महाराष्ट्र

कलेक्टर के नाम पर SDO से ठगी

Kavita2
24 Sept 2026 3:37 PM IST
कलेक्टर के नाम पर SDO से ठगी
x

बीड। महाराष्ट्र के बीड जिले में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है, जिसमें जालसाज ने मजलगांव के सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) गौरव साहेबराव इंगोले को कथित तौर पर 30 हजार रुपये का चूना लगा दिया। आरोपी ने खुद को पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे का पर्सनल असिस्टेंट ‘जोशी’ बताते हुए एक सड़क हादसे की झूठी कहानी सुनाई। उसने दावा किया कि जिला कलेक्टर की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई है और कलेक्टर के बेटे को गंभीर चोट आई है, जिसके इलाज के लिए तत्काल पैसों की जरूरत है।

मामले का खुलासा तब हुआ जब एसडीओ को अपने साथ धोखाधड़ी होने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने मजलगांव ग्रामीण पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी की पहचान और पैसों के लेन-देन से जुड़े विवरण की जांच की जा रही है।

पूर्व मंत्री का PA बनकर किया फोन

शिकायत के मुताबिक, रविवार दोपहर गौरव साहेबराव इंगोले के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने अपना परिचय ‘जोशी’ के रूप में दिया और दावा किया कि वह पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे का पर्सनल असिस्टेंट है।

कॉलर ने अधिकारी का विश्वास हासिल करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल किया। उसने इंगोले को बताया कि जिला कलेक्टर सौरभ कटियार की गाड़ी का वड़वानी के पास दुर्घटना हो गई है। जालसाज ने दावा किया कि हादसे में कलेक्टर का बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया है और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत है।

फोन करने वाले ने पूरी बातचीत को आपातकालीन परिस्थिति की तरह पेश किया। इसी जल्दबाजी और गंभीर स्थिति का हवाला देकर उसने पैसों की व्यवस्था करने की बात कही।

तत्काल इलाज के नाम पर मांगे पैसे

आरोप है कि कॉलर ने कहा कि घायल बच्चे के इलाज के लिए तुरंत रकम की जरूरत है। प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों और पूर्व मंत्री के कथित निजी सहायक का नाम सामने आने के कारण एसडीओ को शुरुआती तौर पर बातचीत पर संदेह नहीं हुआ।

कथित आपात स्थिति को देखते हुए इंगोले ने बताए गए तरीके से 30 हजार रुपये भेज दिए। रकम ट्रांसफर होने के बाद जब उन्होंने मामले की वास्तविकता का पता लगाने की कोशिश की तो पूरी कहानी संदिग्ध निकली।

इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने अधिकारियों और राजनीतिक हस्ती का नाम इस्तेमाल कर उनके साथ साइबर धोखाधड़ी की है।

पुलिस थाने में दर्ज कराई शिकायत

ठगी का पता चलते ही गौरव साहेबराव इंगोले ने मजलगांव ग्रामीण पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

पुलिस अब उस मोबाइल नंबर का पता लगाने का प्रयास कर रही है, जिससे एसडीओ को फोन किया गया था। इसके साथ ही जिस खाते या डिजिटल माध्यम से 30 हजार रुपये का भुगतान किया गया, उससे संबंधित जानकारी भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

जांच के दौरान बैंक खाते, यूपीआई या अन्य डिजिटल ट्रांजैक्शन की जानकारी के जरिए आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जा सकता है। मोबाइल नंबर की तकनीकी जानकारी और कॉल से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।

बड़े नामों का इस्तेमाल कर बनाया भरोसा

इस मामले में साइबर ठग ने कथित तौर पर एक साथ कई परिचित नामों का इस्तेमाल किया। खुद को पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे का निजी सहायक बताने के साथ उसने जिला कलेक्टर का नाम लेकर दुर्घटना की कहानी बनाई। इससे फोन सुनने वाले व्यक्ति को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि मामला वास्तविक और बेहद जरूरी है।

इस तरह की ठगी में जालसाज अक्सर ऐसी परिस्थिति पैदा करते हैं, जिसमें सामने वाले व्यक्ति को निर्णय लेने या जानकारी सत्यापित करने के लिए पर्याप्त समय न मिले। दुर्घटना, अस्पताल में भर्ती होने, मेडिकल इमरजेंसी या किसी परिचित व्यक्ति के संकट में होने की बात कहकर तत्काल पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है।

साइबर ठगी का नया तरीका

ऑनलाइन और फोन के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी में लगातार नए तरीके सामने आ रहे हैं। कभी अधिकारी बनकर, कभी रिश्तेदार या परिचित का नाम लेकर तो कभी किसी आपात स्थिति का हवाला देकर पैसे मांगे जाते हैं। कई मामलों में आरोपी सोशल मीडिया या सार्वजनिक स्रोतों से लोगों और अधिकारियों से जुड़ी जानकारी जुटाकर अपनी कहानी को विश्वसनीय बनाने का प्रयास करते हैं।

मजलगांव के इस मामले में भी पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपी के पास संबंधित अधिकारियों के नाम और अन्य जानकारी कहां से आई। यह भी जांच का विषय हो सकता है कि आरोपी ने केवल एसडीओ को निशाना बनाया था या इसी तरह अन्य अधिकारियों से भी संपर्क करने की कोशिश की गई।

अनजान कॉल पर सत्यापन जरूरी

इस घटना ने एक बार फिर फोन कॉल पर पैसे मांगने के मामलों में सतर्कता की जरूरत को सामने रखा है। किसी दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर अचानक रकम मांगी जाए तो संबंधित व्यक्ति या उसके कार्यालय से स्वतंत्र रूप से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।

फोन करने वाला व्यक्ति चाहे किसी अधिकारी, नेता, कर्मचारी या परिचित का नाम क्यों न ले, केवल उसके दावे के आधार पर तत्काल डिजिटल भुगतान करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। खासकर अनजान मोबाइल नंबर से आए कॉल में अलग माध्यम से पहचान की पुष्टि करना साइबर ठगी से बचने का महत्वपूर्ण तरीका है।

फिलहाल मजलगांव ग्रामीण पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस तकनीकी और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सुरागों के आधार पर आरोपी की पहचान करने का प्रयास कर रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ठगी को किसने अंजाम दिया और 30 हजार रुपये की रकम किस खाते या माध्यम से प्राप्त की गई।

Next Story