महाराष्ट्र

परभणी के 117 बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए 8 करोड़ मंजूर

Kavita2
3 Aug 2026 5:07 PM IST
परभणी के 117 बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए 8 करोड़ मंजूर
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परभणी (महाराष्ट्र)। परभणी जिले में गोदावरी और अन्य नदियों के किनारे बसे 117 गांवों को बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। लगातार बाढ़ की समस्या से जूझ रहे इन गांवों के सर्वे और भविष्य में सुरक्षा उपायों की योजना तैयार करने के लिए राहत एवं पुनर्वास विभाग ने 8 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है।

यह पहल विधायक राजेश विटेकर के अनुरोध के बाद की गई है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित गांवों की स्थिति को देखते हुए राहत और पुनर्वास विभाग से विशेष सर्वे कराने के लिए वित्तीय सहायता की मांग की थी। विभाग की मंजूरी के बाद अब इन गांवों में बाढ़ के जोखिम का आकलन किया जाएगा और स्थायी समाधान की दिशा में काम शुरू हो सकेगा।

हर साल बाढ़ की समस्या से जूझते हैं गांव

परभणी जिले में गोदावरी सहित कई नदियों के किनारे बसे गांव हर साल मानसून के दौरान बाढ़ के खतरे का सामना करते हैं। भारी बारिश के समय नदियों का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे रहने वाले लोगों के घरों, खेतों और पशुधन को नुकसान पहुंचता है।

बाढ़ के कारण ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ता है और राहत शिविरों का सहारा लेना पड़ता है।

स्थानीय लोगों की लंबे समय से मांग रही है कि बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि हर साल होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

पिछले साल बाढ़ से हुआ था भारी नुकसान

विधायक राजेश विटेकर ने बताया कि पिछले वर्ष गंगाखेड़ तहसील में गोदावरी नदी के किनारे बसे गांवों के अलावा पथरी विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में भी बाढ़ जैसे हालात बने थे।

जुलाई से सितंबर 2025 के बीच हुई भारी बारिश और बाढ़ के कारण जिले के नदी किनारे बसे गांवों में जान-माल का काफी नुकसान हुआ था। कई क्षेत्रों में खेतों में पानी भर गया था, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

उन्होंने कहा कि बार-बार आने वाली बाढ़ से ग्रामीणों की सुरक्षा और आजीविका दोनों प्रभावित होती हैं। इसलिए भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक तरीके से योजना बनाना जरूरी है।

सर्वे के बाद तैयार होगी सुरक्षा योजना

राहत एवं पुनर्वास विभाग द्वारा जारी किए गए 8 करोड़ रुपये का उपयोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के सर्वे और आवश्यक योजनाओं की तैयारी में किया जाएगा।

सर्वे के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि कौन-कौन से गांव सबसे ज्यादा जोखिम वाले हैं और वहां किस तरह के सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है। इसके आधार पर बाढ़ नियंत्रण, तट संरक्षण और पुनर्वास से जुड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

अधिकारियों का मानना है कि सही आकलन के बाद तैयार की गई योजना से भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

ग्रामीणों को मिलेगी राहत की उम्मीद

इस मंजूरी के बाद बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों में राहत की उम्मीद जगी है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ आने के बाद उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में स्थायी समाधान की दिशा में उठाया गया यह कदम महत्वपूर्ण है।

लोगों को उम्मीद है कि सर्वे के बाद जल्द ही सुरक्षा कार्य शुरू किए जाएंगे, जिससे नदी किनारे बसे गांवों को बाढ़ के खतरे से बचाया जा सकेगा।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रयास

बाढ़ की समस्या को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विधायक राजेश विटेकर ने इस मुद्दे को उठाते हुए राहत और पुनर्वास विभाग से सहायता की मांग की थी।

उनका कहना है कि केवल राहत कार्यों से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि बाढ़ के कारणों और प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर दीर्घकालिक उपाय करने होंगे।

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

परभणी के कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर है। बाढ़ के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है।

यदि बाढ़ नियंत्रण के प्रभावी उपाय किए जाते हैं तो किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। खेतों और घरों को नुकसान से बचाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

आगे की कार्रवाई पर नजर

अब 8 करोड़ रुपये की मंजूरी के बाद संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। सर्वे को समय पर पूरा कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए प्रभावी योजना तैयार करना अगला महत्वपूर्ण कदम होगा।

परभणी के 117 गांवों को बाढ़ के खतरे से बचाने की यह पहल लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया तो आने वाले वर्षों में मानसून के दौरान होने वाले नुकसान को काफी कम किया जा सकता है।

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