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कुछ सेकंड की देरी पड़ी भारी, NDA-CDS परीक्षा केंद्र में नहीं मिला प्रवेश

नासिक। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की राष्ट्रीय रक्षा अकादमी एवं नौसेना अकादमी परीक्षा (NDA-NA) और संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (CDS) के दौरान रविवार, 13 सितंबर को नासिक स्थित एक परीक्षा केंद्र के बाहर अफरातफरी मच गई। आरोप है कि निर्धारित रिपोर्टिंग समय से कुछ सेकंड देरी से पहुंचने वाले कई अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया। इसके बाद नाराज उम्मीदवारों और उनके अभिभावकों ने केंद्र के बाहर हंगामा करते हुए नियम लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए।
जानकारी के मुताबिक रविवार को नासिक के संबंधित केंद्र पर NDA और CDS की परीक्षा आयोजित की जा रही थी। परीक्षा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सुबह से ही केंद्र पहुंचने लगे थे। निर्धारित रिपोर्टिंग समय समाप्त होते ही परीक्षा केंद्र का प्रवेश द्वार बंद कर दिया गया। इसी दौरान कुछ अभ्यर्थी केंद्र पर पहुंचे, लेकिन कथित रूप से कुछ सेकंड की देरी के कारण उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
परीक्षा में बैठने से वंचित हुए उम्मीदवारों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों से प्रवेश देने की गुहार लगाई। उम्मीदवारों का कहना था कि उन्होंने परीक्षा केंद्र तक समय पर पहुंचने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन रास्ते में लगे ट्रैफिक जाम, खराब सड़कों और केंद्र तक पहुंचने में आई दूसरी परेशानियों की वजह से कुछ सेकंड की देरी हो गई। इसके बावजूद केंद्र प्रबंधन ने उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी।
कुछ छात्रों ने दावा किया कि वे निर्धारित समय के तुरंत बाद ही मुख्य द्वार पर पहुंच गए थे। उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारियों से अपनी स्थिति बताते हुए प्रवेश देने का अनुरोध किया, लेकिन परीक्षा से जुड़े नियमों का हवाला देकर उन्हें रोक दिया गया। इसके बाद केंद्र के बाहर छात्रों और उनके साथ आए माता-पिता की भीड़ जमा हो गई। नाराज अभ्यर्थियों और अभिभावकों ने फैसले का विरोध किया।
उम्मीदवारों का कहना था कि महज कुछ सेकंड की देरी के कारण उन्हें महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा से वंचित करना उचित नहीं है। कई अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा के लिए लंबे समय से तैयारी करने की बात कही। परीक्षा में प्रवेश नहीं मिलने से उनकी मेहनत और परीक्षा से जुड़ी तैयारियों पर पानी फिर गया। कुछ अभ्यर्थियों ने अधिकारियों से मानवीय आधार पर विचार करने की मांग भी की, लेकिन कथित रूप से उन्हें राहत नहीं मिल सकी।
घटना के बाद परीक्षा केंद्र के बाहर काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। माता-पिता ने भी केंद्र प्रबंधन के सामने नाराजगी जाहिर की। अभिभावकों का कहना था कि रास्ते में कई ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं, जिन पर विद्यार्थियों का नियंत्रण नहीं होता। यदि कोई उम्मीदवार बहुत अधिक देरी से पहुंचता है तो उसे रोकना समझ में आता है, लेकिन कुछ सेकंड की देरी के कारण परीक्षा में शामिल होने से रोकना छात्रों के भविष्य के साथ कठोरता है।
वहीं परीक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों के अनुसार प्रवेश बंद होने का निर्धारित समय सभी अभ्यर्थियों के लिए समान रूप से लागू किया जाता है। परीक्षा शुरू होने से पहले उम्मीदवारों की पहचान, प्रवेश पत्र की जांच और सुरक्षा संबंधी अन्य प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। तय समय के बाद प्रवेश मिलने से इन प्रक्रियाओं तथा परीक्षा की गोपनीयता प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी कारण प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्मीदवारों को समय से काफी पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचने की सलाह दी जाती है।
हालांकि, नासिक में हुई घटना को लेकर अभ्यर्थियों का तर्क था कि नियमों को लागू करते समय वास्तविक परिस्थितियों को भी देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि शहर में यातायात की स्थिति, खराब सड़कें और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की कठिनाई के कारण विलंब हुआ। छात्रों ने दावा किया कि उन्होंने जानबूझकर देरी नहीं की थी और वे केंद्र के द्वार तक पहुंच चुके थे, इसलिए उन्हें एक अवसर दिया जाना चाहिए था।
NDA और CDS देश की प्रमुख रक्षा सेवा प्रवेश परीक्षाओं में शामिल हैं। इन परीक्षाओं के माध्यम से उम्मीदवारों को सशस्त्र बलों से जुड़े प्रतिष्ठित संस्थानों और सेवाओं में जाने का अवसर मिलता है। बड़ी संख्या में युवा इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में प्रवेश नहीं मिलने से अभ्यर्थियों को न केवल मानसिक निराशा होती है, बल्कि उन्हें परीक्षा में शामिल होने के लिए अगले अवसर का इंतजार भी करना पड़ सकता है।
परीक्षा केंद्र के बाहर हुए विरोध के दौरान अभ्यर्थियों ने व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि परीक्षा केंद्र तक पहुंचने वाले मार्ग और शहर की यातायात परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रवेश व्यवस्था में कुछ व्यावहारिक समाधान होना चाहिए। अभिभावकों ने मांग की कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए परीक्षा केंद्रों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए।
फिलहाल इस घटना पर UPSC अथवा परीक्षा केंद्र प्रबंधन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि कितने अभ्यर्थियों को देर से पहुंचने के कारण परीक्षा में प्रवेश नहीं दिया गया। सामने आए विवरण मुख्य रूप से परीक्षा से वंचित उम्मीदवारों के आरोपों और उनके बयानों पर आधारित हैं।
इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं में रिपोर्टिंग समय और प्रवेश बंद होने की समय-सीमा को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा के लिए निर्धारित नियमों का पालन जरूरी माना जाता है, वहीं अभ्यर्थी कुछ सेकंड की देरी जैसी परिस्थितियों में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की मांग कर रहे हैं।





