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मंडला में झोपड़ीनुमा सरकारी स्कूल का वीडियो वायरल, ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

मंडला: मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में विकास की रफ्तार तेज होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। इसी बीच मंडला जिले से सामने आया एक वीडियो सरकारी शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी ढांचे पर सवाल खड़े कर रहा है। वीडियो में एक झोपड़ीनुमा भवन में संचालित होते सरकारी प्राथमिक स्कूल को दिखाया गया है, जहां छोटे बच्चे पढ़ाई करते नजर आ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में यूनिफॉर्म पहने कई बच्चे एक अस्थायी झोपड़ी जैसी संरचना के अंदर बैठे दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह स्कूल मंडला जिले की सिंघानपुरी तहसील क्षेत्र में खेतों के बीच स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय है।
Dear @theskindoctor13 , once the money is credited to your account for the above post, just sit and think about these kids of same Madhya Pradesh.
— Rohit (@Iam_Rohit_G) August 5, 2026
This a primary school for students belonging to class 1 to Class 5.
They sit together in one room and study and eat their mid day… pic.twitter.com/R9cifIF7ji
वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के लिए उपलब्ध सुविधाओं को लेकर चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई करने का अधिकार है, लेकिन कई ग्रामीण इलाकों में स्कूल भवन, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी अब भी बनी हुई है।
मध्य प्रदेश सरकार लगातार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने की बात करती रही है। इसके बावजूद दूरदराज के क्षेत्रों में कई स्कूलों की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। मंडला से सामने आए इस मामले ने एक बार फिर ग्रामीण शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल भवनों की कमी और संसाधनों का अभाव बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित कर सकता है। खासकर बारिश और खराब मौसम के दौरान अस्थायी या कमजोर संरचनाओं में पढ़ाई करना बच्चों और शिक्षकों दोनों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिक शिक्षा बच्चों के भविष्य की नींव होती है। ऐसे में शुरुआती स्तर पर उन्हें सुरक्षित, सुविधाजनक और सीखने के अनुकूल माहौल मिलना जरूरी है। स्कूल भवन और मूलभूत सुविधाएं केवल भौतिक संरचना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता से भी जुड़ी होती हैं।
मंडला जैसे आदिवासी बहुल जिलों में शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना प्रशासन के लिए लंबे समय से चुनौती रहा है। भौगोलिक परिस्थितियां, दूर-दराज के गांव और सीमित संसाधन कई बार विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा बनते हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन की ओर से मामले की जांच और वास्तविक स्थिति का पता लगाने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों द्वारा यह देखा जाएगा कि स्कूल की वर्तमान स्थिति क्या है, बच्चों को किन परिस्थितियों में पढ़ाया जा रहा है और वहां स्थायी भवन या अन्य सुविधाओं की जरूरत है या नहीं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए जल्द से जल्द उचित व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी शहरों की तरह बेहतर शिक्षा सुविधाएं मिलनी चाहिए।
यह मामला केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत को सामने लाता है। सरकारी योजनाओं के बावजूद यदि स्कूल भवन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा और भविष्य पर पड़ सकता है।
मंडला से सामने आए इस वीडियो ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि विकास की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक किस हद तक पहुंच रहा है। अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी कि बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।





