महाराष्ट्र

अमरावती NICU आग में 3 नवजातों की मौत, फायर ऑडिट पर डीएम का स्पष्टीकरण

Kavita2
24 Aug 2026 3:27 PM IST
अमरावती NICU आग में 3 नवजातों की मौत, फायर ऑडिट पर डीएम का स्पष्टीकरण
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अमरावती। महाराष्ट्र के अमरावती जिला महिला अस्पताल के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में लगी भीषण आग के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और फायर ऑडिट को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हादसे में करीब तीन नवजात शिशुओं की मौत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस बीच अमरावती के जिला मजिस्ट्रेट आशीष येरेकर ने सोमवार को स्पष्ट किया कि अस्पताल में नियमित रूप से फायर ऑडिट कराया जाता था और यह कहना सही नहीं है कि अस्पताल का फायर ऑडिट नहीं हुआ था।

जिला प्रशासन ने घटना को गंभीरता से लेते हुए आग लगने के कारणों और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू कर दी है। डीएम ने भरोसा दिलाया कि जांच में यदि किसी की लापरवाही या चूक सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

फायर ऑडिट नहीं होने के दावे को डीएम ने नकारा




पत्रकारों से बातचीत के दौरान आशीष येरेकर ने उन दावों को खारिज किया कि अस्पताल में फायर ऑडिट नहीं कराया गया था। उन्होंने कहा कि पिछले साल अस्पताल का फायर ऑडिट किया गया था। वहीं, इस साल के फायर ऑडिट के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) की इलेक्ट्रिकल विंग के पास आवेदन भी किया गया था।

डीएम ने कहा कि उन्होंने खुद संबंधित दस्तावेज देखे हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि अस्पताल में फायर ऑडिट नहीं हुआ था। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि अस्पताल में अग्नि सुरक्षा से जुड़े सभी इंतजाम निर्धारित मानकों के अनुरूप थे या नहीं।

जांच के बाद सामने आएगी लापरवाही की तस्वीर

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि NICU जैसे संवेदनशील वार्ड में आग आखिर किन परिस्थितियों में लगी और आग लगने के बाद सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी रही। नवजात शिशुओं की मौजूदगी वाले इस यूनिट में आग की घटना ने अस्पताल की तैयारियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

डीएम ने कहा कि घटना की जांच चल रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है या किसी चूक के लिए जिम्मेदार साबित होता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।

नवजातों की मौत से सदमे में परिवार

अस्पताल के NICU में आग लगने की घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। नवजात शिशुओं की मौत के बाद उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिन परिवारों के बच्चे अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती थे, उनके बीच भी घटना के बाद चिंता और भय का माहौल है।

NICU में भर्ती बच्चों को विशेष निगरानी और उपचार की आवश्यकता होती है। ऐसे में आग जैसी आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। यही कारण है कि इस घटना के बाद अस्पताल के फायर सेफ्टी सिस्टम की कार्यक्षमता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

दस्तावेजों की भी जांच

प्रशासन की जांच में अस्पताल के फायर ऑडिट से संबंधित दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। डीएम के अनुसार, पिछले साल के फायर ऑडिट से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं और इस वर्ष के ऑडिट के लिए भी आवेदन किया गया था।

अब जांच में यह देखा जा सकता है कि पिछले ऑडिट में क्या कमियां बताई गई थीं और क्या उन कमियों को दूर किया गया था। साथ ही, इस बात की भी जांच जरूरी होगी कि अस्पताल में आग बुझाने के उपकरण, अलार्म सिस्टम, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और बिजली से जुड़े सुरक्षा इंतजाम किस स्थिति में थे।

PWD इलेक्ट्रिकल विंग से भी जुड़ा मामला

डीएम ने बताया कि इस वर्ष के फायर ऑडिट के लिए PWD की इलेक्ट्रिकल विंग के पास आवेदन किया गया था। इससे यह संकेत मिलता है कि अस्पताल की विद्युत और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जानी है।

अस्पतालों में बिजली की वायरिंग, मेडिकल उपकरणों और लगातार चलने वाले विद्युत उपकरणों के कारण आग का जोखिम बना रहता है। NICU में तो बड़ी संख्या में चिकित्सा उपकरण लगातार संचालित होते हैं। ऐसे में विद्युत सुरक्षा और नियमित निरीक्षण बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

दोषियों पर होगी कार्रवाई

जिला मजिस्ट्रेट ने हादसे के बाद किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि जांच में यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर हादसे के कारणों का पता लगाना और दूसरी ओर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि घटना में किसी स्तर पर मानकों की अनदेखी हुई थी या नहीं।

अस्पतालों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

अमरावती की घटना ने एक बार फिर अस्पतालों में फायर सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर NICU, ICU और अन्य संवेदनशील वार्डों में आग से निपटने की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। यहां भर्ती मरीज खुद से सुरक्षित स्थान तक जाने में सक्षम नहीं होते, इसलिए अस्पताल कर्मचारियों की त्वरित प्रतिक्रिया और आपातकालीन व्यवस्था की भूमिका अहम हो जाती है।

फिलहाल अमरावती जिला महिला अस्पताल में हुई आग की घटना की जांच जारी है। डीएम आशीष येरेकर ने फायर ऑडिट से जुड़े दावों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि पिछले साल ऑडिट कराया गया था और इस साल के ऑडिट के लिए भी आवेदन किया गया था। अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि आग लगने की वास्तविक वजह क्या थी और क्या सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर चूक हुई। प्रशासन ने साफ किया है कि जिम्मेदारी तय होने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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