मध्य प्रदेश

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बनेगा चीतों का तीसरा घर, 7 अक्टूबर को छोड़े जाएंगे दो चीते

Kavita2
6 Oct 2026 5:51 PM IST
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बनेगा चीतों का तीसरा घर, 7 अक्टूबर को छोड़े जाएंगे दो चीते
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मध्य प्रदेश : चीता संरक्षण परियोजना अब एक नए चरण में प्रवेश करने जा रही है। कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के बाद अब बुंदेलखंड क्षेत्र के सागर जिले में स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व चीतों का तीसरा घर बनने जा रहा है। बुधवार, 7 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यहां दो चीतों को छोड़ेंगे।

अधिकारियों के अनुसार, कूनो नेशनल पार्क से दो चीतों को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया गया है। इनमें एक नर चीता थोलू और एक मादा चीता CCB-3 शामिल हैं। दोनों को नए आवास में छोड़े जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

यह कार्यक्रम वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के अंतिम दिन आयोजित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल सागर जिले ही नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने वाला है।

मध्य प्रदेश पहले ही देश में चीता पुनर्वास परियोजना का प्रमुख केंद्र बन चुका है। कूनो नेशनल पार्क में चीता परियोजना की शुरुआत के बाद इसे धीरे-धीरे अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों तक विस्तार देने की योजना पर काम किया जा रहा है।

इसी क्रम में गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी को दूसरा चीता आवास बनाया गया और अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को तीसरे केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

वन विभाग का मानना है कि चीता परियोजना को केवल एक ही क्षेत्र तक सीमित रखना लंबे समय के लिहाज से उचित नहीं है। अलग-अलग सुरक्षित आवास विकसित होने से चीतों की आबादी के प्रबंधन, संरक्षण और निगरानी में अधिक सुविधा मिलेगी।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के लिए उपयुक्त बनाने से पहले यहां कई स्तरों पर तैयारियां की गई हैं। वन क्षेत्र, प्राकृतिक आवास, शिकार प्रजातियों की उपलब्धता और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर योजना तैयार की गई।

चीतों को छोड़ने के बाद उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। वन विभाग की टीम उनके व्यवहार, भोजन, स्वास्थ्य और नए क्षेत्र के प्रति अनुकूलन की निगरानी करेगी।

नर चीता थोलू और मादा चीता CCB-3 के लिए शुरुआती दौर में विशेष मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाएगी। नए परिवेश में उनके मूवमेंट को ट्रैक करना महत्वपूर्ण होगा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में होने वाला यह कार्यक्रम राज्य सरकार के वन्यजीव संरक्षण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

सरकार का प्रयास है कि मध्य प्रदेश को चीता संरक्षण के वैश्विक मॉडल के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए वैज्ञानिक प्रबंधन, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और वन विभाग की नियमित निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बुंदेलखंड क्षेत्र का महत्वपूर्ण वन क्षेत्र है। यहां पहले से बाघ समेत कई वन्यजीव प्रजातियां पाई जाती हैं। चीतों की मौजूदगी से इस क्षेत्र का जैव विविधता महत्व और बढ़ जाएगा।

हालांकि बाघ और चीता अलग-अलग प्रकार के आवास और शिकार व्यवहार से जुड़े हैं, इसलिए उनके प्रबंधन के लिए विस्तृत वैज्ञानिक योजना जरूरी होती है।

वन्यजीव विशेषज्ञों की मदद से इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि चीतों को पर्याप्त खुला क्षेत्र और भोजन उपलब्ध हो।

चीता संरक्षण परियोजना का उद्देश्य केवल चीतों की संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि उनके लिए दीर्घकालिक और सुरक्षित आबादी विकसित करना है।

इसके साथ ही घास के मैदानों और खुले वन क्षेत्रों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। ऐसे आवास कई अन्य वन्यजीव प्रजातियों के लिए भी महत्वपूर्ण होते हैं।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीते आने से पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। हालांकि शुरुआती चरण में पर्यटन गतिविधियों से ज्यादा प्राथमिकता चीतों की सुरक्षा और अनुकूलन को दी जाएगी।

स्थानीय लोगों के लिए भी यह परियोजना भविष्य में नए अवसर पैदा कर सकती है। वन्यजीव पर्यटन, गाइड सेवा, स्थानीय रोजगार और संरक्षण आधारित गतिविधियों से आसपास के गांवों को लाभ मिल सकता है।

सरकार की कोशिश होगी कि स्थानीय समुदायों को भी संरक्षण प्रक्रिया में जोड़ा जाए। इसके लिए जागरूकता अभियान और वन्यजीव सुरक्षा से संबंधित कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं।

चीता परियोजना के विस्तार के साथ वन विभाग पर जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद चीतों की निगरानी, स्वास्थ्य परीक्षण और सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित टीमें तैनात करनी होंगी।

आपात स्थिति से निपटने के लिए पशु चिकित्सकों और रेस्क्यू टीमों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।

कूनो से नए क्षेत्र में चीतों का स्थानांतरण परियोजना के लिए महत्वपूर्ण परीक्षण होगा। इससे यह भी समझने में मदद मिलेगी कि राज्य के अलग-अलग वन क्षेत्रों में चीता आबादी को किस तरह विकसित किया जा सकता है।

7 अक्टूबर को होने वाला कार्यक्रम वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के समापन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

अधिकारियों का कहना है कि दो चीतों की रिहाई के साथ सागर और बुंदेलखंड में वन्यजीव संरक्षण का नया दौर शुरू होगा।

कूनो नेशनल पार्क में चीता परियोजना की शुरुआत के बाद से मध्य प्रदेश लगातार नए सुरक्षित आवास विकसित करने पर काम कर रहा है।

गांधी सागर के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को तीसरे चीता केंद्र के रूप में चुना जाना इसी विस्तार योजना की अगली कड़ी है।

फिलहाल सभी की नजर नर चीता थोलू और मादा CCB-3 पर रहेगी कि वे नए आवास में कितनी जल्दी खुद को ढालते हैं।

इनकी सफल बसाहट भविष्य में अन्य चीतों को भी इस क्षेत्र में लाने की संभावनाओं को मजबूत कर सकती है।

कुल मिलाकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की एंट्री मध्य प्रदेश की वन्यजीव संरक्षण नीति में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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