महाराष्ट्र

88 पासबुक, 143 चेकबुक और करीब 900 एटीएम कार्ड बरामद, साइबर नेटवर्क का खुलासा

Kavita2
12 Sept 2026 10:33 AM IST
88 पासबुक, 143 चेकबुक और करीब 900 एटीएम कार्ड बरामद, साइबर नेटवर्क का खुलासा
x

मुंबई : साइबर अपराध से जुड़े एक कथित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए क्राइम ब्रांच की यूनिट-5 ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, मामला 350 करोड़ रुपये से अधिक के ऐसे लेन-देन से जुड़ा है, जिनका संबंध साइबर धोखाधड़ी से होने का संदेह है। आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद हुए हैं। गिरफ्तारी के बाद तीनों को एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 19 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस्लामउद्दीन सलीमउद्दीन शेख, उम्र 44 वर्ष, यासिर नासिरउद्दीन शेख, उम्र 26 वर्ष, और अब्दुल रज्जाक अब्दुल रऊफ, उम्र 42 वर्ष, के रूप में हुई है। पुलिस का आरोप है कि तीनों बैंक खातों और मोबाइल सिम कार्ड के जरिए साइबर ठगी से प्राप्त रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने वाले नेटवर्क से जुड़े थे। फिलहाल इन आरोपों की जांच जारी है और मामले में उनकी अलग-अलग भूमिकाओं का निर्धारण होना बाकी है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी अपने नाम के अलावा दूसरे लोगों के नाम पर भी कई बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों से बड़ी संख्या में मोबाइल सिम कार्ड जुड़े हुए थे। ऑनलाइन धोखाधड़ी से हासिल रकम कथित तौर पर पहले इन बैंक खातों में जमा होती थी। इसके बाद पैसा दूसरे खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता था। इस तरह कई खातों से होकर गुजरने वाली रकम का स्रोत और उसके अंतिम प्राप्तकर्ता इस मामले के अहम पहलू बन गए हैं।

क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के पास से 88 पासबुक, 143 चेकबुक और लगभग 900 एटीएम कार्ड जब्त किए हैं। इसके अलावा 24 मोबाइल फोन, 167 सिम कार्ड और दो लैपटॉप भी बरामद हुए हैं। इतनी बड़ी संख्या में बैंकिंग सामग्री मिलने से कथित नेटवर्क में कई खातों के इस्तेमाल की तस्वीर सामने आई है। हालांकि, बरामद प्रत्येक कार्ड या दस्तावेज का अपराध से संबंध अलग-अलग प्रमाणित करना होगा। केवल सामग्री की संख्या के आधार पर सभी खातों को धोखाधड़ी में इस्तेमाल हुआ मान लेना उचित नहीं होगा।

इस मामले में 350 करोड़ रुपये से अधिक का आंकड़ा विशेष ध्यान खींच रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह कथित साइबर फ्रॉड से जुड़े लेन-देन की रकम है। इसे सीधे पीड़ितों से ठगी गई कुल राशि या बरामद धन के रूप में नहीं देखा जा सकता। एक ही रकम कई खातों में स्थानांतरित होने पर लेन-देन का कुल मूल्य बढ़ सकता है। वास्तविक आर्थिक नुकसान, रकम की आवाजाही और संबंधित शिकायतों का मिलान होने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

बरामद पासबुक और चेकबुक से संबंधित बैंक खातों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। वहीं एटीएम कार्ड यह समझने के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं कि खातों तक पहुंच किन लोगों के पास थी। मोबाइल फोन, सिम कार्ड और लैपटॉप में मौजूद रिकॉर्ड भी खातों तथा उनके उपयोगकर्ताओं के बीच संबंध स्पष्ट करने में उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, इन उपकरणों से क्या जानकारी मिली है, इसका विवरण अभी सामने नहीं आया है। किसी डिजिटल सामग्री को निर्णायक साक्ष्य बताने से पहले उसकी जांच आवश्यक है।

दूसरे लोगों के नाम पर खाते खुलवाने का आरोप मामले को और गंभीर बनाता है। इससे सवाल उठता है कि संबंधित खाताधारकों को अपने खातों के इस्तेमाल की जानकारी थी या नहीं। क्या उन्होंने किसी को बैंकिंग सामग्री सौंपी थी, अथवा उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग हुआ था, यह स्पष्ट होना जरूरी है। इन संभावनाओं में बड़ा अंतर है और प्रत्येक खाताधारक की भूमिका उसके ज्ञान, सहमति तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जा सकती है।

आरोपियों को 19 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजे जाने के बाद पूछताछ और बरामद सामग्री के सत्यापन के लिए समय मिला है। हालांकि, हिरासत का आदेश दोषसिद्धि नहीं है। मामले में अभियोजन को आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। अभी यह जानकारी सार्वजनिक नहीं है कि कथित नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था, कितने लोगों को नुकसान पहुंचा या रकम किन अंतिम खातों तक पहुंची। इन बिंदुओं पर निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलेगा।

यह प्रकरण बैंक खातों और उनसे जुड़ी मोबाइल पहचान के दुरुपयोग की गंभीरता भी सामने लाता है। किसी खाते में रकम आने और आगे भेजे जाने के बीच उसकी वास्तविक वजह समझना जरूरी होता है। सामान्य बैंकिंग लेन-देन और अपराध से जुड़ी रकम में अंतर संबंधित रिकॉर्ड तथा साक्ष्यों से स्थापित किया जाता है। इस मामले में भी खातों की संख्या से आगे बढ़कर प्रत्येक संदिग्ध लेन-देन का संबंध कथित धोखाधड़ी से जोड़ना अहम होगा।

फिलहाल तीन गिरफ्तारियां और बड़ी मात्रा में बैंकिंग व डिजिटल सामग्री की बरामदगी इस मामले के प्रमुख तथ्य हैं। कथित नेटवर्क का वास्तविक विस्तार, रकम का स्रोत और अन्य व्यक्तियों की भूमिका अभी स्पष्ट होना बाकी है। आगे सामने आने वाले प्रमाण बताएंगे कि बैंक खातों तथा सिम कार्ड का इस्तेमाल किस स्तर पर हुआ और गिरफ्तार आरोपियों की जिम्मेदारी कितनी थी।

Next Story