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पुणे में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त, 10 अक्टूबर तक 43 ब्लैक स्पॉट सुधारने के निर्देश

पुणे। महाराष्ट्र के पुणे जिले में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। जिला कलेक्टर जितेंद्र डूडी ने संबंधित विभागों और एजेंसियों को सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए सख्त समय-सीमा तय करते हुए निर्धारित अवधि में सभी जरूरी सुधार पूरे करने को कहा है।
प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के तहत जिले में चिह्नित किए गए 43 दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों यानी ब्लैक स्पॉट का आगामी 10 अक्टूबर तक निरीक्षण कर आवश्यक सुधार करने होंगे। इसके अलावा जिले की सभी सड़कों को 31 अगस्त तक गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दुर्घटना की आशंका वाले जंक्शनों को भी अगले छह महीने के भीतर सुरक्षित और बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
43 ब्लैक स्पॉट की होगी जांच
जिला प्रशासन ने सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील 43 स्थानों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया है। इन स्थानों पर दुर्घटनाओं की संभावनाओं को कम करने के लिए विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा।
कलेक्टर जितेंद्र डूडी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन सभी ब्लैक स्पॉट का मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाए। निरीक्षण के दौरान सड़क की स्थिति, यातायात संकेतक, रोशनी, डिवाइडर, मोड़, फुटपाथ, वाहन गति और अन्य सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जाएगी।
निरीक्षण के बाद जहां जिस तरह के सुधार की जरूरत होगी, वहां उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य केवल दुर्घटना-प्रवण स्थानों की पहचान तक सीमित नहीं रहना, बल्कि वहां व्यावहारिक सुरक्षा उपाय लागू करना है।
31 अगस्त तक सड़कें होंगी गड्ढामुक्त
बारिश के मौसम में सड़कों पर गड्ढे होने की समस्या बढ़ जाती है। इससे वाहन चालकों को परेशानी के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी संबंधित एजेंसियों को 31 अगस्त तक जिले की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का निर्देश दिया है।
अधिकारियों को सड़कों की स्थिति का निरीक्षण कर गड्ढों की पहचान करने और उनकी तत्काल मरम्मत कराने को कहा गया है। प्रशासन की कोशिश है कि सड़क पर गड्ढों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके और वाहन चालकों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराया जाए।
गड्ढामुक्त सड़क अभियान में स्थानीय निकायों के साथ-साथ सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़ी एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। प्रशासन ने निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा करने पर जोर दिया है।
खतरनाक जंक्शनों को छह महीने में सुधारने का लक्ष्य
प्रशासन ने जिले के उन जंक्शनों पर भी विशेष ध्यान देने का फैसला किया है, जहां दुर्घटनाओं की आशंका अधिक रहती है। ऐसे जंक्शनों को अगले छह महीने के भीतर बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
जंक्शनों पर यातायात का दबाव, वाहनों की गति, सड़क की चौड़ाई, दृश्यता और यातायात संकेतकों की स्थिति दुर्घटनाओं को प्रभावित करती है। इसलिए ऐसे स्थानों पर आवश्यकतानुसार ट्रैफिक सिग्नल, संकेतक, रोड मार्किंग, स्ट्रीट लाइट और अन्य सुरक्षा उपायों में सुधार किया जा सकता है।
प्रशासन का उद्देश्य जंक्शनों पर यातायात को अधिक व्यवस्थित करना और वाहन चालकों तथा पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना है।
हाईवे से अतिक्रमण हटाने के निर्देश
राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख राजमार्गों के किनारे किए गए अतिक्रमण को लेकर भी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। संबंधित एजेंसियों को ऐसे अतिक्रमण 15 दिनों के भीतर हटाने का निर्देश दिया गया है।
राजमार्गों के किनारे अवैध पार्किंग, अस्थायी दुकानें और अन्य प्रकार के अतिक्रमण कई बार यातायात की रफ्तार और दृश्यता को प्रभावित करते हैं। इससे जाम की स्थिति बनने के साथ दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ सकता है।
प्रशासन के अनुसार, सड़क की निर्धारित चौड़ाई और यातायात व्यवस्था को बनाए रखने के लिए राजमार्गों से अतिक्रमण हटाना जरूरी है। इस कार्रवाई के दौरान संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है।
दुर्घटनाओं पर रोक लगाने की कोशिश
पुणे जिले में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, वाहनों की संख्या और यातायात दबाव के कारण सड़क सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। शहर के साथ-साथ ग्रामीण और औद्योगिक क्षेत्रों में भी सड़क दुर्घटनाओं को कम करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
इसी को देखते हुए प्रशासन ने अलग-अलग समस्याओं के लिए अलग-अलग समय-सीमा तय की है। ब्लैक स्पॉट का निरीक्षण और सुधार, सड़कों को गड्ढामुक्त करना, खतरनाक जंक्शनों को बेहतर बनाना और हाईवे से अतिक्रमण हटाना इसी व्यापक योजना का हिस्सा है।
अधिकारियों की जवाबदेही तय
कलेक्टर जितेंद्र डूडी ने अधिकारियों को केवल निर्देश जारी करने के बजाय काम की प्रगति पर नजर रखने की जरूरत पर भी जोर दिया है। निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी।
प्रशासन का मानना है कि सड़क सुरक्षा से जुड़े कामों में देरी का सीधा असर लोगों की जान-माल की सुरक्षा पर पड़ सकता है। इसलिए सभी एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और तय समय में लक्ष्य पूरा करने को कहा गया है।
समय-सीमा के साथ कार्रवाई पर जोर
जिला प्रशासन की योजना में सबसे पहले सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य है, जिसके लिए 31 अगस्त की समय-सीमा तय की गई है। राजमार्गों के किनारे अतिक्रमण हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। वहीं 43 ब्लैक स्पॉट का निरीक्षण और सुधार 10 अक्टूबर तक पूरा करने को कहा गया है। दुर्घटना की आशंका वाले जंक्शनों को छह महीने के भीतर बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रशासन के इन निर्देशों से स्पष्ट है कि पुणे जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर अब केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय दुर्घटनाओं की रोकथाम पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
यदि तय समय-सीमा में ये काम पूरे होते हैं तो जिले में सड़क की गुणवत्ता, यातायात प्रबंधन और दुर्घटना-प्रवण स्थानों की सुरक्षा में सुधार आने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में प्रशासन की निगरानी और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई यह तय करेगी कि निर्धारित लक्ष्यों को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकता है।





