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सिंगरौली में विधायक की कार धोने के लिए फायर टेंडर के इस्तेमाल का वीडियो वायरल

सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली नगर निगम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में नगर निगम के दो कर्मचारी कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक रामनिवास शाह की निजी कार को धोने के लिए फायर टेंडर का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। वीडियो मंगलवार का बताया जा रहा है। फुटेज सामने आने के बाद सरकारी आपातकालीन संसाधनों के निजी इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
वायरल हो रहे वीडियो के मुताबिक, नगर निगम के कर्मचारी सड़क किनारे खड़ी एक कार पर फायर टेंडर से जुड़े पाइप के जरिए पानी डालते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह कार विधायक रामनिवास शाह की निजी कार है। हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि और उसके पीछे की परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
राहगीर ने रिकॉर्ड किया वीडियो
VIP treatment, MP edition:
— #YeThikKarkeDikhao (@YTKDIndia) August 25, 2026
A fire brigade has reportedly been called in to wash the Singrauli MLA’s car.
Because apparently, even a bucket of water is too ordinary for VIP culture. pic.twitter.com/wzg6Zygp1Y
बताया जा रहा है कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो किसी राहगीर ने अपने मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया था। इसके बाद यह फुटेज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया और देखते ही देखते वायरल हो गया।
वीडियो में कथित तौर पर दो नगर निगम कर्मचारी फायर टेंडर के साथ दिखाई दे रहे हैं। वे फायर टेंडर से जुड़े पाइप का इस्तेमाल करते हुए सड़क पर खड़ी कार पर पानी डालते नजर आते हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाया कि फायर टेंडर जैसे महत्वपूर्ण आपातकालीन संसाधन का इस्तेमाल निजी वाहन की सफाई के लिए किस आधार पर किया गया।
बालाउजी इलाके का बताया जा रहा है वीडियो
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, वीडियो बालाउजी इलाके में नगर निगम के सरकारी आवास के पास रिकॉर्ड किया गया था। यही वह स्थान बताया जा रहा है जहां कथित तौर पर विधायक की कार को फायर टेंडर से धोया जा रहा था।
फायर टेंडर नगर निगम और दमकल विभाग की आपातकालीन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। आग लगने या अन्य आपदा की स्थिति में इन वाहनों का इस्तेमाल लोगों की जान और संपत्ति बचाने के लिए किया जाता है। ऐसे में इनके किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सोशल मीडिया पर बहस तेज
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने इसे सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग का मामला बताया है, जबकि अन्य लोगों ने नगर निगम प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि फायर टेंडर किसी व्यक्ति या निजी वाहन की धुलाई के लिए नहीं, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए होता है। यदि सरकारी वाहन और पानी का इस्तेमाल निजी काम में किया गया है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि संबंधित कर्मचारियों को वाहन का इस्तेमाल करने के लिए किस स्तर से निर्देश मिले थे या उन्होंने अपने स्तर पर ऐसा किया।
विधायक की निजी कार होने का दावा
वीडियो के साथ यह दावा किया जा रहा है कि जिस वाहन को फायर टेंडर से धोया जा रहा था, वह BJP विधायक रामनिवास शाह की निजी कार है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो मामला और गंभीर हो सकता है, क्योंकि सरकारी आपातकालीन संसाधन के निजी उपयोग को लेकर प्रशासनिक नियमों के तहत सवाल खड़े हो सकते हैं।
हालांकि, पूरे मामले में विधायक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है। इसी तरह नगर निगम प्रशासन ने भी वायरल वीडियो को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया है।
फायर टेंडर का इस्तेमाल क्यों महत्वपूर्ण?
फायर टेंडर किसी भी नगर निकाय की आपदा प्रबंधन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। आग लगने, दुर्घटना या अन्य आपात स्थिति में घटनास्थल तक पानी और दमकल उपकरण पहुंचाने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे वाहन और उनके उपकरण हर समय आपातकालीन जरूरतों के लिए तैयार रखे जाते हैं।
यदि किसी फायर टेंडर को गैर-आपातकालीन काम में लगाया जाता है, तो उस अवधि में किसी वास्तविक घटना के सामने आने पर संसाधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि इस तरह के वाहनों के इस्तेमाल को लेकर निर्धारित नियम और प्रक्रियाएं होती हैं।
कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल
वीडियो सामने आने के बाद नगर निगम के दोनों कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि यह पुष्टि होती है कि उन्होंने जानबूझकर फायर टेंडर का इस्तेमाल निजी कार धोने के लिए किया, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना बन सकती है।
प्रशासनिक जांच में यह पता लगाया जा सकता है कि कर्मचारियों को वाहन लेकर मौके पर जाने का निर्देश किसने दिया था, फायर टेंडर का उपयोग किस उद्देश्य से दर्ज किया गया था और उस दौरान सरकारी पानी तथा अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह हुआ।
जांच से सामने आएगा सच
मामले में सबसे अहम सवाल अब यह है कि फायर टेंडर का इस्तेमाल किसके निर्देश पर हुआ और क्या इसके लिए कोई आधिकारिक अनुमति ली गई थी। वायरल वीडियो के आधार पर उठ रहे सवालों का जवाब नगर निगम प्रशासन की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।
प्रशासन यदि मामले की जांच करता है तो वीडियो की सत्यता, घटनास्थल, वाहन की पहचान और संबंधित कर्मचारियों के बयान के आधार पर तथ्यों की पुष्टि की जा सकती है। साथ ही यह भी जांचना जरूरी होगा कि फायर टेंडर उस समय ड्यूटी पर था या किसी अन्य उद्देश्य के लिए तैनात किया गया था।
फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने सिंगरौली नगर निगम की कार्यप्रणाली और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर बहस छेड़ दी है। विधायक की कार को फायर टेंडर से धोने का दावा सही है या नहीं, यह आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन वीडियो ने सरकारी आपातकालीन संसाधनों के उपयोग और अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।





