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मुरैना के सरकारी स्कूल में छात्रों से बर्तन धुलवाने का वीडियो वायरल

मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल से सामने आए वीडियो ने स्कूलों में बच्चों की जिम्मेदारियों और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पोरसा तहसील के खरगापुरा स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल का बताया जा रहा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ छात्र मिड-डे मील के बाद अपने बर्तन धोते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों में नाराजगी है और शिक्षा विभाग से पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है।
मिड-डे मील के बाद बर्तन धोते दिखे बच्चे
वायरल वीडियो में स्कूल परिसर में बच्चे भोजन के बाद इस्तेमाल किए गए बर्तनों को साफ करते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद छात्रों से ही प्लेटें धुलवाई गईं। वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि बच्चों से इस तरह का काम किसके निर्देश पर कराया गया और क्या स्कूल में भोजन व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की पर्याप्त व्यवस्था है।
#WATCH | Students Spotted Washing Utensils After Mid-Day Meal At A Govt School In #Morena #MPNews #MadhyaPradesh pic.twitter.com/37eNWaeIcb
— Free Press Madhya Pradesh (@FreePressMP) August 22, 2026
घटना को लेकर अभिभावकों में विशेष नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि बच्चों को स्कूल शिक्षा हासिल करने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए भेजा जाता है। ऐसे में उनसे बर्तन साफ करवाने जैसी जिम्मेदारी लेना उचित नहीं माना जा सकता।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस घटना पर सवाल उठाए हैं। कई यूजर्स ने शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और स्कूलों में बच्चों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर चिंता जाहिर की।
लोगों का सवाल है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे मील जैसी योजनाएं चलाने का उद्देश्य उन्हें पोषण उपलब्ध कराने के साथ पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण देना है। यदि भोजन के बाद बच्चों से बर्तन धुलवाए जा रहे हैं तो स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या स्कूल में बर्तनों की सफाई के लिए निर्धारित व्यवस्था नहीं है या फिर बच्चों से काम करवाना आसान समझा गया। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर घटना के पूरे संदर्भ और जिम्मेदारी की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अभिभावकों ने जताई आपत्ति
घटना की जानकारी सामने आने के बाद अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए।
अभिभावकों के अनुसार, बच्चों को पढ़ाई के साथ अनुशासन और स्वावलंबन की सीख देना अलग बात है, लेकिन सामूहिक रूप से मिड-डे मील के बर्तन साफ करवाना एक अलग विषय है। इसकी जांच होनी चाहिए कि यह नियमित व्यवस्था थी या किसी विशेष परिस्थिति में बच्चों से ऐसा कराया गया।
शिक्षा विभाग की भूमिका पर नजर
वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर नजर है। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि छात्रों से अनुचित तरीके से बर्तन धुलवाए गए, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है।
जांच में यह भी देखा जाना जरूरी होगा कि स्कूल में मिड-डे मील के संचालन की व्यवस्था क्या है, भोजन परोसने और बर्तन साफ करने की जिम्मेदारी किसकी है और क्या स्कूल स्तर पर इसके लिए कोई निर्धारित कर्मचारी या व्यवस्था उपलब्ध है।
बच्चों की पढ़ाई से जुड़ा बड़ा सवाल
यह मामला केवल बर्तन धुलवाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी स्कूलों में बच्चों को उपलब्ध कराए जाने वाले शैक्षणिक वातावरण पर भी सवाल खड़ा करता है। स्कूल का प्राथमिक उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और उनके व्यक्तित्व का विकास करना है।
मिड-डे मील योजना का उद्देश्य भी बच्चों को स्कूल में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर उनकी उपस्थिति और शिक्षा में निरंतरता को बढ़ावा देना है। ऐसे में भोजन व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियों का असर बच्चों की पढ़ाई या सम्मान पर नहीं पड़ना चाहिए।
वायरल वीडियो की जांच जरूरी
सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। वीडियो कब बनाया गया, उसमें दिखाई दे रहे बच्चे किस परिस्थिति में बर्तन धो रहे थे, क्या यह स्कूल की नियमित व्यवस्था थी और क्या किसी शिक्षक या कर्मचारी ने बच्चों को ऐसा करने के लिए कहा था—इन सभी बिंदुओं की जांच की जानी चाहिए।
यदि घटना सही पाई जाती है तो भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए स्कूल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश और आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध करानी होंगी।
कार्रवाई से तय होगा संदेश
मुरैना के खरगापुरा स्कूल का यह मामला सामने आने के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों की नजर शिक्षा विभाग की जांच पर है। यदि विभाग मामले की गंभीरता से जांच कर जिम्मेदारी तय करता है, तो इससे अन्य सरकारी स्कूलों में भी बच्चों से गैर-शैक्षणिक कार्य कराने को लेकर जवाबदेही का संदेश जाएगा।
वहीं, यदि जांच में वीडियो का संदर्भ अलग पाया जाता है तो विभाग को वास्तविक स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी होगी, ताकि बिना तथ्य के किसी संस्था या कर्मचारी पर आरोप न लगे।
फिलहाल वायरल वीडियो ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की भूमिका, मिड-डे मील व्यवस्था और स्कूल प्रशासन की जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। अभिभावकों की मांग है कि शिक्षा विभाग मामले की निष्पक्ष जांच करे और यदि बच्चों से अनुचित तरीके से काम कराया गया है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।





