महाराष्ट्र

आजादी के पहले जश्न से पहले ब्रिटिश अफसर ने दिए थे खास निर्देश

Ratna Netam
14 Aug 2026 10:00 PM IST
आजादी के पहले जश्न से पहले ब्रिटिश अफसर ने दिए थे खास निर्देश
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मुंबई। भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। इस बीच महाराष्ट्र लोक भवन में सुरक्षित ऐतिहासिक अभिलेखों से देश के पहले स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों की दिलचस्प जानकारी सामने आई है। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि वर्ष 1947 में तत्कालीन बॉम्बे राज्य में राष्ट्रीय ध्वज के लिए खादी का कपड़ा जुटाने, प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को मिठाइयां और बैज बांटने तथा स्वतंत्रता दिवस समारोह में ब्रिटिश साम्राज्य का गान ‘गॉड सेव द किंग’ नहीं बजाने के निर्देश दिए गए थे।
अभिलेखों के अनुसार ये आदेश तत्कालीन बॉम्बे राज्य के मुख्य सचिव सर इवॉन होप टॉन्टन की ओर से जारी किए गए थे। वह नाइटहुड से सम्मानित ब्रिटिश भारतीय सिविल सेवा के अधिकारी थे। सरकारी जनसंपर्क अधिकारी उमेश काशिकर ने महाराष्ट्र लोक भवन में सुरक्षित इन दस्तावेजों का अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक विडंबना है कि भारत की स्वतंत्रता के पहले उत्सव से जुड़े कई प्रशासनिक आदेश एक ब्रिटिश अधिकारी को जारी करने पड़े थे।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि 15 अगस्त 1947 के समारोह की प्रशासनिक तैयारियां लगभग दो सप्ताह पहले शुरू कर दी गई थीं। भारत सरकार ने नए स्वतंत्र डोमिनियन के गठन के अवसर पर 15 और 16 अगस्त को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया था कि समारोह को सुव्यवस्थित ढंग से आयोजित करने के साथ इसमें अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव ने 29 जुलाई 1947 को जिला कलेक्टरों के लिए एक विस्तृत आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि 15 अगस्त को प्राथमिक विद्यालयों के प्रत्येक बच्चे को मिठाई दी जाए। मिठाई पर होने वाले खर्च की अधिकतम सीमा प्रति बच्चा छह आने निर्धारित की गई थी। उस समय एक रुपये में 16 आने होते थे। इसलिए छह आने आज की दशमलव व्यवस्था में रुपये के करीब तीन-आठवें हिस्से के बराबर थे।
आदेश में प्राथमिक विद्यालयों के परिसरों में पौधारोपण कराने का निर्देश भी शामिल था। इसके अलावा विद्यार्थियों को स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में छोटे बैज वितरित करने को कहा गया था। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को स्वतंत्रता के उत्सव से जोड़ना और नई पीढ़ी में नवगठित राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी तथा गर्व की भावना विकसित करना था।
पांच अगस्त को जारी एक अन्य आदेश राष्ट्रीय ध्वज बनाने में इस्तेमाल होने वाले कपड़े से संबंधित था। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि 15 अगस्त को फहराया जाने वाला तिरंगा खद्दर यानी खादी से बनाया जाए। जिला कलेक्टरों को राष्ट्रीय ध्वजों की व्यवस्था के लिए स्थानीय कांग्रेस नेताओं की सहायता लेने की सलाह भी दी गई थी। खादी को स्वतंत्रता आंदोलन, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में विशेष महत्व प्राप्त था।
इसी आदेश में सभी जिलों में स्वतंत्रता दिवस परेड का समय शाम छह बजे निर्धारित किया गया था। इसका उद्देश्य स्थानीय समारोहों को दिल्ली में आयोजित किए जाने वाले केंद्रीय कार्यक्रमों के समय के अनुरूप रखना था। अधिकारियों को परेड और अन्य कार्यक्रमों में अधिक से अधिक नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने को भी कहा गया था।
स्वतंत्रता से केवल चार दिन पहले 11 अगस्त को समारोह में बजाए जाने वाले संगीत के बारे में अलग आदेश जारी हुआ। जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया कि 15 अगस्त के समारोह में ब्रिटिश साम्राज्य का आधिकारिक गान ‘गॉड सेव द किंग’ न तो बजाया जाए और न ही गाया जाए। इसके विपरीत ‘वंदे मातरम्’ गाने अथवा उसकी धुन बजाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई थी।
उस समय भारत के नए राष्ट्रगान को लेकर अंतिम आदेश जारी होना बाकी था। संविधान सभा ने ‘जन गण मन’ को बाद में 24 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया। इसलिए पहले स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संगीत से संबंधित प्रशासनिक निर्देश अलग परिस्थितियों में जारी किए गए थे।
बॉम्बे सरकार ने 15 और 16 अगस्त को अपने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भी सवेतन अवकाश घोषित किया था। अभिलेखों से पता चलता है कि प्रशासन स्वतंत्रता के उत्सव में सरकारी कर्मचारियों, बच्चों और आम नागरिकों को समान रूप से शामिल करना चाहता था।
उमेश काशिकर के अनुसार ये दस्तावेज बताते हैं कि बॉम्बे में पहले स्वतंत्रता दिवस को योजनाबद्ध तरीके से मनाने की तैयारी की गई थी। इनमें उस देश की भावना दिखाई देती है जो औपनिवेशिक शासन को पीछे छोड़कर एक नए युग में प्रवेश कर रहा था। बॉम्बे के अंतिम ब्रिटिश गवर्नर सर जॉन कोलविल स्वतंत्रता के बाद भी कुछ समय पद पर बने रहे। उन्होंने छह जनवरी 1948 को पद छोड़ा, जिसके बाद राजा महाराज सिंह बॉम्बे के पहले भारतीय गवर्नर बने।
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