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सरकारी स्कूल में बच्चों से मजदूरी जैसा काम कराने का वीडियो वायरल, सतना में मचा हड़कंप

सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले से सरकारी स्कूल की व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में स्कूल परिसर में बच्चे मजदूरों की तरह काम करते दिखाई दे रहे हैं। कुछ छात्र फावड़े से मिट्टी और बजरी खोदकर उसे टब व हाथगाड़ी में भरते और दूसरी जगह ले जाते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी है और स्कूल में बच्चों से इस तरह का काम कराए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि यह मामला रामपुर बघेलान ब्लॉक के ट्योंधरा नंबर-1 स्थित सरकारी स्कूल का है। वायरल हो रहा वीडियो करीब दो दिन पुराना बताया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। लोगों का कहना है कि जिन बच्चों के हाथों में किताब-कॉपी और कलम होनी चाहिए, उन्हें स्कूल परिसर में निर्माण या मिट्टी हटाने जैसे काम में लगाया जाना गंभीर विषय है।
सतना: रामपुर बघेलान स्कूल का एक वीडियो वायरल !☺️ बच्चों के हाथों में किताब की जगह फावड़ा थमाकर मजदूरी कराई जा रही है।पढ़ाई छोड़कर बच्चे निर्माण सामग्री ढोने को मजबूर हैं। क्या प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करेगा?#Satna #MadhyaPradesh #ChildRights #Education #ViralVideo #MPNews pic.twitter.com/bJa0aDRspj
— Deepesh Singh 🇮🇳 (@deepeshjourno) August 11, 2026
वीडियो में कुछ छात्र स्कूल परिसर में फावड़े से मिट्टी खोदते दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद मिट्टी और बजरी को टब या हाथगाड़ी में भरा जा रहा है और बच्चे उसे उठाकर दूसरी जगह ले जा रहे हैं। बच्चों को इस तरह काम करते देखकर वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने इसे कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया और लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
स्कूल परिसर में बच्चों से मजदूरी जैसा काम कराए जाने के आरोप ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा जाता है। उनसे शारीरिक श्रम कराना उनके अधिकारों और शिक्षा के उद्देश्य के विपरीत है। हालांकि इस पूरे मामले में स्कूल प्रबंधन या संबंधित अधिकारियों की ओर से आधिकारिक रूप से क्या स्पष्टीकरण दिया गया है, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा।
वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है कि छात्र समूह में काम कर रहे हैं। कुछ बच्चे फावड़े से मिट्टी खोद रहे हैं, जबकि कुछ दूसरे बच्चे हाथगाड़ी में बजरी भरते नजर आ रहे हैं। इसके बाद उन्हें दूसरी जगह ले जाया जा रहा है। वीडियो में बच्चों की गतिविधियों से यह स्पष्ट दिखाई देता है कि वे स्कूल परिसर में किसी प्रकार के मिट्टी या निर्माण संबंधी कार्य में लगे हुए हैं।
मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि स्कूल परिसर में यदि निर्माण, मरम्मत या मिट्टी हटाने का काम चल रहा था तो इसके लिए श्रमिकों की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। बच्चों को ऐसे कार्य में शामिल करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता। अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
इस घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित और सीखने का स्थान होना चाहिए। वहां छात्रों से पढ़ाई के अलावा इस तरह के शारीरिक कार्य कराए जाने की शिकायत सामने आने पर संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा स्थिति की जांच करना जरूरी हो जाता है।
वायरल वीडियो को लेकर यह भी सवाल उठ रहा है कि जब बच्चे स्कूल परिसर में फावड़े और हाथगाड़ी लेकर काम कर रहे थे, उस समय वहां मौजूद शिक्षकों या कर्मचारियों ने उन्हें रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया। यदि काम स्कूल की किसी आवश्यकता के कारण कराया जा रहा था तो बच्चों को इसमें शामिल करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया, यह भी जांच का विषय हो सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल प्रबंधन से जानकारी ली जा सकती है। जांच में यह देखा जाना जरूरी होगा कि वीडियो कब बनाया गया, उस समय स्कूल में कौन-कौन मौजूद था और बच्चों को किसके निर्देश पर काम में लगाया गया। साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि क्या बच्चों से नियमित रूप से ऐसे कार्य कराए जाते थे या वीडियो में किसी विशेष दिन की घटना सामने आई है।
बच्चों के अभिभावकों के लिए भी यह मामला चिंता बढ़ाने वाला है। वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण की उम्मीद में स्कूल भेजते हैं। यदि स्कूल में ही बच्चों को निर्माण या मजदूरी जैसे कार्यों में लगाया जाता है तो इससे उनकी सुरक्षा और शिक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मामले की जांच केवल वीडियो तक सीमित न रहे, बल्कि स्कूल की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की जाए। स्कूल परिसर में चल रहे निर्माण या अन्य विकास कार्यों की जानकारी भी जुटाई जानी चाहिए। यदि किसी योजना के तहत काम कराया जा रहा था तो उसकी प्रक्रिया और जिम्मेदार एजेंसी की भी जांच होनी चाहिए।
वीडियो के सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों में खासा आक्रोश है। कई लोग इसे बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार बताते हुए संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय पूरे मामले की आधिकारिक जांच और तथ्यों की पुष्टि जरूरी है।
शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को ज्ञान, कौशल और बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध कराना है। स्कूल परिसर में छात्रों से ऐसा काम कराया जाना, यदि जांच में सही पाया जाता है, तो यह गंभीर प्रशासनिक और शैक्षणिक लापरवाही का मामला हो सकता है। इसलिए जांच के बाद जिम्मेदारी तय करना और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल ट्योंधरा नंबर-1 स्कूल का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। वीडियो में बच्चों को फावड़े से मिट्टी खोदते, बजरी भरते और उसे दूसरी जगह ले जाते हुए देखा जा रहा है। अब निगाह प्रशासन और शिक्षा विभाग की जांच पर है। जांच से ही स्पष्ट होगा कि बच्चों को किस परिस्थिति में काम में लगाया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।
सतना जिले के इस मामले ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई के माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावक और स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएगा और यदि बच्चों से नियमों के विपरीत काम कराया जाना साबित होता है तो जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।





