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Mumbai 3.0 ग्रोथ सेंटर के लिए 216 एकड़ भूमि अधिग्रहण, रायगढ़ में विकास को मिलेगी नई गति

Maharashtra महाराष्ट्र: मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने रायगढ़ जिले में प्रस्तावित मुंबई 3.0 परियोजना के तहत एक बड़ा कदम उठाते हुए 216 एकड़ भूमि सफलतापूर्वक अधिग्रहित कर ली है। यह उपलब्धि पेन-रायगढ़ ग्रोथ सेंटर से जुड़ी उस प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें शेयरहोल्डर एग्रीमेंट साइन होने के बाद परियोजना को लेकर आगे की तैयारियां तेज हो गई हैं।
यह भूमि अधिग्रहण MMRDA की पार्टिसिपेटरी लैंड एक्विजिशन पॉलिसी को मिले सकारात्मक रिस्पॉन्स के कारण संभव हुआ है। इस नीति के तहत जमीन मालिकों को परियोजना में भागीदारी के कई विकल्प दिए जा रहे हैं, जिससे वे केवल भूमि देने वाले नहीं बल्कि विकास प्रक्रिया के सक्रिय भागीदार बन सकें।
रायगढ़ के पेन ग्रोथ कॉरिडोर को मुंबई 3.0 न्यू टाउन डेवलपमेंट एरिया के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से देश के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के करीब स्थित है, जिसमें अटल सेतु (MTHL), नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और विरार-अलीबाग मल्टी-मॉडल कॉरिडोर (VAMMC) शामिल हैं। इन परियोजनाओं से इस पूरे क्षेत्र को बड़े आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
MMRDA के अनुसार इस ग्रोथ सेंटर से भविष्य में लगभग 2 लाख से अधिक उच्च कौशल और अच्छी वेतन वाली प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने की संभावना है। इसके अलावा बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बनेंगे। इस विकास से विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में महत्वपूर्ण वृद्धि की उम्मीद है।
पार्टिसिपेटरी मॉडल के तहत जमीन मालिकों को कई विकल्प दिए जा रहे हैं। इनमें आपसी सहमति से भूमि अधिग्रहण शामिल है, जिसमें महाराष्ट्र रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एक्ट 1966 के प्रावधानों के तहत मुआवजा तय किया जाएगा। इसके अलावा डेवलपमेंट राइट्स के माध्यम से मुआवजा देने का विकल्प भी मौजूद है, जिसमें FSI और TDR जैसे प्रावधान शामिल हैं। कुछ मामलों में अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिए जा सकते हैं।
इसके साथ ही लैंड पूलिंग मॉडल भी प्रस्तावित है, जिसमें विकसित भूमि के बदले अविकसित भूमि का प्रावधान किया जाएगा। इस मॉडल के तहत जमीन मालिकों को विकसित भूमि का लगभग 22.5 प्रतिशत हिस्सा वापस मिलने का प्रावधान है, जैसा कि CIDCO मॉडल में देखा गया है।
MMRDA का कहना है कि यह पूरी नीति पारदर्शिता, न्यायसंगत प्रक्रिया और भागीदारी पर आधारित है, जिससे स्थानीय भूमि मालिक भी दीर्घकालिक विकास का हिस्सा बन सकें। मुंबई 3.0 को एक आधुनिक, योजनाबद्ध और आर्थिक रूप से मजबूत शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।





