर्कता का संदेश देता है। यदि कोई व्यक्ति किसी शैक्षणिक समस्या को ‘मैनेज’ करने के लिए निजी खाते में रकम मांगता है तो उसकी पहचान और अधिकार की पुष्टि करना जरूरी है। संस्थान से जुड़ी आधिकारिक फीस या अन्य भुगतान सामान्य तौर पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही किए जाते हैं।
24.64 लाख रुपये जैसी बड़ी रकम का मामला होने के कारण पुलिस वित्तीय लेनदेन की विस्तार से पड़ताल कर सकती है। रकम किन खातों में गई और उसके बाद उसका इस्तेमाल या ट्रांसफर कहां हुआ, इससे आरोपी तक पहुंचने और पूरे घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल मामला आरोप और जांच के स्तर पर है। पुलिस जांच पूरी होने से पहले आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। आरोपी का पक्ष भी सामने आने पर पूरे मामले की तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।
बांगर नगर पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद अब छात्र के बयान, वित्तीय रिकॉर्ड और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ेगी। सबसे अहम सवाल यही है कि छात्र को किस तरह विश्वास में लिया गया और 24.64 लाख रुपये की इतनी बड़ी रकम कथित तौर पर कैसे वसूली गई।
मामले की आगे की जांच से यह भी स्पष्ट होगा कि आरोपी का शैक्षणिक संस्थान से कोई वास्तविक संबंध था या उसने फर्जी पहचान और डर का सहारा लेकर छात्र को अपने जाल में फंसाया। फिलहाल MBA छात्र से लाखों रुपये की कथित ठगी का यह मामला चर्चा में है।





