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Maharashtra महाराष्ट्र। नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने नवी मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के इंतजार में लटके उद्घाटन को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एमएनएस के पदाधिकारी स्वप्निल महिंद्रकर ने कहा कि यह प्रतिमा लंबे समय से उद्घाटन की प्रतीक्षा कर रही थी, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण इसे उचित सम्मान नहीं मिल पा रहा था। महिंद्रकर ने बताया कि नवी मुंबई में स्थापित की गई इस प्रतिमा का उद्घाटन बार-बार टल रहा था, जिससे स्थानीय नागरिकों और शिव प्रेमियों में नाराजगी बढ़ रही थी। उन्होंने कहा कि एमएनएस नेता अमित ठाकरे ने इसी विरोध को जताने के लिए प्रतिमा पर ‘दूध अभिषेक’ कर एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन सरकार की नीतियों और देरी पर आपत्ति जताने के उद्देश्य से किया गया था।
उन्होंने कहा, “आपने देखा होगा कि महाराष्ट्र की पूजनीय शक्ति, छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा लंबे समय से उद्घाटन का इंतजार कर रही थी। हमारे नेता अमित ठाकरे ने प्रतीकात्मक रूप से ‘दूध अभिषेक’ कर इसका विरोध किया। इस प्रदर्शन के बाद ही मंत्री ने आज इसका उद्घाटन किया। सरकार को यह कदम पहले ही उठा लेना चाहिए था। एमएनएस का कहना है कि शिवाजी महाराज की विरासत का सम्मान केवल भाषणों से नहीं, बल्कि समयबद्ध कार्यवाही से साबित होता है। स्वप्निल महिंद्रकर ने कहा कि प्रतिमा जैसे कार्यों को लेकर सरकार की सुस्ती अस्वीकार्य है, क्योंकि यह मुद्दा आम जनता की भावना से जुड़ा हुआ है।
अमित ठाकरे के विरोध के बाद स्थानीय स्तर पर हलचल तेज हो गई और संबंधित मंत्री ने जल्दबाजी में उद्घाटन का कार्यक्रम संपन्न कराया। एमएनएस ने इसे अपनी जीत बताया और कहा कि यह विरोध जनता की भावनाओं की आवाज बनकर सामने आया था। एमएनएस नेताओं का आरोप है कि महाराष्ट्र सरकार अक्सर ऐसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के प्रोजेक्ट्स में देरी करती है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती है। पार्टी ने यह भी कहा कि प्रतिमा के सम्मान और उद्घाटन में देरी किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है, खासकर तब जब वह राज्य के गौरव का प्रतीक हो।
स्थानीय नागरिकों और एमएनएस कार्यकर्ताओं का कहना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का उद्घाटन एक समारोह की तरह होना चाहिए था, लेकिन सरकार की ओर से लगातार तारीखों में बदलाव से लोगों को निराशा हुई। एमएनएस ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी शिवाजी महाराज की विरासत से जुड़े मुद्दों पर आगे भी सक्रिय रहेगी। उधर, सरकार की ओर से अभी इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि बढ़ते राजनीतिक दबाव को देखते हुए उद्घाटन कार्यक्रम को अंतिम रूप देना पड़ा।
इस घटनाक्रम ने नवी मुंबई की स्थानीय राजनीति में फिर से शिवाजी महाराज के सम्मान का मुद्दा केंद्र में ला दिया है और एमएनएस इसे अपने मजबूत राजनीतिक आधार के रूप में पेश कर रही है।
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