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Indore निगम बजट में वंदे मातरम विवाद, महिला कांग्रेस पार्षद ने गाने से मना किया

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में बुधवार को वंदे मातरम गाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस की महिला पार्षद फौजिया शेख अलीम ने इस्लामी मान्यताओं का हवाला देते हुए राष्ट्रीय गीत गाने से मना कर दिया। इसके बाद सत्ताधारी बीजेपी के पार्षद और चेयरमैन के पोडियम पर पहुंचकर नारे लगाने लगे।
हंगामे के बीच चेयरमैन मुन्नालाल यादव ने अलीम को सदन से बाहर जाने का निर्देश दिया। इस दौरान सदन में जोरदार विरोध और विरोधाभास देखने को मिला। अलीम ने बाद में मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके धर्म के अनुसार उन्हें 'वंदे मातरम' गाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम संस्कृत भाषा का वाक्य है, जिसका अर्थ होता है "मैं आपको प्रणाम करता हूँ, माँ"।
इस विवाद के बाद बजट सत्र कुछ समय के लिए बाधित हो गया और सदन में कई पार्षदों के बीच तकरार देखने को मिली। बीजेपी पार्षदों ने कहा कि राष्ट्रीय गीत गाना हर नागरिक का कर्तव्य है और इसे सभी बैठक में शुरू में गाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक तरीके से यह अभ्यास सदन की गरिमा को बनाए रखने के लिए किया जाता है।
कांग्रेस पार्षद ने स्पष्ट किया कि उनका मना करना किसी भी प्रकार के राजनीतिक विरोध या राष्ट्रविरोधी भावना का परिणाम नहीं था, बल्कि यह उनके धार्मिक आस्थाओं के अनुरूप था। उन्होंने कहा कि धर्म और व्यक्तिगत आस्था के आधार पर कुछ प्रतिबंध हो सकते हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है।
सत्र के दौरान मौजूद अन्य पार्षदों ने इस मुद्दे पर तीखी टिप्पणियां कीं। कुछ ने इसे व्यक्तिगत आस्था का मामला बताया तो कुछ ने इसे सदन की मर्यादा पर हमला करार दिया। अधिकारियों ने स्थिति को शांत करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप किया और सदन के कामकाज को फिर से शुरू किया।
इस घटना ने स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर भी बड़ी हलचल मचा दी। कई नागरिकों ने धार्मिक आस्था और राष्ट्रीय प्रतीकों के बीच संतुलन बनाने की बात कही। वहीं कुछ लोगों ने पार्षद के रवैये को आलोचनात्मक नजर से देखा।
नगर निगम प्रशासन ने कहा कि सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान किया जाएगा और भविष्य में ऐसे मामलों में सदन की कार्यवाही को प्रभावित न करने के लिए नियमों को स्पष्ट किया जाएगा।
वंदे मातरम विवाद ने नगर निगम सत्र में राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही स्तर पर बहस को जन्म दिया। इस घटना से यह सवाल भी उठता है कि कैसे धार्मिक आस्था और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।





