- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- यूनिवर्सिटी में नौकरी...
यूनिवर्सिटी में नौकरी का सपना दिखाकर युवाओं से 18 लाख की ठगी

भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में नौकरी दिलाने का झांसा देकर महिलाओं समेत दर्जनों युवाओं से करीब 18 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप विश्वविद्यालय में कार्यरत एक संविदा कर्मचारी और उसके साथियों पर लगा है। पीड़ितों की शिकायत के आधार पर गांधी नगर थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। फिलहाल किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायत के मुताबिक, मुख्य आरोपी की पहचान नसीम खान के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में संविदा कर्मचारी के रूप में कार्यरत था। विश्वविद्यालय से जुड़ा होने के कारण बेरोजगार युवाओं ने उसकी बात पर भरोसा कर लिया। आरोप है कि उसने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर लोगों से संपर्क किया और विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने का दावा किया।
पीड़ितों का आरोप है कि नसीम खान और उसके साथियों ने उन्हें बताया था कि विश्वविद्यालय में नियुक्तियां होने वाली हैं और उनके संपर्क के माध्यम से नौकरी लग सकती है। आरोपियों ने कथित तौर पर अपनी पहुंच और प्रभाव का हवाला देकर युवाओं का विश्वास जीता। नौकरी की तलाश में भटक रहे कई युवक और महिलाएं उनके दावे में आ गए और अलग-अलग समय पर रुपये देना शुरू कर दिया।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने प्रत्येक व्यक्ति से उसकी कथित नौकरी और पद के अनुसार रकम मांगी। किसी से नकद भुगतान लिया गया तो किसी से अन्य माध्यमों से पैसे हासिल किए गए। कई पीड़ितों ने परिवार और परिचितों से रुपये उधार लेकर आरोपियों को दिए। सभी पीड़ितों से ली गई रकम मिलाकर करीब 18 लाख रुपये होने का दावा किया गया है।
पैसे लेने के बाद आरोपियों ने युवाओं को जल्द नियुक्ति-पत्र मिलने का भरोसा दिलाया। शुरुआत में उन्हें अलग-अलग तारीखें दी गईं और कहा गया कि प्रक्रिया चल रही है। लंबे समय तक नौकरी नहीं मिलने पर पीड़ितों ने आरोपियों से संपर्क किया तो उन्हें कथित तौर पर नए बहाने बताए गए। कभी दस्तावेजों की जांच जारी होने तो कभी नियुक्ति प्रक्रिया में देरी होने की बात कही गई।
आरोप है कि नौकरी दिलाने के बजाय कुछ पीड़ितों से अलग-अलग कारण बताकर और रुपये मांगे गए। उनसे कहा गया कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कराने, दस्तावेज तैयार करने या अधिकारियों तक रकम पहुंचाने के लिए अतिरिक्त पैसे देने होंगे। लगातार बढ़ती मांग से पीड़ितों को संदेह हुआ। उन्होंने नौकरी से संबंधित आधिकारिक जानकारी जुटाने और दिए गए आश्वासनों की पुष्टि करने का प्रयास किया।
जब लंबे समय बाद भी किसी को नौकरी नहीं मिली तो पीड़ितों ने अपने रुपये वापस मांगने शुरू किए। आरोपियों ने पहले जल्द भुगतान करने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में कथित तौर पर बातचीत से बचने लगे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि फोन कॉल का जवाब देना भी बंद कर दिया गया। बार-बार प्रयास के बावजूद जब न नौकरी मिली और न रकम वापस हुई तो पीड़ितों ने कानून का सहारा लेने का निर्णय लिया।
इसके बाद पीड़ित सामूहिक रूप से गांधी नगर थाने पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने आरोपियों से हुई बातचीत, भुगतान से जुड़े उपलब्ध दस्तावेज और अन्य साक्ष्य पुलिस को सौंपे। शिकायत के आधार पर पुलिस ने नसीम खान और उसके साथियों के खिलाफ कथित धोखाधड़ी से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कुल कितने लोगों से रकम ली गई और भुगतान किस माध्यम से हुआ। पीड़ितों की संख्या और कथित तौर पर ठगी गई रकम बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस सभी शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज कर उनके पास मौजूद बैंक लेनदेन, रसीद, ऑनलाइन भुगतान विवरण और मोबाइल संदेशों की जांच कर सकती है।
आरोपी संविदा कर्मचारी ने युवाओं को किस प्रकार अपने भरोसे में लिया और क्या उसने विश्वविद्यालय से जुड़े किसी दस्तावेज या पहचान का इस्तेमाल किया, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। यह पता लगाने का प्रयास होगा कि कथित गिरोह में कितने लोग शामिल थे और अलग-अलग आरोपियों की क्या भूमिका रही। पुलिस आरोपियों के बैंक खातों और आपसी लेनदेन की जानकारी भी जुटा सकती है।
विश्वविद्यालय में वास्तविक नियुक्ति प्रक्रिया से आरोपियों के दावों का कोई संबंध था या नहीं, इस पहलू की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। जरूरत पड़ने पर विश्वविद्यालय प्रशासन से आरोपियों की नियुक्ति, कार्यक्षेत्र और भर्ती संबंधी रिकॉर्ड मांगे जा सकते हैं। यह भी देखा जाएगा कि आरोपी को आगामी नियुक्तियों की कोई आधिकारिक जानकारी थी या उसने बेरोजगारों को प्रभावित करने के लिए झूठे दावे किए।
इस घटना ने शिक्षण संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के खतरे को फिर उजागर किया है। बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाने वाले लोग अक्सर प्रभावशाली अधिकारियों से पहचान, अंदरूनी पहुंच या बिना परीक्षा सीधी नियुक्ति का दावा करते हैं। जल्द नौकरी मिलने की उम्मीद में कई लोग बिना सत्यापन के उन्हें बड़ी रकम दे देते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी सरकारी विश्वविद्यालय या संस्थान में भर्ती आधिकारिक अधिसूचना और निर्धारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से ही होती है। अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाने का व्यक्तिगत दावा करने वाले किसी व्यक्ति को नकद या ऑनलाइन भुगतान करने से बचना चाहिए। भर्ती की जानकारी हमेशा संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट और विज्ञापन से सत्यापित करनी चाहिए।
फिलहाल पुलिस आरोपियों के संभावित ठिकानों की जानकारी जुटा रही है। उनसे पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद ही कथित ठगी की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। पीड़ितों को उम्मीद है कि आरोपियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई होगी और उनकी मेहनत की कमाई वापस मिल सकेगी।





