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Bandhavgarh टाइगर रिज़र्व में शिफ्ट हुआ हिंसक हाथी, सैटेलाइट कॉलर से हो रही निगरानी

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश के अनूपपुर और शहडोल जिलों में तीन लोगों की मौत का कारण बने हाथी को अब बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में शिफ्ट कर दिया गया है। रेस्क्यू के बाद यह हाथी अपने नए प्राकृतिक आवास में धीरे-धीरे खुद को ढालने की कोशिश कर रहा है।
बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में मौजूद अधिकारियों के अनुसार, पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ से आए इस हाथी को 23 मई को दक्षिण शहडोल के जंगल क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया था। रेस्क्यू के बाद उसे सुरक्षित तरीके से खितोली रेंज के जंगल में छोड़ा गया।
बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि हाथी को ट्रैक करने के लिए उस पर सैटेलाइट कॉलर लगाया गया है। इस तकनीक की मदद से वन विभाग उसकी हर गतिविधि पर नजर रख रहा है और उसके मूवमेंट की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल यह हाथी अकेला घूम रहा है और अभी तक किसी अन्य हाथियों के झुंड में शामिल नहीं हुआ है। बांधवगढ़ में लगभग 70 हाथियों की मौजूदगी है, लेकिन यह नया हाथी अभी तक उनके समूह से अलग ही रह रहा है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगल के नए वातावरण में ढलने में समय लगता है, इसलिए उसकी गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
अनूपपुर जिला वन अधिकारी डेविड ने जानकारी दी कि इस हाथी ने अप्रैल के अंत और मई के पहले सप्ताह में अनूपपुर जिले में दो लोगों की जान ली थी। उनके अनुसार, दोनों ही घटनाओं में लोग जंगल क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे, जहां हाथी के हमले में उनकी मौत हो गई।
वन विभाग का कहना है कि यह हाथी पहले भी मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में शामिल रहा है, इसलिए उसे ट्रैक करना और नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। सैटेलाइट कॉलर से मिली जानकारी के आधार पर टीम उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है।
स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जंगल क्षेत्रों में अनावश्यक प्रवेश न करें और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
कुल मिलाकर, यह कदम मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में एक प्रयास माना जा रहा है, लेकिन हाथी की गतिविधियों पर नजर रखना अभी भी वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।





