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मुंबई : मुंबई के पोवई पुलिस थाने ने इंजीनियरिंग में फर्जी एडमिशन से जुड़े मामले में कार्रवाई करते हुए 11वें आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि गिरफ्तार आरोपी ने धोखाधड़ी करने वालों को ऐसे सिम कार्ड उपलब्ध कराए, जिन्हें ग्राहकों की जानकारी के बिना एक्टिवेट किया गया था।
पुलिस के अनुसार, यह मामला 17 जुलाई को दर्ज किया गया था। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने अबू सैफ नाम के 21 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पश्चिमी उपनगरों का रहने वाला बताया जा रहा है और वह एक सिम गैलरी में काम करता था।
फर्जी दस्तावेजों से सिम कार्ड जारी करने का आरोप
पुलिस जांच में आरोप लगाया गया है कि अबू सैफ ने बिना उचित दस्तावेजों और KYC प्रक्रिया पूरी किए कई सिम कार्ड उपलब्ध कराए। पुलिस का कहना है कि इन सिम कार्डों का इस्तेमाल धोखाधड़ी से जुड़े कामों में किया गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने साल 2026 में कथित तौर पर कम से कम 300 सिम कार्ड सप्लाई किए। आरोप है कि प्रत्येक सिम कार्ड के बदले आरोपी ने 1 हजार से 2 हजार रुपये तक की रकम ली।
23 संदिग्ध सिम कार्ड की पहचान
मामले की जांच कर रहे सब-इंस्पेक्टर रामचंद्र पिंजरकर ने ऐसे 23 सिम कार्ड की पहचान की है, जिन्हें कथित तौर पर बिना सही KYC वेरिफिकेशन के जारी किया गया था।
पुलिस अब इन सिम कार्डों के इस्तेमाल, उनसे जुड़े नंबरों और इनके जरिए हुई गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है।
इंजीनियरिंग एडमिशन फर्जीवाड़े से जुड़ा मामला
पुलिस के मुताबिक, पूरा मामला इंजीनियरिंग कॉलेज में फर्जी एडमिशन दिलाने से जुड़े एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इस मामले में अब तक कई लोगों की भूमिका सामने आ चुकी है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी एडमिशन के लिए किस तरह से लोगों को निशाना बनाया गया और इसमें तकनीकी संसाधनों का किस तरह इस्तेमाल किया गया।
आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया
गिरफ्तारी के बाद आरोपी अबू सैफ को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। आरोपी ने जमानत के लिए आवेदन भी किया है।
पुलिस अब उसकी भूमिका और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस खंगाल रही है सिम सप्लाई नेटवर्क
जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी तरीके से सिम कार्ड हासिल करने और सप्लाई करने का यह नेटवर्क कितना बड़ा है।
पुलिस को आशंका है कि बिना KYC सत्यापन के जारी किए गए सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर अपराध, धोखाधड़ी या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा सकता है।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
मामले में पुलिस पहले ही कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। अब 11वें आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी लोगों की पहचान की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
साइबर धोखाधड़ी रोकने पर जोर
इस मामले ने एक बार फिर फर्जी तरीके से सिम कार्ड जारी किए जाने की समस्या को सामने ला दिया है। पुलिस लगातार लोगों से अपील करती है कि वे अपने दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल न होने दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।
फिलहाल पोवई पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस फर्जी एडमिशन और सिम कार्ड नेटवर्क से जुड़े और खुलासे होने की संभावना है।





