मध्य प्रदेश

हर्स नहीं मिली तो कचरा उठाने वाली गाड़ी से ले जाना पड़ा महिला का शव

Kavita2
11 Aug 2026 2:17 PM IST
हर्स नहीं मिली तो कचरा उठाने वाली गाड़ी से ले जाना पड़ा महिला का शव
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छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में सोमवार को मानवता और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई। बड़ा मलहरा सिविल अस्पताल में एक महिला की मौत के बाद उसके शव को घर ले जाने के लिए शव वाहन यानी हर्स उपलब्ध नहीं हो सका। परिजनों को कथित तौर पर घंटों तक शव वाहन का इंतजार करना पड़ा। वाहन उपलब्ध नहीं होने पर आखिरकार नगर पालिका की कचरा उठाने वाली गाड़ी का इस्तेमाल शव को ले जाने के लिए किया गया।

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया। वीडियो में महिला के शव को कचरा उठाने वाली गाड़ी में ले जाते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने स्वास्थ्य और स्थानीय प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में किसी मरीज की मौत के बाद उसके शव को सम्मानजनक तरीके से घर पहुंचाने के लिए मूलभूत व्यवस्था उपलब्ध होनी चाहिए।

शव वाहन का घंटों इंतजार




जानकारी के अनुसार महिला की मौत बड़ा मलहरा सिविल अस्पताल में हुई थी। मौत के बाद परिजनों को शव घर ले जाना था। इसके लिए उन्होंने शव वाहन की व्यवस्था कराने का प्रयास किया। परिवार वालों का आरोप है कि उन्हें शव वाहन मिलने में काफी समय लगा और वे घंटों तक इंतजार करते रहे।

लंबे समय तक इंतजार के बावजूद जब हर्स उपलब्ध नहीं हो सकी तो परिवार के सामने शव को अस्पताल से घर ले जाने की समस्या खड़ी हो गई। इसी दौरान नगर पालिका की कचरा उठाने वाली गाड़ी का इस्तेमाल किया गया और महिला के शव को उसमें रखकर ले जाया गया।

वीडियो वायरल होने के बाद मामला आया सामने

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों का ध्यान इस ओर गया। वीडियो में एक महिला के शव को कचरा उठाने वाली गाड़ी में ले जाते हुए देखा जा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर से लेकर सोशल मीडिया तक इस घटना की चर्चा शुरू हो गई।

लोगों ने सवाल उठाया कि यदि किसी सरकारी अस्पताल में शव वाहन उपलब्ध नहीं है तो शव को अस्पताल से घर तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक और सम्मानजनक व्यवस्था क्यों नहीं की गई। लोगों का कहना है कि मृत व्यक्ति के परिजनों के लिए अंतिम समय पहले ही बेहद कठिन होता है। ऐसे में शव को कचरा उठाने वाली गाड़ी में ले जाने की स्थिति परिवार के लिए और अधिक पीड़ादायक हो सकती है।

सरकारी अस्पताल की सुविधाओं पर सवाल

घटना के बाद सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में शव वाहन जैसी आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रही है।

मरीजों के इलाज के अलावा अस्पताल की जिम्मेदारी यह भी होती है कि किसी मरीज की मृत्यु होने के बाद उसके शव को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से परिजनों को सौंपने की व्यवस्था हो। शव को घर तक पहुंचाने के लिए वाहन की सुविधा इसी व्यवस्था का हिस्सा मानी जाती है।

बड़ा मलहरा की घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि अस्पताल में शव वाहन की व्यवस्था कितनी प्रभावी है और आपात स्थिति में वैकल्पिक इंतजाम क्या हैं।

परिजनों के लिए मुश्किल भरा रहा समय

महिला की मौत के बाद परिवार पहले ही दुख में था। इसके बाद शव को घर ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। घंटों इंतजार के बाद कचरा उठाने वाली गाड़ी से शव ले जाने की स्थिति ने परिवार की परेशानी को और बढ़ा दिया।

परिजनों के सामने उस समय सबसे बड़ी चिंता शव को जल्द से जल्द घर ले जाने की थी। लंबे इंतजार के बाद उन्होंने उपलब्ध साधन का सहारा लिया। हालांकि, घटना का वीडियो सामने आने के बाद अब प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रशासन से जांच की मांग

वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स की ओर से मामले की जांच की मांग की जा रही है। लोग जानना चाहते हैं कि अस्पताल में शव वाहन उपलब्ध क्यों नहीं था और क्या परिवार को समय पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया था।

इसके अलावा यह भी सवाल उठ रहा है कि नगर पालिका की कचरा उठाने वाली गाड़ी में शव को ले जाने की नौबत आखिर क्यों आई। यदि शव वाहन खराब था या किसी अन्य कारण से उपलब्ध नहीं था, तो संबंधित विभाग को वैकल्पिक वाहन की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

सम्मानजनक अंतिम यात्रा की व्यवस्था जरूरी

किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके शव को सम्मानपूर्वक घर या अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचाना परिवार के लिए बेहद संवेदनशील विषय होता है। ऐसे में शव वाहन की उपलब्धता केवल सुविधा नहीं, बल्कि एक आवश्यक सेवा के रूप में देखी जाती है।

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में शव वाहन की उपलब्धता और उसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि किसी कारण से अस्पताल का शव वाहन उपलब्ध नहीं हो पाता है तो प्रशासन के पास तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए।

वीडियो ने व्यवस्था की पोल खोली

बड़ा मलहरा की घटना से जुड़े वीडियो ने सोशल मीडिया पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी है। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं की आधिकारिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शव वाहन उपलब्ध नहीं होने की वास्तविक वजह क्या थी और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।

फिलहाल घटना ने यह जरूर सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज की सुविधाओं के साथ-साथ मरीजों की मृत्यु के बाद उनके शव को सम्मानजनक तरीके से परिजनों तक पहुंचाने की व्यवस्था कितनी मजबूत है। प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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