मध्य प्रदेश

जिला अस्पताल पहुंचने से पहले सड़क पर महिला ने बच्ची को दिया जन्म, कर्मचारी ने पहुंचाई मदद

Kavita2
14 Sept 2026 4:53 PM IST
जिला अस्पताल पहुंचने से पहले सड़क पर महिला ने बच्ची को दिया जन्म, कर्मचारी ने पहुंचाई मदद
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भिंड: जिला अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास सोमवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अल्ट्रासाउंड कराने पहुंची एक गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। अस्पताल के गेट तक पहुंचने से पहले ही महिला ने सड़क पर बच्ची को जन्म दे दिया। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों की भीड़ जमा हो गई। इसी दौरान ड्यूटी पर जा रही महिला कर्मचारी बिट्टी देवी ने तत्परता दिखाते हुए प्रसूता और नवजात को संभाला तथा दोनों को अस्पताल के डिलीवरी रूम तक पहुंचाया।

अस्पताल में चिकित्सकों ने तत्काल जच्चा और बच्चा की जांच की। आवश्यक उपचार और निगरानी के बाद दोनों को स्वस्थ बताया गया है। अचानक हुए प्रसव के कारण कुछ समय के लिए अस्पताल के बाहर अफरा-तफरी की स्थिति रही। राहत की बात यह रही कि समय रहते सहायता मिलने से प्रसूता और नवजात को सुरक्षित अस्पताल पहुंचा दिया गया।

अल्ट्रासाउंड कराने आई थी महिला

जानकारी के अनुसार, गर्भवती महिला सोमवार दोपहर अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भिंड जिला अस्पताल पहुंची थी। वह अस्पताल के मुख्य गेट से करीब 20 कदम की दूरी पर थी, तभी उसे अचानक तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। पीड़ा इतनी अधिक थी कि महिला के लिए आगे चलना संभव नहीं रहा।

महिला के साथ मौजूद लोगों ने उसे संभालने का प्रयास किया, लेकिन प्रसव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। अस्पताल के भीतर पहुंचाने का समय भी नहीं मिला और महिला ने सड़क पर ही बच्ची को जन्म दे दिया। अचानक सामने आए इस घटनाक्रम को देखकर आसपास मौजूद लोग भी घबरा गए। कुछ लोग सहायता के लिए आगे आए, जबकि अन्य ने अस्पताल के कर्मचारियों को सूचना देने का प्रयास किया।

सार्वजनिक स्थान पर प्रसव होने के कारण महिला की निजता बनाए रखना भी चुनौती बन गया। मौके पर उपस्थित महिलाओं ने कथित तौर पर प्रसूता को घेरकर सुरक्षित वातावरण देने की कोशिश की। इस दौरान अस्पताल की महिला कर्मचारी बिट्टी देवी वहां पहुंचीं और उन्होंने स्थिति को संभालने की जिम्मेदारी ली।

महिला कर्मचारी ने दिखाई तत्परता

बताया गया है कि बिट्टी देवी अपनी ड्यूटी पर जा रही थीं। अस्पताल के बाहर भीड़ और गर्भवती महिला को सड़क पर देखकर वह तुरंत मौके पर पहुंचीं। उन्होंने सबसे पहले नवजात और प्रसूता की स्थिति देखी। इसके बाद अन्य लोगों की सहायता से दोनों को जिला अस्पताल के प्रसव कक्ष तक पहुंचाया गया।

डिलीवरी रूम में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने महिला तथा नवजात की जांच की। प्रसव के बाद होने वाली जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए प्रसूता को निगरानी में रखा गया। नवजात बच्ची की सांस, हृदय गति, तापमान और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य मानकों की जांच की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच में दोनों की स्थिति सामान्य पाई गई।

अचानक और अस्पताल के बाहर हुए प्रसव में संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव और नवजात के शरीर का तापमान गिरने जैसी समस्याओं का खतरा रहता है। ऐसे मामलों में प्रसूता और बच्चे को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना जरूरी होता है। बिट्टी देवी की तत्परता के कारण दोनों को बिना देरी उपचार मिल सका।

अस्पताल परिसर में जुटी लोगों की भीड़

सड़क पर बच्ची के जन्म की जानकारी फैलते ही अस्पताल के मुख्य द्वार के आसपास बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। इससे कुछ समय के लिए रास्ते पर भीड़ की स्थिति बन गई। बाद में अस्पताल कर्मचारियों ने व्यवस्था संभाली और प्रसूता तथा नवजात को सुरक्षित तरीके से अंदर पहुंचाया।

घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने महिला कर्मचारी की तत्परता की सराहना की। लोगों का कहना था कि ऐसी परिस्थिति में घबराने के बजाय तत्काल सहायता उपलब्ध कराना सबसे महत्वपूर्ण होता है। कर्मचारी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए महिला को न केवल संभाला, बल्कि उसे आवश्यक चिकित्सा सहायता भी दिलाई।

वहीं, यह घटना गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और प्रसव की संभावित तारीख के आसपास विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। गर्भावस्था के अंतिम चरण में तेज दर्द, पानी आना या अन्य प्रसव संकेत मिलने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी जाती है।

प्रसव के कारणों और परिस्थितियों की जानकारी ली जाएगी

अस्पताल प्रशासन की ओर से यह जानकारी जुटाई जा सकती है कि महिला की गर्भावस्था की अवधि कितनी थी और वह किस क्षेत्र से अस्पताल आई थी। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि उसे पहले से प्रसव पीड़ा हो रही थी या अस्पताल के पास पहुंचने पर अचानक दर्द शुरू हुआ।

फिलहाल उपलब्ध तथ्यों से अस्पताल की लापरवाही स्थापित नहीं होती, क्योंकि महिला इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रही थी और प्रसव अचानक मुख्य द्वार से कुछ दूरी पहले हुआ। किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही का निष्कर्ष संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक बयान के बिना नहीं निकाला जाना चाहिए।

हालांकि, इस घटना से अस्पतालों में मुख्य प्रवेश द्वार के पास आपात सहायता की उपलब्धता पर चर्चा जरूर शुरू हो सकती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए प्रवेश द्वार पर व्हीलचेयर, स्ट्रेचर तथा प्रशिक्षित सहायक कर्मचारी उपलब्ध होने से ऐसी परिस्थितियों में तेजी से मदद पहुंचाई जा सकती है।

जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ

जिला अस्पताल में उपचार के बाद महिला और उसकी नवजात बच्ची दोनों की हालत स्वस्थ बताई गई है। चिकित्सकों ने प्रसूता को निगरानी में रखते हुए आवश्यक दवाएं और देखभाल उपलब्ध कराई। बच्ची की स्थिति पर भी स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से नजर रखी जा रही है।

सड़क पर अचानक हुए प्रसव से महिला और उसके परिजन कुछ देर के लिए भयभीत हो गए थे, लेकिन दोनों के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने राहत की सांस ली। घटना में महिला कर्मचारी बिट्टी देवी की सूझबूझ और त्वरित मदद महत्वपूर्ण साबित हुई। अस्पताल प्रशासन की ओर से घटना पर विस्तृत आधिकारिक विवरण की प्रतीक्षा की जा रही है।

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