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महाराष्ट्र
100 बम और घातक हथियार बरामद, माओवादियों की मुश्किलें बढ़ीं
Ratna Netam
6 Nov 2026 4:02 PM IST

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गढ़चिरौली। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा से लगे घने जंगलों में माओवादियों द्वारा जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटक सामग्री का जखीरा बरामद किया गया है। पुलिस ने विशेष खुफिया सूचना के आधार पर वांगेतुरी थाना क्षेत्र के माचुवंचा जंगल में तलाशी अभियान चलाकर पांच हथियार, 12 क्लेमोर विस्फोटक उपकरण, 100 सुतली बम और अन्य माओवादी सामग्री जब्त की। खतरनाक विस्फोटकों को बम निरोधक दस्ते ने मौके पर ही सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई 27 अक्टूबर 2026 को की गई थी।पुलिस के अनुसार, खुफिया विभाग को जानकारी मिली थी कि माओवादियों ने माचुवंचा के दुर्गम जंगल में बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री छिपाकर रखी है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने विशेष अभियान की योजना तैयार की। इसके बाद जिला पुलिस की विशेष अभियान इकाई और बम निरोधक दस्ते को जंगल में तलाशी के लिए भेजा गया।
गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के मार्गदर्शन में चलाए गए अभियान में सी-60 कमांडो की चार विशेष टीमें और बम खोज एवं निरोधक दस्ते की एक टीम शामिल रही। जवानों ने निर्धारित इलाके में सावधानीपूर्वक तलाशी अभियान शुरू किया। घने जंगल और दुर्गम रास्तों के बीच तलाशी लेने पर जमीन के नीचे छिपाकर रखा गया हथियारों और विस्फोटकों का भंडार मिला।बरामद सामग्री में 12 बोर की एक राइफल, तीन सिंगल शॉट राइफल, एक एयर गन, 12 क्लेमोर उपकरण, 100 सुतली बम, एक वायरलेस माइक्रोफोन सेट और माओवादी वर्दी से संबंधित कपड़े शामिल हैं। इसके अतिरिक्त हथियारों से जुड़ी अन्य सामग्री और विस्फोटक पदार्थ भी मिले हैं। पुलिस ने बरामद सामान को कब्जे में लेकर उसकी जांच शुरू की है।विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद अभियान में शामिल जवानों ने विशेष सावधानी बरती। बम निरोधक दस्ते के विशेषज्ञों ने खतरनाक सामग्री की जांच की और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत उसे घटनास्थल पर ही नष्ट कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे विस्फोटकों को बिना सुरक्षा उपायों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना जोखिम भरा हो सकता है।
पुलिस का मानना है कि यह सामग्री माओवादी संगठन ने भविष्य में इस्तेमाल करने के उद्देश्य से छिपाकर रखी होगी। हालांकि, बरामद विस्फोटकों का इस्तेमाल किस विशेष घटना या हमले के लिए किया जाना था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।गढ़चिरौली महाराष्ट्र के उन जिलों में शामिल रहा है, जहां लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों का प्रभाव देखा गया। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे जंगलों में सुरक्षा बलों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अभियान चलाने पड़ते रहे हैं। घने जंगल, पहाड़ी रास्ते और सीमावर्ती इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियां तलाशी अभियानों को कठिन बनाती हैं।पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए लगातार अभियान चलाए हैं। पुलिस की ओर से आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को मुख्यधारा में वापस लाने के प्रयास भी किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद दुर्गम क्षेत्रों में पहले से छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटकों की मौजूदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।मौजूदा बरामदगी से यह भी स्पष्ट होता है कि माओवादी गतिविधियों में कमी आने के बाद भी जंगलों में छोड़े गए हथियार और विस्फोटक लंबे समय तक खतरा पैदा कर सकते हैं। विशेष रूप से ग्रामीणों, वनकर्मियों और सुरक्षा बलों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में ऐसी सामग्री की मौजूदगी गंभीर सुरक्षा जोखिम बन सकती है।
इससे पहले अक्टूबर के शुरुआती दिनों में भी गढ़चिरौली पुलिस ने कोपर्शी जंगल क्षेत्र में अभियान चलाकर माओवादियों द्वारा छिपाई गई हथियारों और विस्फोटक सामग्री का जखीरा बरामद किया था। उस अभियान में राइफल, देसी हथियार, ग्रेनेड लॉन्चर और विस्फोटकों से संबंधित सामग्री मिलने की जानकारी सामने आई थी। लगातार हो रही बरामदगियों को पुलिस माओवादी नेटवर्क के बचे हुए संसाधनों की तलाश के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है।सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में छिपाए गए हथियारों को बरामद करना माओवादी विरोधी अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केवल सक्रिय सदस्यों की गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण से ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होती, बल्कि उनके पुराने ठिकानों और हथियारों के भंडार का पता लगाना भी आवश्यक होता है।गढ़चिरौली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सीमावर्ती और संवेदनशील वन क्षेत्रों में तलाशी अभियान आगे भी जारी रहेंगे। पुलिस का उद्देश्य छिपाकर रखी गई शेष विस्फोटक सामग्री का पता लगाना और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।इस कार्रवाई के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बरामद सामग्री कितने समय से जमीन के नीचे छिपाकर रखी गई थी और इसका संबंध किन माओवादी समूहों से हो सकता है। फिलहाल इस संबंध में किसी नई गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है।महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर हुई यह बरामदगी सुरक्षा बलों की सतर्कता और खुफिया सूचनाओं के महत्व को दर्शाती है। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने और भविष्य में किसी संभावित खतरे को रोकने के लिए ऐसे अभियान जारी रखे जाएंगे।
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